What is the credibility of police reports in Uttar Pradesh which are self contradictory?

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जनसुनवाई
 
समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली, उत्तर प्रदेश
 
सन्दर्भ संख्या:-40015719065537

आवेदनकर्ता का विवरण :

नाम
Dinesh
Pratap Singh
पिता/पति का नामAngad Prasad Singh 
लिंगपुरुष
मोबाइल नंबर-1 : 9838919619
मोबाइल नंबर-2 : 9838919619
ईमेलarunpratapsingh904@gmail.com
Address : Mohalla
Surekapuram Lakshmi Narayan Baikunth Mahadev Mandir Mirzapur 231001
 
 

शिकायत/सुझाव क्षेत्र की जानकारी :

Area : नगरीय
शिकायत/सुझाव क्षेत्र का पता —-

आवेदन का विवरण :

आवेदन पत्र का विवरणश्री मान जी समस्त दस्तावेज पंजीकृत डाक से प्रार्थी द्वारा दिनांक ०७ सितम्बर
२०१९ को क्षेत्राधिकारी कैंट की सेवा में प्रेषित
है और इंडिया पोस्ट की वेबसाइट यह बता रही है की वे सभी दस्तावेज दिनांक ०९ सितम्बर
२०१९ को दिलकुशा
उपडाक घर द्वारा क्षेत्राधिकारी कैंट कार्यालय द्वारा प्राप्त किया गया किन्तु अभाग्य यह है की क्षेत्राधिकारी कैंट इस बात में ज्यादा आनंद है की आवेदक द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया इस बात का जिक्र उन्होंने अपने रिपोर्ट
दिनांक २५ सितम्बर
२०१९ में भी किया है जिसका मतलब होता है की प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज जो की दिनांक ०९ सितम्बर २०१९ को दिलकुशा उपडाक घर द्वारा क्षेत्राधिकारी कैंट कार्यालय द्वारा प्राप्त
किया गया उपनिरीक्षक मनोज कुमार को भेजने के बजाय कार्यालय में ही अभी तक धूल खा रहा है | श्री मान जी पुलिस तथ्यों के आधार पर विवेचना
करती है किन्तु यहा तो क्षेत्राधिकारी महोदय की रिपोर्ट मनमाना है जिसकी वजह से प्रार्थी को बार बार आवेदन करना पड़ रहा है | शिकायत संख्या 40015719059615 आवेदक कर्ता का नाम
Dinesh Pratap Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०9838919619
उपरोक्त प्रकरण में क्षेत्राधिकारी कैंट कहते है की बाबू सिंह की मौत १२०४२०१९ को हुई किन्तु उपनिरीक्षक मनोज कुमार और पूर्व क्षेत्राधिकारी कैंट के अनुसार मौत मई माह में हुई है शिकायत संख्या40015719058762
आवेदक कर्ता का नाम Dinesh Pratap Singh श्री मान जी उपरोक्त
प्रकरण में प्रार्थी ने पी डी ऍफ़ डाक्यूमेंट्स के रूप में चार पत्र प्रस्तुत किया जिसमे दो पत्रों द्वारा उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने स्वीकार किया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई फिर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी तनू उपाध्याय द्वारा भी गोपनीय जाँच करा के अपनी आख्या में यह तथ्य उजागर किया गया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई किन्तु क्षेत्राधिकारी कैंट दुर्गेश कुमार सिंह उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारिओं की आख्या को झुठलाते
हुए मौत की नयी थ्योरी दिया और मौत की तारीख को एक महींने पीछे खींच दिया अर्थात बाबू सिंह की मौत अप्रैल माह में हुई और हास्यास्पद यह है की हर किसी का रिपोर्ट
मनोज कुमार की आख्या पर आधारित है |
According to report of Manoj Kumar Sub inspector Police station Asiyana
District Lucknow dated 07 June 2019, Babu Singh Son of R. P. Singh died on 11
May 2019 at Dehradun in Uttarakhand but circle officer Cant Mr. Durgesh Kumar
Singh making claims differently. According to the report submitted by the
aforementioned circle officer dated 04 Sept 2019, Babu Singh Son Of R. P.
Singh died on 12 April 2019 at Dehradun in Uttarakhand moreover according to
circle officer aforementioned Registrar, death and birth, Municipal
corporation, Dehradun issued death certificate on 24062019. Whose claim is
authenticated, can only be explained senior rank officers of the department
by throwing more light on the issue. Whether it is not cryptic style of the
dealing and contrary view points are not making the matter more mysterious
and reports incredible as well Carelessness in the investigation of the
police sub inspector Manoj Kumar submitted to the concerned circle officer.
 
