Whether it is not reflection of the rampant corruption in the MGKVP University Varanasi?

आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
60000180104728
आवेदक कर्ता का नाम:
Yogi M. P. Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
7379105911,
विषय:
If the student gets admission in undergraduate classes on the ground of the subjects taken at the Intermediate level, then how the students belonging to science stream at the intermediate level are studying in arts faculty at the graduate level as their choices are entirely different from the choices at the intermediate level. There would be millions of such students in the university MGKVP Varanasi itself. To whom assistant registrar is making stupid through his nonsense oxymoron note making entire report absurd and contradictory. At this juncture, when more than half-century communications has been exchanged with the accountable public functionaries, the assistant registrar is throwing out its own mud on the affiliated college on the flimsy ground by taking help of a false concocted fictitious story. Sir the fee taken from the student must be refunded to the student as claimed the aggrieved student. For detail take a glance at the attached PDF documents with this representation.
नियत तिथि:
11 – Nov – 2018
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
दिनांक 26/10/2018को फीडबैक:- श्री मान जी यदि कोई ऐसा लोकसेवक जो मेरे प्रत्यावेदनो पर कार्यवाही करने में सक्षम हो सिर्फ १५ मिनट मेरी बात सुने और इमानदारी से उस पर कार्यवाही करे प्रार्थी शुल्क वापसी के लिए कभी भी नही कहेगा अन्यथा इस आराजकता से मृत्यु पर्यन्त संघर्ष जारी रहेगा |गोरे तो चले गये काले अभी भी बाकी है | श्री मान जी प्रार्थी को जिन विषयो में एडमिट कार्ड जारी किया गया उनमे एग्जाम की व्यवस्था क्यों नही की गई जब की प्रार्थी के द्वारा ५० से भी ज्यादा आवेदन प्रार्थना पत्र भेजे गये | श्री मान जी प्रार्थी को धोखा दिया गया और उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया क्यों की प्रार्थी दलित वर्ग का है |बहुत आश्चर्य है की वर्ष भर तक प्रार्थी के किसी भी शिकायत का जवाब तक नही दिया गया यह है भ्रस्टाचार का आलम | श्री मान जी प्रार्थी कर्ज ले कर फीस जमा किया था किन्तु प्रार्थी अब वह फीस वापस चाहता है | यदि लेशमात्र भी इमानदारी है तो प्रार्थी का कम से कम शुल्क तो वापस कर दी जिए | It is submitted before the Hon’ble Sir that विश्वविद्यालय की आख्या प्रति परीक्षार्थी श्रेढ़ी सुधार परीक्षा आवेदन शुल्क रूपया ५०० विश्वविद्यालय में महाविद्यालय से जमा कराया जाता है और विश्वविद्यालय द्वारा अग्रसारण शुल्क अधिकतम २०० रुपये प्रति परीक्षार्थी निर्धारित है महाविद्यालय द्वारा परीक्षार्थियों से अग्रसारण शुल्क लिया जाता है | श्री मान जी एक तरफ विश्वविद्यालय जहा विश्वविद्यालय परिसर के छात्रों से प्रति परीक्षार्थी श्रेढ़ी सुधार परीक्षा आवेदन शुल्क रूपया ५०० ले रहा है वही सम्बद्ध महाविद्यालयों के छात्रों से प्रति परीक्षार्थी श्रेढ़ी सुधार परीक्षा आवेदन शुल्क रूपया ७०० वसूला गया और अपरोक्ष रूप में करोडो रुपये की अवैध वसूली की गयी जो की छात्रों के संबैधानिक अधिकारों का हनन है | श्री मान जी विश्वविद्यालय परिसर और सम्बद्ध महाविद्यालय के छात्रों में भेद भाव कैसा | अगर विश्वविद्यालय चाहता तो ऑनलाइन पेमेंट ले सकता था और उसका किसी छात्र के गार्जियन पर अधिकतम बोझ रूपया १५ होता किन्तु ऐसा नहीं किया जा रहा है भारी भरकम बिरोध के बावजूद सभी अपने हित साधने में जुटे है | 2-It is submitted before the Hon’ble Sir that Central Government Act Article 14 in The Constitution Of India 194914. Equality before law The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India Prohibition of discrimination on grounds of religion, race, caste, sex or place of birth. Whether a student can be arbitrarily charged Rs.200.00 merely in the name of the student of affiliated college as not having privileges of being the student of the campus of Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith University Varanasi? Whether such discrimination may be allowed in this largest democracy in the world? 3-It is submitted before the Hon’ble Sir that A V Dicey stated three principles to the term ‘Rule of Law’. 1. Supremacy of Law 2. Equality before Law 3. The predominance of Legal spirit. Where is equality before the law if the students of affiliated colleges will be targeted by erring staffs of Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith Varanasi? Under which law of the land, accountable public staffs of Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith Varanasi delegated the arbitrary powers to principals of affiliated colleges to extort Rs. 200 per student?
फीडबैक की स्थिति:
फीडबैक प्राप्त
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
लोक शिकायत अनुभाग – 2( मुख्यमंत्री कार्यालय )
12 – Oct – 2018
जिलाधिकारीवाराणसी,
कृ0 न‍ियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने एवं कृत कार्यवाही से प्रार्थी को समुचित उतर दे द‍िया जाये। 
24/10/2018
निस्तारित
2
आख्या
जिलाधिकारी ( )
12 – Oct – 2018
रजिस्ट्रार महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी
आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें एवं आख्या प्रेषित करें
23/10/2018
Related College and Student are Responsible for this case university already said
निस्तारित

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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

श्री मान जी यदि कोई ऐसा लोकसेवक जो मेरे प्रत्यावेदनो पर कार्यवाही करने में सक्षम हो सिर्फ १५ मिनट मेरी बात सुने और इमानदारी से उस पर कार्यवाही करे प्रार्थी शुल्क वापसी के लिए कभी भी नही कहेगा अन्यथा इस आराजकता से मृत्यु पर्यन्त संघर्ष जारी रहेगा |गोरे तो चले गये काले अभी भी बाकी है | श्री मान जी प्रार्थी को जिन विषयो में एडमिट कार्ड जारी किया गया उनमे एग्जाम की व्यवस्था क्यों नही की गई जब की प्रार्थी के द्वारा ५० से भी ज्यादा आवेदन प्रार्थना पत्र भेजे गये | श्री मान जी प्रार्थी को धोखा दिया गया और उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया क्यों की प्रार्थी दलित वर्ग का है |बहुत आश्चर्य है की वर्ष भर तक प्रार्थी के किसी भी शिकायत का जवाब तक नही दिया गया यह है भ्रस्टाचार का आलम | श्री मान जी प्रार्थी कर्ज ले कर फीस जमा किया था किन्तु प्रार्थी अब वह फीस वापस चाहता है | यदि लेशमात्र भी इमानदारी है तो प्रार्थी का कम से कम शुल्क तो वापस कर दी जिए

Mahesh Pratap Singh Yogi M. P. Singh

our motive is to establish the rule of law but in this precious campaign corruption is playing just contrary role

Preeti Singh
2 years ago

'Rule of Law'. 1. Supremacy of Law 2. Equality before Law 3. Predominance of Legal spirit . Where is equality beforethe law if the students of affiliated colleges will be targeted by erring staffs of Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith Varanasi? Under which law of the land, accountable public staffs of Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith Varanasi delegated the arbitrary powers to principals of affiliated colleges to extort Rs. 200 per student?
फीडबैक की स्थिति: फीडबैक विचाराधीन