Whether arbitrary refutation of serious allegations and shielding by senior rank officer is +ve signal

आवेदन
का विवरण
शिकायत
संख्या
15199170016004
आवेदक कर्ता का नाम:
जयप्रकाश
दुबे
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9559426255,0
विषय:
शपथ
पत्र प्रस्तुत करने के संबंध में।
नियत तिथि:
01
– May – 2017
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ
का प्रकार
आदेश
देने वाले अधिकारी
आदेश
दिनांक
अधिकारी
को प्रेषित
आदेश
आख्या
दिनांक
आख्या
नियत
दिनांक
स्थिति
आख्या
रिपोर्ट
1
अंतरित
अजय
कुमार सिंह(विशेष सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय )
30
– Mar – 2017
प्रमुख सचिव/सचिव गृह एवं गोपन
पृष्ठांकित
18
– May – 2017
निस्तारित
निस्तारित
2
आख्या
प्रमुख सचिव/सचिव (गृह एवं गोपन )
03
– Apr – 2017
वरिष्ठ /पुलिस अधीक्षकमिर्ज़ापुर,पुलिस
कृपया तत्काल नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करें। निस्तारित
17
– May – 2017
अनुमोदित
निस्तारित
3
आख्या
वरिष्ठ /पुलिस अधीक्षक (पुलिस )
06
– Apr – 2017
क्षेत्राधिकारी , नगर सदर,जनपदमिर्ज़ापुर,पुलिस
आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें एवं आख्या प्रेषित करें अनुमोदित
17
– May – 2017
जांच
आख्या संलग्न है
निस्तारित
Gmail
Mahesh Pratap
Singh Yogi M P Singh 
<yogimpsingh@gmail.com>

If what is going on is justice ? then what is
injustice? Applicant is being deprived from making shelter in its own land.

1 message

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
29 April 2017 at 17:11
To: pmosb <pmosb@pmo.nic.in>,
presidentofindia@rb.nic.in, urgent-action 
<urgent-action@ohchr.org>,
supremecourt <supremecourt@nic.in>, cmup <cmup@up.nic.in>,
 uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, “csup@up.nic.in”
<csup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in
Judicial independence is the concept that
the 
judiciary needs 
to be kept away from the other branches
of government. That is, 
courts should not be subject to improper influence
from the other 
branches of government,
or from private or partisan 
interests. Judicial Independence is vital and
important to the 
With great
respect to revered Sir, your applicant invites the
 kind attention of the
Hon’ble Sir to the following submissions
 as follows.
1-It is
submitted before the Hon’ble Sir that
 Complaint
No: 40019917000500 दिनांक-२२-०३-२०१७ APPLICANT 
 DETAILS : Name : Jayprakash Dubey    Father Name :
 Aditya
Narayan Dubey 
under point 7 your
applicant affirmed
 as – श्री मान जी को ज्ञात हो की
श्री मान जी प्रार्थी को आप की पुलिश
 चार बार उठाई और हर बार एक एक हजार ले कर
छोड़ी जब की एक 
बार भी प्रार्थी को न तो स्टे का कागजात दिखाया गया और नही कोई 
 नोटीस तामील कराई गई यदि कोई अन्यथा आदेश हो तो प्रार्थी पूरी 
निष्ठा से उसका
पालन करेगा लेकिन अभी सिर्फ दबंगई देखने को मिल 
रही है |
श्री मान जी नोटिस का मतलब सूचना और आदेश यदि आदेश पास
हुआ 
है तो उसका कंप्लायंस होना चाहिए नोटिस जारी होना और केस लिस्ट 
होना का
थाना अध्यक्ष द्वारा कदापि यह मतलब नही निकाला जाना 
चाहिए कि निर्माण कार्य
स्थगन का आदेश हुआ है
| प्रस्तुत प्रस्नोत्तरी से 
स्पस्ट है की
१३/०४/२०१७ तक कोई निर्माण कार्य स्थगन आदेश पास 
नही हुआ था और अब अगली तारीख
०१/०५/२०१४ को है
| अर्थात 
थानाध्यक्ष और उनके हमराहिओं
की अब तक की कार्यवाही पुलिसिया 
आतंक का मात्र पर्याय बना तथा न्याय ब्यवस्था
की धज्जिया उड़ाकर 
रख दिया गया |
यदि उपजिलाधिकारी महोदय द्वारा कोई आदेश पास किया गया
है तो 
उसे वेबसाइट पर अपलोड क्यों नही कर देते |
 2-It is submitted before the Hon’ble Sir that भारत सरकार 
द्वारा जन सूचना अधिकार २००५ लाया गया
जिससे की लोक कार्यालयों 
में पारदर्शिता बढ़े और लोक पदाधिकारिओं के कार्यों
में जिम्मेदारी तय 
हो सके किन्तु ऐसा प्रतीत होता है की आज भी हम उसी आंग्ल
ब्यवस्था
 में जी रहे है जो गुलामी के पूर्व की थी |
3-It is submitted before the Hon’ble Sir that उपजिलाधिकारी 
न्यायलय एक quasi जुडिशल
कोर्ट है और न्यायलय का कार्य और 
उसका संपादन independence of judiciary के प्रावधानों से संरक्षित है उपजिलाधिकारी महोदय सबजुडिस matter में कैसे administrative 
आदेश
पास कर सकते है
| क्या बिधि द्वारा स्थापित मानको का
पालन किया गया
|
-It is submitted before the Hon’ble Sir that जैसा की  थाना प्रभारी विन्ध्याचल के रिपोर्ट से स्पस्ट है की उपजिलाधिकारी 
महोदय के कोर्ट में अगली सुनवाई ०१-०५-२०१७ को है और बीच
में कोई
 सुनवाई नही हुई फिर उनके पास ऐसा कौन सा आदेश है जिसके आधार
 पर
प्रार्थी का घर पुनः रोका गया लेकिन इस बार उठाया नही गया इस 