 
सन्दर्भ का प्रकारशिकायत
अधिकारीक्षेत्राधिकारी
विभागगृह एवं गोपन
सन्दर्भ श्रेणीपुलिस के विरूद्ध शिकायती प्रार्थना पत्र
 
 
संलग्नक : है
 
 

 

आवेदन का विवरण
 
शिकायत संख्या
40015719065537
आवेदक कर्ता का नाम:
Dinesh Pratap Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9838919619,9838919619
विषय:
श्री मान जी समस्त दस्तावेज पंजीकृत डाक से प्रार्थी द्वारा दिनांक ०७ सितम्बर
२०१९ को क्षेत्राधिकारी कैंट की सेवा में प्रेषित
है और इंडिया पोस्ट की वेबसाइट यह बता रही है की वे सभी दस्तावेज दिनांक ०९ सितम्बर
२०१९ को दिलकुशा
उपडाक घर द्वारा क्षेत्राधिकारी कैंट कार्यालय द्वारा प्राप्त किया गया किन्तु अभाग्य यह है की क्षेत्राधिकारी कैंट इस बात में ज्यादा आनंद है की आवेदक द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया इस बात का जिक्र उन्होंने अपने रिपोर्ट
दिनांक २५ सितम्बर
२०१९ में भी किया है जिसका मतलब होता है की प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज जो की दिनांक ०९ सितम्बर २०१९ को दिलकुशा उपडाक घर द्वारा क्षेत्राधिकारी कैंट कार्यालय द्वारा प्राप्त
किया गया उपनिरीक्षक मनोज कुमार को भेजने के बजाय कार्यालय में ही अभी तक धूल खा रहा है | श्री मान जी पुलिस तथ्यों के आधार पर विवेचना
करती है किन्तु यहा तो क्षेत्राधिकारी महोदय की रिपोर्ट मनमाना है जिसकी वजह से प्रार्थी को बार बार आवेदन करना पड़ रहा है | शिकायत संख्या 40015719059615 आवेदक कर्ता का नाम
Dinesh Pratap Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०9838919619
उपरोक्त प्रकरण में क्षेत्राधिकारी कैंट कहते है की बाबू सिंह की मौत १२०४२०१९ को हुई किन्तु उपनिरीक्षक मनोज कुमार और पूर्व क्षेत्राधिकारी कैंट के अनुसार मौत मई माह में हुई है शिकायत संख्या40015719058762
आवेदक कर्ता का नाम Dinesh Pratap Singh श्री मान जी उपरोक्त
प्रकरण में प्रार्थी ने पी डी ऍफ़ डाक्यूमेंट्स के रूप में चार पत्र प्रस्तुत किया जिसमे दो पत्रों द्वारा उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने स्वीकार किया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई फिर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी तनू उपाध्याय द्वारा भी गोपनीय जाँच करा के अपनी आख्या में यह तथ्य उजागर किया गया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई किन्तु क्षेत्राधिकारी कैंट दुर्गेश कुमार सिंह उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारिओं की आख्या को झुठलाते
हुए मौत की नयी थ्योरी दिया और मौत की तारीख को एक महींने पीछे खींच दिया अर्थात बाबू सिंह की मौत अप्रैल माह में हुई और हास्यास्पद यह है की हर किसी का रिपोर्ट
मनोज कुमार की आख्या पर आधारित है |
According to report of Manoj Kumar Sub inspector Police station Asiyana
District Lucknow dated 07 June 2019, Babu Singh Son of R. P. Singh died on 11
May 2019 at Dehradun in Uttarakhand but circle officer Cant Mr. Durgesh Kumar
Singh making claims differently. According to the report submitted by the
aforementioned circle officer dated 04 Sept 2019, Babu Singh Son Of R. P.
Singh died on 12 April 2019 at Dehradun in Uttarakhand moreover according to
circle officer aforementioned Registrar, death and birth, Municipal
corporation, Dehradun issued death certificate on 24062019. Whose claim is
authenticated, can only be explained senior rank officers of the department
by throwing more light on the issue. Whether it is not cryptic style of the
dealing and contrary view points are not making the matter more mysterious
and reports incredible as well Carelessness in the investigation of the
police sub inspector Manoj Kumar submitted to the concerned circle officer.
नियत तिथि:
26 – Oct – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
 
