Whether our public functionaries can see this truth.

1 comment on Whether our public functionaries can see this truth.

  1. खुले आम भ्रस्टाचार का गंदा खेल चल रहा हैं लेकिन किसी को कुछ भी मालूम नहीं हैं क्या इसी को इमानदारी कहते हैं |विश्व की सब से बड़े जनतंत्र में इसी प्रकार की आराजकता रहती हैं |यह तब हो रहा हैं जब देश में मोदी का शासन हैं और उन्होंने देश की जनता को आश्वासन दिया हैं की वे भ्रष्टाचार कम करेंगे | उसी क्रम में लोकपाल की नियुक्ति होनी हैं लेकिन कब होगी समझ में नहीं आता हैं |कांग्रेस कम से कम नियुक्ति तो कर रही थी |क्या ये नेता हम मतदाताओं को मुर्ख समझते हैं |सोचिये हर जगह लूट खसोट मची हुई है फिर भी साहब इमानदार हैं |प्रेस और मीडिया के माध्यम से झूठी इमानदारी दिखाना आसान हैं |अब कड़ी परीक्षा हैं | क्या कोई चोर अपने आप को ईमान दार कह सकता हैं |संभव हैं कुछ पल के लिए |

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