Whether not contempt of court committed by S.D.M. itself by passing administrative orders in sub judice case

आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
40019917002995
आवेदक कर्ता का नाम:
ओम प्रकाश दुबे
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
8756443362,8756443362
विषय:
विषय क्या उपजिलाधिकारी सदर न्यायालय में विबादित और विचाराधीन मुक़दमे में जिला विकास अधिकारी मनोज कुमार राय आदेश पास कर सकते है और जिलाधिकारी महोदय यह बताये की खुद उपजिलाधिकारी महोदय जब इस प्रकार का आदेश पास करना बंद कर दिए तो अब उनका स्थान मनोज कुमार राय ने ले लिया है| क्या यह आराजकता नही है | श्री मान जी प्रार्थी का घर थाना प्रभारी विन्ध्याचल जिला मिर्ज़ापुर द्वारा समस्त नियम वआदेशो को दरकिनार कर निर्माण कार्य रुकवाया जा रहा है | With great respect to revered Sir,
your applicant invites the kind attention of the Hon’ble Sir to the following
submissions as follows 1-It is submitted before the Hon’ble Sir that
वाद संख्या D-२०१४१६५३००१७३२ सन २०१४ न्यायलय उपजिलाधिकारी सदर मिर्ज़ापुर , सूर्य नारायण दुबे बनाम उमाशंकर दुबे वगैरहदिनांक १३०४२०१७ सुनवाई प्रश्नोत्तरी का अवलोकन करे | प्रश्न कृपया बताया जाय कि मुकदमा उपरोक्त में बिबादित आन २५००६३० , ४१ ००१३० , ४४ग़ ०००६० , १०२१३००० ,१०४०१७७० ,१०५०११४० है मौजा नीबीगहरवार तप्पाछानबे परगना कंतित तहसील सदर जिला मिर्ज़ापुर के सम्बन्ध में बटवारा का मुक़दमा दाखिल है | उत्तर श्री मान जी जी हाँ | प्रश्न कृपया बताया जाय कि मुकदमा उपरोक्त में बिबादित आराजी मात्र में प्रतिवादी नंबर आदित्य नारायण दुबे कोनिर्माण कार्य करने के सम्बन्ध में कोई स्थगन आदेश पारित किया गया है उत्तरजी नही | श्री मानजी कृपया संलग्नक पेज का अवलोकन करे | -It is submitted before the Hon’ble
Sir that
आज प्रार्थी खुद जिला विकास अधिकारी से उनके ऑफिस में मिला उनको उनके द्वारा कराइ जा रही आराजकता के बारे में तपसील से बयान किया उन्होंने ने कहा जा कर विन्ध्याचल पुलिस से मिलो हमारे सामने रोज हजारो फाइल आती है मुझे तो यह भी नही मालुम की तुम कह क्या रहे हो जाके अपनी सरकार से कहो जो तहसील में बैठा कर उन मामलो में आदेश कराती है जो हमारे कार्यक्षेत्र में ही नही आता | सरकार ने नियम बना दिया है की जितने मामले तहसील में आये सभी पे कार्यवाही करो इस लिए हम संवंधित को अग्रसारित कर देते है प्रार्थना पत्र को यह बात पुलिस और उपजिलाधिकारी न्यायालय को सोचना चाहिए की कैसे न्यायालय की शुचिता बनी रहे | -It is
submitted before the Hon’ble Sir that
श्री मान जी उपनिरीक्षक राजेश कुमार यादव कहते है पंडित जी अगर आपने एक भी ईट रखा तो हड्डी पसली तोड़ कर भूसा भर दूगा और कहते है शाम तक आदेश जाएगा आज नही तो कल शाम तक आजायेगा सोचिये जब अगली तिथि एक हप्ते बाद लगा है तो कैसे उपनिरीक्षक राजेश कुमार यादव बीच में ही प्रशासनिक अधिकारिओं के आदेश प्राप्त कर लेते है| क्या यह न्यायालय का मजाक नही है |श्री मान जी क्या हमारे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी न्यायालय ब्यवस्था को भी तार तार कर देंगे | श्री मान जी कैसी ब्यवस्था है की किसी भी शिकायत को कुछ भी लिख कर जो की शिकायत विन्दुओं से सम्बंधित नही होता और पूर्ण रूपेणअसंगत होता है शिकायत का निस्तारण करा लिया जाता है | यहां नतो किसी की जिम्मेदारी तय होती है और नही किसी दोषी के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही होती है इसलिए प्रार्थी जैसी निरीह जनता इस आराजकता की चक्की में पिस रही है | श्री मान बटवारे के २५ वर्ष बाद प्रार्थी को अपने ही जमीन में घर बनवाने से रोका जा रहा है | क्या यहां न्याय पुलिस ने अपने हाथ में ले रखा है | कृपया न्याय करे | अर्ध न्यायिक कार्यो में बाहरी हस्तक्षेपरोका जाय | प्रार्थी ओम प्रकाश दुबे पुत्र आदित्यनारायण दुबे ग्राम पोस्ट नीबी गहरवार पुलिश थाना विन्ध्याचल डिस्ट्रिक्ट मिर्ज़ापुर उत्तरप्रदेश मोबाइल नंबर ८७५६४४३३६२
नियत तिथि:
19 – Aug – 2017
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
दिनांक 21/08/2017को फीडबैक:- Here focus was whether
administrative order can be passed in sub judice matters as being done by
S.D.M. Sadar Mirzapur and why action is not being taken against him? Whether
construction would be curbed by passing administrative order in quasi judicial
matter? If S.D.M. is too much partial with the party, then he must pass a
reasoned order in the open court instead of passing administrative orders
which is tantamount to contempt of court. Here S.D.M. is committing contempt
of his own court. If the one of the parties can’t be allowed to use his share
of land merely on the ground that matter is sub judice, then how litigant can
cultivate the disputed land. Whether S.D.M. can order his subordinate
Tahsildar to enquire allegations made against him by your applicant? Whether
such enquiry is not against the principles of natural justice?
फीडबैक की स्थिति:
फीडबैक प्राप्त
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
नियत दिनांक
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
04 – Aug – 2017
जिलाधिकारीमिर्ज़ापुर,
19 – Aug – 2017
सहमत
निस्तारित
2
आख्या
जिलाधिकारी ( )
04 – Aug – 2017
उप जिलाधि‍कारी सदर,जनपदमिर्ज़ापुर,राजस्व एवं आपदा विभाग
नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें सहमत
19 – Aug – 2017
तहसीलदार सदर की आख्‍यानुसार प्रश्‍नगत प्रकरण में न्‍यायालय उप जिलाधिकारी सदर के यहां वाद सं0-डी-20141653001732
सन 2014 वाद विचाराधीन है। प्रार्थी द्वारा अपने ही जमीन पर मकान बनाये जाने से रोका जा रहा है। वाद न्‍यायालय में विचाराधीन होने के कारण कोई कार्यवाही किया जाना उचित नहीं है। वाद निस्‍तारण के बाद ही कोई कार्यवाही किया जाना सम्‍भव है।
निस्तारित
3
आख्या
उप
जिलाधि‍कारी (राजस्व एवं आपदा विभाग )
05 – Aug – 2017
तहसीलदार सदर,जनपदमिर्ज़ापुर,राजस्व एवं आपदा विभाग
आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें एवं आख्या प्रेषित करें तहसीलदार सदर की आख्‍यानुसार प्रश्‍नगत प्रकरण में न्‍यायालय उप जिलाधिकारी सदर के यहां वाद सं0-डी-20141653001732 सन 2014 वाद विचाराधीन है। प्रार्थी द्वारा अपने ही जमीन पर मकान बनाये जाने से रोका जा रहा है। वाद न्‍यायालय में विचाराधीन होने के कारण कोई कार्यवाही किया जाना उचित नहीं है। वाद निस्‍तारण के बाद ही कोई कार्यवाही किया जाना सम्‍भव है।
18 – Aug – 2017
प्रश्‍नगत प्रकरण में न्‍यायालय उप
जिलाधिकारी सदर के यहां वाद सं0-डी-20141653001732 सन 2014 वाद विचाराधीन है। प्रार्थी द्वारा अपने ही
जमीन पर
मकान बनाये जाने से
रोका जा
रहा है। वाद न्‍यायालय में विचाराधीन होने के
कारण कोई कार्यवाही किया जाना उचित नहीं है। वाद निस्‍तारण के बाद ही कोई कार्यवाही किया जाना सम्‍भव है।
निस्तारित