फीडबैक :
 
फीडबैक की स्थिति:
 

आवेदन का संलग्नक

अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
26 – Sep – 2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट
 
 
अनमार्क
 

 

 

आवेदन का विवरण
 
शिकायत संख्या
40015719058762
आवेदक कर्ता का नाम:
Dinesh Pratap
Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9838919619,9838919619
विषय:
According to
report of Manoj Kumar Sub inspector Police station Asiyana District Lucknow
dated 07 June 2019, Babu Singh Son of R. P. Singh died on 11 May 2019 at
Dehradun in Uttarakhand but circle officer Cant Mr. Durgesh Kumar Singh
making claims differently. According to the report submitted by the
aforementioned circle officer dated 04 Sept 2019, Babu Singh Son Of R. P.
Singh died on 12 April 2019 at Dehradun in Uttarakhand moreover according to
circle officer aforementioned Registrar, death and birth, Municipal
corporation, Dehradun issued death certificate on 24062019. Whose claim is
authenticated, can only be explained senior rank officers of the department
by throwing more light on the issue. Whether it is not cryptic style of the
dealing and contrary view points are not making the matter more mysterious
and reports incredible as well Carelessness in the investigation of the
police sub inspector Manoj Kumar submitted to the concerned circle officer.
Whether it is not ridiculous that police of the capital Lucknow wants to
close the Pandora box concerned with the land and house grabbing of the
aggrieved applicant by Land Mafia who perpetrated this crime by taking
station officer posted at that time in the concerned police station not only
under good faith but also colluding with him As the concerned police officer
not only terrorised the applicant and his family but also implicated them
under false cases which is reflection of lawlessness and anarchy in the
department of the police. Sir, Ms Tanu Upadhyay, predecessor of
aforementioned circle officer, submitted in its report that Babu Singh died
in the month of the May 2019 at Dehradun in Uttarakhand which is quite
obvious from his attached report dated 20 June 2019 submitted on the
Jansunwai portal of the government of Uttar Pradesh also attached to the
grievance. Police sub inspector Manoj Kumar subsequently in its report dated
13072019 again accepted that Babu Singh died in the month of the May 2019.
What is the credibility of the police reports submitted on the august portal
Jansunwai portal of the government of Uttar Pradesh
नियत तिथि:
06 – Oct – 2019
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
 
फीडबैक :
दिनांक 14/09/2019को फीडबैक:- शिकायत संख्या-40015719058762 आवेदक कर्ता का नाम: Dinesh Pratap Singh  श्री मान जी उपरोक्त प्रकरण में प्रार्थी ने पी डी ऍफ़  डाक्यूमेंट्स के रूप में चार पत्र प्रस्तुत किया जिसमे दो पत्रों द्वारा उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने स्वीकार किया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई फिर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी तनू उपाध्याय द्वारा भी गोपनीय जाँच करा के अपनी आख्या में यह तथ्य उजागर किया गया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई किन्तु क्षेत्राधिकारी दुर्गेश  कुमार सिंह उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारिओं की आख्या को झुठलाते हुए मौत की नयी थ्योरी दिया और मौत  की तारीख को एक महींने पीछे खींच दिया अर्थात बाबू सिंह की मौत अप्रैल माह में हुई और हास्यास्पद यह है की हर किसी का रिपोर्ट मनोज कुमार की आख्या पर आधारित है | अब  तीसरे क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार सिंह ने दुर्गेश कुमार सिंह के रिपोर्ट को तिथि बदल कर अपने हस्ताक्षर में पेश कर दिया वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय के समक्ष | महत्वपूर्ण तथ्य यह है की वर्तमान क्षेत्राधिकारी महोदय ने शिकायत के विन्दुओं का परिशीलन किये बिना मनमाना तरीके से  निवर्तमान क्षेत्राधिकारी दुर्गेश कुमार सिंह के आख्या रिपोर्ट को ही प्रस्तुत कर दिया जब की प्रकरण बाबू सिंह के बिबादित मृत्यु तिथि को ले कर संदिग्ध मौत से पर्दा उठाने हेतु प्रस्तुत किया गया था | किन्तु क्षेत्राधिकारी महोदय की रिपोर्ट संदिग्ध मौत को और रहस्य्मयी बना दिया | श्री मान जी मृत्यु कोई साल दो साल पुराना  नहीं है की कोई कन्फूजन हो बल्कि ऐसा प्रतीत होता है जिस प्रकार प्रार्थी के ऊपर झूठे मुक़दमे थोपे गए यह मृत्यु भी उसी रणनीति का हिस्सा है
फीडबैक की स्थिति:
फीडबैक प्राप्त

