Whether law order can be restored without overhauling police in the state of Uttar Pradesh?

 

 

Grievance
Status for registration number : PMOPG/E/2019/0437037

 

Grievance Concerns To Name Of Complainant-Dinesh
Pratap Singh

 

Date of Receipt-02/08/2019 Received By Ministry/Department-Prime Ministers
Office

 

Grievance Description

 

श्री मान जी यदि पुलिस का रोल संदेहास्पद और पक्षपात पूर्ण हो तो क्या प्रार्थी को न्याय मिल सकता है पुलिस क्यों यह नहीं स्पस्ट करती है की प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह पुत्र अंगद प्रसाद सिंह को भू माफियाओं द्वारा पुलिस की मदद से क्यों हटाया गया अर्थात प्रार्थी को आतंकित करके उसे दश वर्ष से रह रहे मकान
को छोड़ कर कमरों में ताला लगा कर भागना पड़ा और बाद में कमरों का ताला तोड़ कर भू माफिआओं ने पुलिस की मदद से कब्ज़ा कर लिया अब पुलिस यह बताये की किसी न्यायालय ने आदेश दिया था प्रार्थी का मकान कब्ज़ा कराने का चुकी पुलिस ने खुद कब्ज़ा कराया है इसलिए कब्ज़ा कराये मकान को भूमाफियाओं का मकान कह रही है और नए पुलिस कर्मी चाहते है की पुलिस की साख गिरने पाए अन्यथा इस प्रकार के आय का स्रोत घट जायेगा राजधानी पुलिस के कारनामे आये दिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में छाये रहते है सोचिये कह रहे है पैसा देने का क्या प्रमाण है अरे क्या संलग्न करार पत्र का अवलोकन करने में राजधानी की पुलिस असमर्थ है महोदय राजधानी पुलिस से यह पूछा जाय की प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह किस आधार पर उस मकान में १९९८ से २०१० तक रहा और उसे कब्ज़ा किसने दिलाया था और मध्यांचल विद्युत् वितरण निगम ने बाकायदा १० वर्षो तक विद्ययुत बिल जारी किया और प्रार्थी द्वारा उसे भरा गया है और आज भी विद्युत् कनेक्शन प्रार्थी के नाम है राजधानी पुलिस अपने आख्या में भू माफियाओं के शब्द बोलती है श्री मन राजधानी पुलिस जिनको बैध मकान मालिक कह रही है उसका
आधार क्या है है कोई न्यायालय का आदेश और फिर ये १९९८ से २०१० तक कहा थे क्या यह भ्रस्टाचार नहीं है की प्रार्थी के घर को भू माफियाओं का घर बता रही है लखनऊ पुलिस यही न्याय है आराजकता में करार का कोई मतलब नहीं होता श्री मान जी संलग्नको का अवलोकन करे और नियमानुसार कार्यवाही करे जिससे जंगल राज पर नियंत्रण हो जो सीधे दिखाई पड़ रहा है उसे छिपा कर कहानी गढ़ने में राजधानी पुलिस दक्ष है जो इसके कार्यशैली से ही स्पष्ट है It is submitted before the Hon’ble Sir that undoubtedly matter is not only 15 years old but it is 20 years old as the agreement and power of attorney of the land and house was given to the applicant aggrieved Dinesh Pratap Singh in 1998 and power attorney was made available through the office of Registrar and Deputy registrar is itself approved. Moreover in the disputed Land and house applicant aggrieved Dinesh Pratap Singh was living since 1998 to 2010 thereafter because of conspiracy of the grabber with the police and planned quarrels pressurized the family of the applicant lock the rooms and left place for peace and took rooms on rent but without justice against the atrocity of the police. Now time has come to trace
the truth. Entire records are attached to grievance so please take the perusal.

 

Grievance Document

 

Current Status-Under process Date of Action-09/08/2019

 

Remarks-Send Through Web Service

 

Officer Concerns To Officer Name-Shri Arun
Kumar Dube Officer Designation-Joint
Secretary

 

Contact Address-Chief Minister Secretariat U.P.
Secretariat, Lucknow

 

Email Address Contact Number-05222215127

 

 


Grievance
Status for registration number : PMOPG/E/2019/0437037

 

Grievance Concerns To

 

Name Of Complainant –Dinesh Pratap Singh Date of Receipt –02/08/2019

 

Received By Ministry/Department –Prime
Ministers Office

 

Grievance Description

 

