Whether it is justified to withhold the salary of poor labourers of municipality Mirzapur since seven months.

आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
40019918007746
आवेदक कर्ता का नाम:
Yogi M P Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
7379105911,7379105911
विषय:
Sir please direct
concerned accountable public functionaries not to leave poor families on the
verge of hunger arbitrarilyAn application under the article 51 A of the
constitution of India in order to curb the violations of fundamental rights
of members of weaker and oppressed class of society Subject-Staffs dedicated
entire life to service of Municipality Mirzapur city are not provided salary
since five months Whether Human Rights are safe of these people belonging to
weaker and downtrodden section With due respect, your applicant invites the
kind attention of the Honble Sir to the following submissions as follows 1-It
is submitted before the Honble Sir that matter is concerned with the so
called outsourced staffs of Municipality Mirzapur city belonging to weaker
section mostly employed as the staffs of Municipality Mirzapur city but
instead of making them permanent, our Government of Uttar Pradesh made them
outsourced staffs and providing them meagre amount of salary which is less
than minimum prescribed salary by state government itself 2-It is submitted
before the Honble Sir that how can it be justified that Municipality Mirzapur
city may take services of people belonging to weaker and downtrodden section
but may not provide them salary which is their legitimate right There are
several staffs who borrowed the money from local money lenders and these
money lenders are making undue pressure on these poor public servants who
somehow arrange two square meal but at present their families on the verge of
hunger Whether the treatment of public body Municipality Mirzapur city is not
like cruel private contractors who always think about its selfish motives by
exploiting their workers
नियत तिथि:
21 – Apr – 2018
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
दिनांक 22/04/2018को फीडबैक:- क्या मिर्ज़ापुर नगरपालिका गरीब मजदूरों के मानवाधिकारों का हनन नही कर रही है जहा इन गरीबो से रविवार के दिन भी काम लेते है वही इनका वेतन रोकना क्या आप का ब्योहार उस निजी निर्दयी ठेकेदार जैसा नही है जो अपने मजदूरों से काम तो लेता है लेकिन पारिश्रमिक के नाम पर भर पेट भोजन भी नही देता |हैंडपंप बनाना मेहनत का काम है और तभी संभव है जब पेट में भोजन होगा |श्री मान जी आप की आख्या उन गरीबो के बारे में यही है |क्या श्री मान जी प्रार्थी द्वारा स्थाई कर्मचारिओं के तनख्वाह की बात की गई थी|आप की आख्या यही है | 21/04/2018 उक्त के सम्बन्ध में सादर अवगत कराना है कि स्थायी आउट सौर्सिंग कर्मी का भुगतान लगातार धन की उपलब्धता के अनुसार किया जा रहा है. श्री मान जी आपने एक लाख तनख्वाह पर महीने पाने वाले के साथ सात हजार वाले को जोड़ दिया यह तो अविवेक पूर्ण निर्णय हुआ |श्री मान जी प्रार्थी द्वारा उन गरीबो की बात की जा रही है जो रोज कमाते रोज खाते है जो सात महीने तनख्वाह मिलने पर स्थानीय साहुकारो से कर्ज ले लिए है और रोज धमकिया झेल रहे है | श्री मान जी इन गरीबो ने मिर्ज़ापुर नगर पालिका की सेवा में लगभग पूर्ण जीवन बिता दिया किन्तु मिर्ज़ापुर नगर पालिका ने सिर्फ इन्हें भुखमरी के सिवा कुछ दिया कुछ इनाम दिया भी तो आउट सौर्सिंग कर्मी बना दिया | सात महीने की तनख्वाह रोक रखे है कह रहे है लगातार धन की उपलब्धता के आधार पर किया जा रहा है कितना भद्दा मजाक है गरीबी का | श्री मान जी इन गरीबो का वेतन सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन मान से भी कम है जो की असम्बैधानिक है किन्तु इस अराजकता में जो कुछ ही मिल जाय परिवार के पोषण हेतु वही बहुत है |
फीडबैक की स्थिति:
फीडबैक प्राप्त
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
06 – Apr – 2018
जिलाधिकारीमिर्ज़ापुर,
21/04/2018
आख्‍या अपलोड है
निस्तारित
2
आख्या
जिलाधिकारी ( )
07 – Apr – 2018
अधिशासी अधि‍कारी,नगर पंचायत /पालिका जनपदमिर्ज़ापुर,मिर्ज़ापुर
नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करेंआख्‍या अपलोड है
21/04/2018
उक्त के सम्बन्ध में सादर अवगत कराना है कि
स्थायी आउट सौर्सिंग कर्मी का भुगतान लगातार धन
की उपलब्धता के अनुसार किया जा
रहा है.
निस्तारित

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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

क्या मिर्ज़ापुर नगरपालिका गरीब मजदूरों के मानवाधिकारों का हनन नही कर रही है जहा इन गरीबो से रविवार के दिन भी काम लेते है वही इनका वेतन रोकना क्या आप का ब्योहार उस निजी निर्दयी ठेकेदार जैसा नही है जो अपने मजदूरों से काम तो लेता है लेकिन पारिश्रमिक के नाम पर भर पेट भोजन भी नही देता |हैंडपंप बनाना मेहनत का काम है और तभी संभव है जब पेट में भोजन होगा |श्री मान जी आप की आख्या उन गरीबो के बारे में यही है |क्या श्री मान जी प्रार्थी द्वारा स्थाई कर्मचारिओं के तनख्वाह की बात की गई थी|

Arun Pratap Singh
2 years ago

श्री मान जी आपने एक लाख तनख्वाह पर महीने पाने वाले के साथ सात हजार वाले को जोड़ दिया यह तो अविवेक पूर्ण निर्णय हुआ |श्री मान जी प्रार्थी द्वारा उन गरीबो की बात की जा रही है जो रोज कमाते रोज खाते है जो सात महीने तनख्वाह न मिलने पर स्थानीय साहुकारो से कर्ज ले लिए है और रोज धमकिया झेल रहे है | श्री मान जी इन गरीबो ने मिर्ज़ापुर नगर पालिका की सेवा में लगभग पूर्ण जीवन बिता दिया किन्तु मिर्ज़ापुर नगर पालिका ने सिर्फ इन्हें भुखमरी के सिवा कुछ दिया कुछ इनाम दिया भी तो आउट सौर्सिंग कर्मी बना दिया | सात महीने की तनख्वाह रोक रखे है कह रहे है लगातार धन की उपलब्धता के आधार पर किया जा रहा है कितना भद्दा मजाक है गरीबी का | श्री मान जी इन गरीबो का वेतन सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन मान से भी कम है जो की असम्बैधानिक है किन्तु इस अराजकता में जो कुछ ही मिल जाय परिवार के पोषण हेतु वही बहुत है |
फीडबैक की स्थिति: फीडबैक विचाराधीन

Mahesh Pratap Singh Yogi M. P. Singh

They are reaping the benefits of vulnerability of such gullible people. Most surprising is that these pseudo human rights champions are only cheating these innocent gullible people.

Beerbhadra Singh
Beerbhadra Singh
5 months ago

It is quite obvious that matter is too much old but not appropriate action was taken by the government of Uttar Pradesh in the matter and aggrieved staff of the Department of municipality Mirzapur city who were posted on daily wages was not given any reprieve by the government as well as by any constitutional functionaries in this largest democracy in the world. Here government is working like cruel contractor who exploits its own vulnerable worker staffs.