आवेदन का संलग्नक

अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
06 – Sep – 2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट
14/09/2019
प्रस्तुत प्रकरण की जांच की गयी |जांच आख्या संलग्न है |
निस्तारित
 

 

 

 

आवेदन का विवरण
 
शिकायत संख्या
40015719059615
आवेदक कर्ता का नाम:
Dinesh Pratap
Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9838919619,9838919619
विषय:
महोदय प्रार्धना पत्र के साथ लखनऊ विकास प्राधिकरण के तीन इकरार नामा लगे है जो बाबू सिंह उसकी पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी और कनिष्क कुमार सिंह के है जिसको उपरोक्त प्राधिकरण के कर्मचारी शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी द्वारा सम्पादित किया गया है | जिसके अनुसार बाबू सिंह की उम्र ३० वर्ष पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी सिंह की उम्र २५ वर्ष तथा पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र १८ वर्ष है अर्थात गर्भ स्थापना के समय पिता की उम्र ११ वर्ष और माता की उम्र वर्ष अर्थात शास्त्र और विज्ञानं दोनों के लिए असंभव है किन्तु लखनऊ पुलिस और विकास प्राधिकरण के लिए बाबू सिंह और  उनकी पत्नी आदर्श है और व्यक्ति आदर्श पुरुष में दोष नहीं देखता तभी तो पति , पत्नी , पुत्र, पत्नी की माँ और पत्नी के भाई के नाम एक झटके में पांच प्लाट लखनऊ विकास प्राधिकरण के कानपुर योजना के सेक्टर एच मुख्य मार्ग पर एस  एस  प्रकार के योजना के हथियाये | गरीब लोगो का हक़ एक ही परिवार को आबंटित किया गया जिसका मुखिया बाबू सिंह पुलिस के अनुसार सीधा साधा अंगूठा टीप लेकिन हस्ताक्षर हिंदी और आंग्ल भाषा में कर लेते थे | सोचिये जो व्यक्ति इतना शातिर है की सरकारी कर्मचारियों से हर गलत काम करवा सकता था उसको लखनऊ पुलिस जिसके कारनामो से हमेशा योगी सरकार की किरकिरी हुई सीधा साधा मानता है | श्री मान किसी भी आपराधिक कृत्य के लिए आपराधिक मन जिम्मेदार होता है इरादा महत्वपूर्ण होता है | किन्तु पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र बढ़ा कर बाबू सिंह,  और आराधना उर्फ गुड्डी सिंह तथा शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी ने कोई अपराध कारित नहीं किया क्योकि सरकारी महकमा ऊपर से नीचे तक भ्रस्ट है | श्री मान जी आप ही अपने पुलिस विभाग को देखे जितने आख्या बाबू सिंह की मृत्यु से सम्बंधित है वे खुद में असंगत है जो इन आख्याओं को संदेहास्पद बना देते है | पुलिस की यही रहस्य्मयी शैली बहुत से सवालिया निशान पैदा करती है | श्री मान जी इकरारनामा के दो पक्ष है बाबू सिंह और दिनेश प्रताप सिंह और मुख्तारनामा जो की उप निबंधक लखनऊ के समक्ष बाबू सिंह ने दिनेश प्रताप सिंह को दिया | महत्वपूर्ण है की लगभग २० सालो से भी अधिक समय बीत गया और बाबू सिंह द्वारा कोई आपत्ति नहीं किया गया किन्तु लखनऊ पुलिस और आराधना उर्फ गुड्डी सिंह ने मकान और जमीन हथियाने के सिर्फ प्रार्थी ही नहीं प्रार्थी के समस्त परिवार पर संगीन आरोपों के गंभीर धाराओं में झूठा मुकदमा पंजीकृत किया गया  जो गंभीर अपराध की कोटि में आता है इसलिए एक वरिष्ठ ईमानदार अधिकारी के द्वारा या मामले को अन्य एजेंसी द्वारा और यदि संभव हो तो केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा जांच कराइ जाय जिससे इस गंभीर अपराध में शामिल पुलिस कर्मी बे नकाब हो | प्रार्थी द्वारा पत्रकार पुरम गोमतीनगर में स्थित अपने आवास  संख्या बी ९९ जिसका रकबा २०० वर्ग मीटर में बने मकान को बेच कर बाबू सिंह को पैसा दिया था | पैसा बाबू सिंह ने लिया जमीन और मकान बाबू सिंह ने दिया लेकिन उस मकान को पुलिस की मदद से कब्ज़ा आराधना
उर्फ गुड्डी ने किया | प्रार्थी जानना चाहता है की किस कैनन लॉ ने आराधना उर्फ गुड्डी को अधिकारिता प्रदान की हैआराधना उर्फ गुड्डी जा कर बाबू सिंह से अपने अधिकार की बात करे जिनको उन्होंने अपने  हक़ की जमीन बेचने का हक़ दिया था | वैसे भी नियमानुसार एक ही प्लाट उनके नाम है और वह भी जब सक्षम न्यायालय का आदेश पारित होने पर |
नियत तिथि:
09 – Oct – 2019
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
 
