Where is the rule of law? if order passed by the constitutional functionaries is not being complied.

Grievance
Status for registration number : PMOPG/E/2019/0099686
Grievance Concerns To, Name Of Complainant-Yogi
M P Singh
Date of Receipt-17/02/2019
Received By Ministry/Department-Prime Ministers
Office
Grievance Description
शिकायत संख्या-60000180125686, आवेदक कर्ता का नाम: Yogi M. P. Singh Under
Article 51 A of the constitution of India and under subsection 1 d of section 4
of Right to Information Act 2005, applicant has constitutional right to know
the reason of non compliance of the order of the commission.
श्री मान जी सूचना आयुक्त मुख्य सचिव रैंक की तनख्वाह पाते है और एक
संबैधानिक पोस्ट है चारो अधिकारियों के विरुद्ध वसूली का आदेश उनके द्वारा पारित
हुआ क्या डिवीज़नल कमिश्नर को यह अधिकार है की वह जिलाधिकारी के लीपापोती में सहयोग
करे श्री मान जी उत्तर प्रदेश सरकार किसी भी अधिकारी से जो उच्चाधिकारियों या
नेताओ का करीबी है उससे वसूली नही करती है और हर कोई घुस व अन्य तरीके से वहा तक
पहुच ही जाता है इसलिए जनसूचना अधिकार २००५ प्रभावहीन हो गया है सोचिये प्रधान
मंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के उपरांत भी वसूली न करने का खेल जारी है फीडबैक की
स्थिति
: मंडलायुक्त द्वारा दिनाक 02/01/2019 को फीडबैक पर कार्यवाही अनुमोदित कर
दी गयी है फीडबैक
:दिनांक 25/12/2018को फीडबैक:- श्री मान जी अब आप ही बताये रिकवरी आदेश ०३ मार्च२०१७ को पास हुआ और
आज तक वसूली संभव नही हो सकी अर्थात लगभग दो वर्ष बीतने को है क्या यह कार्यशैली
टाल मटोल नही दर्शाता है श्री मान जो कार्यशैली मुख्य राजस्व अधिकारी मिर्ज़ापुर
द्वारा अपनाया गया है वह सिर्फ दो वर्ष से हो रहे टाल मटोल की दिशा में ही एक कदम
है श्री मान जी क्या मुख्य राजस्व अधिकारी मिर्ज़ापुर को इतना भी कानून का ज्ञान
नही है की प्रार्थी द्वारा ही योजित शिकायत पर सम्बंधित अधिकारिओं को २५००० रुपये
अर्थ दंड से दण्डित किया गया है और हमे तब तक न्याय नही प्राप्त है जब तक मुझे यह
न सूचित किया जाय की आदेश पत्र अमुक द्वारा माननीय आयुक्त द्वारा जारी आदेश का
समादर हो गया है और महत्वपूर्ण बात यह है की उपरोक्त अधिकारी ने कुछ किया ही नही
है सिर्फ प्रार्थी की गुमराह किया जा रहा है जैसा की हमेशा से होता आया है श्री
मान जी क्या जनसूचना अधिकार के प्रावधानों का उल्लंघन में इन वर्षो में पर्याप्त
बडोत्तरी नही हुई है क्यों की लोगो को विश्वास है की उनके ऊपर यदि दंड आरोपित भी
होता है तो वसूली नही होगी
Mr. A.D.M. you and government
machinery at all are doing recovery since two years but still could not succeed
and now your reply is cryptic at this stage which can not be accepted by an
honest public functionary but it is our misfortune that we are living in the
era of corruption where those speaking on public platform to curb corruption
are taking bribe behind the screen. After all you can not shield them from
pecuniary penalty imposed on then as matter is in my cognizance. It would be
better if you submit the report of compliance of recovery order but you
yourself not interested in recovery that is why such cryptic fruitless reports
are being submitted. It has been proved that wrongdoers are being protected by
the grace of political bosses and the conspiracy is being hatched to dilute and
weaken the provisions of transparency act. Following reply is made in that
order. Undoubtedly not frightened with the people but think about god who is
omnipresent.
Grievance Document
Current Status
Grievance
Received
Date of Action-17/02/2019
Officer Concerns To, Forwarded to-Prime
Ministers Office
Officer Name-Shri Ambuj Sharma, Officer Designation-Under Secretary (Public)
Contact Address-Public Wing 5th Floor, Rail
Bhawan New Delhi
Email Address-ambuj.sharma38@nic.in, Contact Number-011-23386447

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
3 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

श्री मान जी सूचना आयुक्त मुख्य सचिव रैंक की तनख्वाह पाते है और एक संबैधानिक पोस्ट है चारो अधिकारियों के विरुद्ध वसूली का आदेश उनके द्वारा पारित हुआ क्या डिवीज़नल कमिश्नर को यह अधिकार है की वह जिलाधिकारी के लीपापोती में सहयोग करे श्री मान जी उत्तर प्रदेश सरकार किसी भी अधिकारी से जो उच्चाधिकारियों या नेताओ का करीबी है उससे वसूली नही करती है और हर कोई घुस व अन्य तरीके से वहा तक पहुच ही जाता है इसलिए जनसूचना अधिकार २००५ प्रभावहीन हो गया है

Arun Pratap Singh
1 year ago

It seems that there is only forest rule in the regime of Yogi Aditya Nath and most unfortunately he does not want to curb it quite obvious from his working style. On one side of screen he says he controlled the crime but on other side of screen don't take action on the applications concerned with the serious allegations of corruption.

Mahesh Pratap Singh Yogi M. P. Singh

It can never be justified that if the Information Commissioner had imposed the penalty on the four Public Information officers then government of Uttar Pradesh may adopt lackadaisical approach regarding the recovery penalties. Think about the gravity of such unlawful act being carried out by the responsible public functionaries of the Government of Uttar Pradesh by the non compliance the order passed by a constitutional functionary of the Government of India. This simply implies that government of Uttar Pradesh made the post of constitutional functionary impotent by making the order of the constitutional functionary null which is the mockery of the provisions of constitution of India.