लिए प्रार्थी का
 रूपया १००० .०० बच गया लेकीन मटेरियल सब ख़राब 
हो गये श्री मान जी प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत संलग्नको का अवलोकन करे 
और
वस्तुस्थित
  से अवगत हो | श्री
मान जी बटवारा हुए २५ वर्षो से 
ज्यादा हो गये सभी लोगो ने अपने हिस्से की आधे
से ज्यादा जमीने बेच
 डाली फिर भी फाट बंदी नही हुई थी तो बेचे कैसे और
प्रार्थी की स्थित
 है की अपने ही जमीन में घर बनाने के लिए पुलिस ने चार बार 
 उठाया | भविष्य के लिए क्या नजीर हम पेश कर रहे है |
पहले सरपत
 था तो यह जमीन मिली और अब सरकार ने रोड बना दी तो २५
वर्ष 
बाद पट्टीदार उसे भी ले लेना चाहते है |क्या यही
इमानदारी है
भ्रष्टाचार के केश में समय निश्चित है की
इतना समय बीतने के बाद 
भ्रस्ताचार का मुक़दमा नही शुरू हो सकता क्योकि
भ्रष्टाचार में फसने 
वाला प्रभावी होता है लेकीन साधारण आदमी को कोई न्याय नही
|
5 –श्री मान
जी को ज्ञात हो की प्रार्थी के पिता के कुछ बोलने पर कहने
 लगे बूढ़े चुप हो जा
नही तो जिन्दगी भर जेल की चक्की का आटा 
खाओगे उसके बाद पांच मिनट तक भद्दी
भद्दी गालिया बके फिर 
बिपक्षी को अपनी मोटर सायकिल पर बैठा कर घर छोड़े क्या श्री मान 
जी यह पुलिश
का अत्याचार नही है
 |
६–श्री मान जी को ज्ञात हो की श्री मान जी दैनिक जागरण
के 
२८-सितम्बर -२०१६ का अंक देखे जो वाराणसी से प्रकाशित है प्रार्थी का 
मकान
पानी से गिर गया है पेपर कटिंग संलग्न है क्रपया अवलोकन करे
 यदि कोई अन्यथा
घटना होगी तो उसके लिए पुलिश जिम्मेदार होगी
 |
७- श्री मान जी को ज्ञात हो की श्री मान जी प्रार्थी को
आप की पुलिश 
चार बार उठाई और हर बार एक एक हजार ले कर छोड़ी जब की एक 
बार भी
प्रार्थी को न तो स्टे का कागजात दिखाया गया और नही कोई 
नोटीस तामील कराई गई
यदि कोई अन्यथा आदेश हो तो प्रार्थी पूरी 
निष्ठा से उसका पालन करेगा लेकिन अभी
सिर्फ दबंगई देखने को मिल
 रही है |
                                                      
 
प्रार्थी
तारीख -२९/०४/२०१७                    जयप्रकाश
दुबे पुत्र आदित्य नारायण 
दुबे चल भाष -९५५९४२६२५५ ग्राम व पोस्ट नीबी गहरवार पुलिश थाना 
विन्ध्याचल डिस्ट्रिक्ट मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश 


2 attachments
Report of S.O. Vindhyachal and its authenticity.pdf
460K
Documents of Jayprakash Dubey.pdf
253K

2 comments on Whether arbitrary refutation of serious allegations and shielding by senior rank officer is +ve signal

  1. श्री मान जी नोटिस का मतलब सूचना और आदेश यदि आदेश पास हुआ
    है तो उसका कंप्लायंस होना चाहिए नोटिस जारी होना और केस लिस्ट
    होना का थाना अध्यक्ष द्वारा कदापि यह मतलब नही निकाला जाना
    चाहिए कि निर्माण कार्य स्थगन का आदेश हुआ है | प्रस्तुत प्रस्नोत्तरी से
    स्पस्ट है की १३/०४/२०१७ तक कोई निर्माण कार्य स्थगन आदेश पास
    नही हुआ था और अब अगली तारीख ०१/०५/२०१४ को है | अर्थात
    थानाध्यक्ष और उनके हमराहिओं की अब तक की कार्यवाही पुलिसिया
    आतंक का मात्र पर्याय बना तथा न्याय ब्यवस्था की धज्जिया उड़ाकर
    रख दिया गया |
    यदि उपजिलाधिकारी महोदय द्वारा कोई आदेश पास किया गया है तो
    उसे वेबसाइट पर अपलोड क्यों नही कर देते |

  2. श्री मान जी नोटिस का मतलब सूचना और आदेश यदि आदेश पास हुआ
    है तो उसका कंप्लायंस होना चाहिए नोटिस जारी होना और केस लिस्ट
    होना का थाना अध्यक्ष द्वारा कदापि यह मतलब नही निकाला जाना
    चाहिए कि निर्माण कार्य स्थगन का आदेश हुआ है | प्रस्तुत प्रस्नोत्तरी से
    स्पस्ट है की १३/०४/२०१७ तक कोई निर्माण कार्य स्थगन आदेश पास
    नही हुआ था और अब अगली तारीख ०१/०५/२०१४ को है | अर्थात
    थानाध्यक्ष और उनके हमराहिओं की अब तक की कार्यवाही पुलिसिया
    आतंक का मात्र पर्याय बना तथा न्याय ब्यवस्था की धज्जिया उड़ाकर
    रख दिया गया |
    यदि उपजिलाधिकारी महोदय द्वारा कोई आदेश पास किया गया है तो
    उसे वेबसाइट पर अपलोड क्यों नही कर देते |

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