2 comments on Whether not contempt of court committed by S.D.M. itself by passing administrative orders in sub judice case

  1. Here focus was whether administrative order can be passed in sub judice matters as being done by S.D.M. Sadar Mirzapur and why action is not being taken against him? Whether construction would be curbed by passing administrative order in quasi judicial matter? If S.D.M. is too much partial with the party, then he must pass a reasoned order in the open court instead of passing administrative orders which is tantamount to contempt of court. Here S.D.M. is committing contempt of his own court. If the one of the parties can’t be allowed to use his share of land merely on the ground that matter is sub judice, then how litigant can cultivate the disputed land. Whether S.D.M. can order his subordinate Tahsildar to enquire allegations made against him by your applicant? Whether such enquiry is not against the principles of natural justice?

  2. नियत तिथि: 19 – Aug – 2017
    शिकायत की स्थिति: निस्तारित
    रिमाइंडर :
    फीडबैक : दिनांक 21/08/2017को फीडबैक:- Here focus was whether administrative order can be passed in sub judice matters as being done by S.D.M. Sadar Mirzapur and why action is not being taken against him? Whether construction would be curbed by passing administrative order in quasi judicial matter? If S.D.M. is too much partial with the party, then he must pass a reasoned order in the open court instead of passing administrative orders which is tantamount to contempt of court. Here S.D.M. is committing contempt of his own court. If the one of the parties can’t be allowed to use his share of land merely on the ground that matter is sub judice, then how litigant can cultivate the disputed land. Whether S.D.M. can order his subordinate Tahsildar to enquire allegations made against him by your applicant? Whether such enquiry is not against the principles of natural justice?
    फीडबैक की स्थिति: फीडबैक विचाराधीन

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