श्री मान जी यदि पुलिस का रोल संदेहास्पद और पक्षपात पूर्ण हो तो क्या प्रार्थी को न्याय मिल सकता है पुलिस क्यों यह नहीं स्पस्ट करती है की प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह पुत्र अंगद प्रसाद सिंह को भू माफियाओं द्वारा पुलिस की मदद से क्यों हटाया गया अर्थात प्रार्थी को आतंकित करके उसे दश वर्ष से रह रहे मकान को छोड़ कर कमरों में ताला लगा कर भागना पड़ा और बाद में कमरों का ताला तोड़ कर भू माफिआओं ने पुलिस की मदद से कब्ज़ा कर लिया अब पुलिस यह बताये की किसी न्यायालय ने आदेश दिया था प्रार्थी का मकान कब्ज़ा कराने का,  चु की पुलिस ने खुद कब्ज़ा कराया है इसलिए कब्ज़ा कराये मकान को भूमाफियाओं का मकान कह रही है और नए पुलिस कर्मी चाहते है की पुलिस की साख गिरने न पाए अन्यथा इस प्रकार के आय का
स्रोत घट जायेगा राजधानी पुलिस के कारनामे आये दिन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में छाये रहते है सोचिये कह रहे है पैसा देने का क्या प्रमाण है अरे क्या संलग्न करार पत्र का अवलोकन करने में राजधानी की पुलिस असमर्थ है महोदय राजधानी पुलिस से यह पूछा जाय की प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह किस आधार पर उस मकान में १९९८ से २०१० तक रहा और उसे कब्ज़ा किसने दिलाया था और मध्यांचल विद्युत् वितरण निगम ने बाकायदा १० वर्षो तक विद्ययुत बिल जारी किया और प्रार्थी द्वारा उसे भरा गया है और आज भी विद्युत् कनेक्शन प्रार्थी के नाम है राजधानी पुलिस अपने आख्या में भू माफियाओं के शब्द बोलती है श्री मन राजधानी पुलिस जिनको बैध मकान मालिक कह रही है उसका आधार क्या है है कोई न्यायालय का आदेश और फिर ये १९९८ से २०१० तक कहा थे क्या यह भ्रस्टाचार नहीं है की प्रार्थी के घर को भू माफियाओं का घर बता रही है लखनऊ पुलिस यही न्याय है आराजकता में करार का कोई मतलब नहीं होता श्री मान जी संलग्नको का अवलोकन करे और नियमानुसार कार्यवाही करे जिससे जंगल राज पर नियंत्रण हो जो सीधे दिखाई पड़ रहा है उसे छिपा कर कहानी गढ़ने में राजधानी पुलिस दक्ष है जो इसके कार्यशैली से ही स्पष्ट है
It is submitted before the Hon’ble Sir that undoubtedly matter is not only 15 years old but it is 20 years old as the agreement and power of attorney of the land and house was given to the applicant aggrieved Dinesh Pratap Singh in 1998 and power attorney was made available through the office of Registrar and Deputy registrar is itself approved. Moreover in the disputed Land and house applicant aggrieved Dinesh Pratap Singh was living since 1998 to 2010 thereafter because of conspiracy of the grabber with the police and planned quarrels pressurized the family of the applicant lock the rooms and left place for peace and took rooms on rent but without justice against the atrocity of the police. Now time has come to trace the truth. Entire records are attached to grievance so please take the perusal.

 

Grievance Document
Current Status –
Grievance Received

 

Date of Action –02/08/2019

 

Officer Concerns To  Forwarded to –Prime Ministers
Office

 

Officer Name –Shri Ambuj Sharma

 

Officer Designation –Under Secretary (Public)

 

Contact Address –Public Wing 5th Floor, Rail
Bhawan New Delhi

 

Email Address –ambuj.sharma38@nic.in

 

Contact Number –011-23386447

 

 

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
How the faith of common man will be ensured in the government machinery if such anarchy will prevail in the system?
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 2 August 2019 at 14:36
 

To: pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, supremecourt <supremecourt@nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, cmup <cmup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, csup@up.nic.in, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, lokayukta@hotmail.com

 

Most revered Sir –Your applicant invites the kind attention of Hon’ble Sir with due respect to the following submissions as follows.

 

1-It is submitted before the Hon’ble Sir that  51A. Fundamental duties It shall be the duty of every citizen of India (a) to abide by the Constitution and respect its ideals and institutions, the National Flag and the National Anthem;(h) to develop the scientific temper, humanism and the spirit of inquiry and reform;

 

(i) to safeguard public property and to abjure violence;
(j) to strive towards excellence in all spheres of individual and collective activity so that the nation constantly rises to higher levels of endeavour and achievement
.

 

2-It is submitted before the Hon’ble Sir that Hon’ble Sir may be pleased to take the perusal of the report of the Circle officer Cant as follows. 
3-It is submitted before the Hon’ble Sir that ipso facto obvious as earlier Lucknow police colluded with the land Mafia in grabbing the land and houses of the aggrieved applicant Dinesh Pratap Singh and now acting like a biased judge who is dictating his judgement in the matter. First important thing is that Lucknow police which is acting like tyrant and termed purchased house and land of the applicant as belongings of the land grabbers despite the all requisite documents required in support of the claim of the applicant were made available to the Lucknow police. 
4-It is submitted before the Hon’ble Sir that aforementioned report was submitted by the circle officer cant in order to redress to following complaint cum application against Lucknow police 
आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
40015719037726
आवेदक कर्ता का नाम:
Dinesh Pratap Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9838919619,9838919619
विषय:
प्रकरण शिकायत संख्या 40015719035344 आवेदक कर्ता का नाम: Dinesh Pratap Singh आवेदक कर्ता का मोबाइल न०: 9838919619, के गैर जिम्मेदारानापूर्ण निस्तारण से सम्बंधित है | माननीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय जिस प्रकार उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने आख्या प्रस्तुत की है उससे यह स्पष्ट है की उन्होंने ने प्रकरण को समझा ही नहीं | और प्रकरण की विषय वस्तु ही नहीं समझ में रही है वह उपनिरीक्षक जांच क्या करेगा | श्री मान जी जिस मकान और जमीन को ये महोदय मृतका की पत्नी का बता रहे है उसका विक्रय प्रार्थी को किया जा चूका है जिसके आधार पर प्रार्थी सन १९९८ से २००९ तक रहा है और इनके अत्याचारों से पीड़ित हो कर तथा पुलिस के पक्षपातपूर्ण रवैया के वजह से हमे ताला लगा कर हटना पड़ा | किन्तु इनके रिपोर्ट से स्पष्ट है हमारी गृहस्थी का सम्पूर्ण सामान आभूषण इत्यादि जो भी उस समय छोड़ा गया था वह सभी टाला तोड़ कर लूट लिया गया और जमीन मकान सभी पर कब्ज़ा कर लिया गया | प्रार्थी द्वारा समस्त कागजात प्रस्तुत किये गए है किन्तु उपनिरीक्षक महोदय को कुछ समझ में ही नहीं आता है | प्रकरण की जांच उस पुलिस अधिकारी से कराया जाय जिसकी आंग्ल भाषा पे अच्छी पकड़ हो |
नियत तिथि:
31 – Jul – 2019
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
01 – Jul – 2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट
31/07/2019
प्रस्तुत प्रकरण की जांच की गयी |जांच आख्या संलग्न है |
निस्तारित
 5-It is submitted before the Hon’ble Sir that undoubtedly matter is not only 15 years old but it is 20 years old as the agreement and power of attorney of the land and house was given to the applicant aggrieved Dinesh Pratap Singh in 1998 and power attorney was made available through the office of Registrar and Deputy registrar is itself approved. Moreover in the disputed Land and house applicant aggrieved Dinesh Pratap Singh was living since 1998 to 2010 thereafter because of conspiracy of the grabber with the police and planned quarrels pressurised the family of the applicant lock the rooms and left place for peace and took rooms on rent but without justice against the atrocity of the police. Now time has come to trace the truth. Entire records are attached to grievance so please take the perusal.

 

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
3 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Yogi
1 year ago

Hon’ble Sir, ipso facto obvious as earlier Lucknow police colluded with the land Mafia in grabbing the land and houses of the aggrieved applicant Dinesh Pratap Singh and now acting like a biased judge who is dictating his judgement in the matter. First important thing is that Lucknow police which is acting like tyrant and termed purchased house and land of the applicant as belongings of the land grabbers despite the all requisite documents required in support of the claim of the applicant were made available to the Lucknow police.

Preeti Singh
1 year ago

I think that it will always remain under process because because of rampant corruption in the government machinery.
Current Status Under process
Date of Action 09/08/2019
Remarks Send Through Web Service Officer Concerns To
Officer Name Shri Arun Kumar Dube Officer Designation Joint Secretary
Contact Address Chief Minister Secretariat U.P. Secretariat, Lucknow

Beerbhadra Singh
1 year ago

Whether it is not surprising that accountable public functionaries in this largest democracy in the world on the public platforms claim to provide corruption free government but it is too much surprise that no public office in this largest democracy in the world is free from corruption whether it is not mockery of the law of land and our public functionaries are making us stupid ful frequent misleading activities and we are still supporting them which shows that we are not understanding their cunning tricks because of our illiteracy and poor mindset. Now time has come when public may stand before the government and seek appropriate action against the corrupt politicians Bureaucracy and judicial members who are looting us in various ways.