फीडबैक :
दिनांक 26/09/2019को फीडबैक:- श्री मान जी समस्त दस्तावेज पंजीकृत डाक से प्रार्थी द्वारा दिनांक ०७ सितम्बर २०१९ को क्षेत्राधिकारी कैंट की सेवा में प्रेषित है और इंडिया पोस्ट की वेबसाइट यह बता रही है की वे सभी दस्तावेज दिनांक ०९ सितम्बर २०१९ को दिलकुशा उपडाक घर द्वारा क्षेत्राधिकारी कैंट कार्यालय द्वारा प्राप्त किया गया किन्तु अभाग्य यह है की क्षेत्राधिकारी कैंट इस बात में ज्यादा आनंद है की आवेदक द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया इस बात का जिक्र उन्होंने अपने रिपोर्ट दिनांक २५ सितम्बर २०१९ में भी किया है जिसका मतलब होता है की प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज जो की दिनांक ०९ सितम्बर २०१९ को दिलकुशा उपडाक घर द्वारा क्षेत्राधिकारी कैंट कार्यालय द्वारा प्राप्त किया गया उपनिरीक्षक मनोज कुमार को भेजने के बजाय कार्यालय में ही अभी तक धूल खा रहा है | श्री मान जी पुलिस तथ्यों के आधार पर विवेचना करती है किन्तु यहा तो क्षेत्राधिकारी महोदय की रिपोर्ट मनमाना है जिसकी वजह से प्रार्थी को बार बार आवेदन करना पड़ रहा है | शिकायत संख्या 40015719059615 आवेदक कर्ता का नाम: Dinesh Pratap Singh आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:9838919619 उपरोक्त प्रकरण में क्षेत्राधिकारी कैंट कहते है की बाबू सिंह की मौत १२/०४/२०१९ को हुई किन्तु उपनिरीक्षक मनोज कुमार और पूर्व क्षेत्राधिकारी कैंट के अनुसार मौत मई माह में हुई है शिकायत संख्या-40015719058762 आवेदक कर्ता का नाम: Dinesh
Pratap Singh
श्री मान जी उपरोक्त प्रकरण में प्रार्थी ने पी डी ऍफ़ डाक्यूमेंट्स के रूप में चार पत्र प्रस्तुत किया जिसमे दो पत्रों द्वारा उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने स्वीकार किया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई फिर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी तनू उपाध्याय द्वारा भी गोपनीय जाँच करा के अपनी आख्या में यह तथ्य उजागर किया गया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई किन्तु क्षेत्राधिकारी कैंट दुर्गेश कुमार सिंह उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारिओं की आख्या को झुठलाते हुए मौत की नयी थ्योरी दिया और मौत की तारीख को एक महींने पीछे खींच दिया अर्थात बाबू सिंह की मौत अप्रैल माह में हुई और हास्यास्पद यह है की हर किसी का रिपोर्ट मनोज कुमार की आख्या पर आधारित है | According to
report of Manoj Kumar Sub inspector Police station Asiyana District Lucknow
dated 07 June 2019, Babu Singh Son of R. P. Singh died on 11 May 2019 at
Dehradun in Uttarakhand but circle officer Cant Mr. Durgesh Kumar Singh
making claims differently. According to the report submitted by the
aforementioned circle officer dated 04 Sept 2019, Babu Singh Son Of R. P.
Singh died on 12 April 2019 at Dehradun in Uttarakhand moreover according to
circle officer aforementioned Registrar, death and birth, Municipal
corporation, Dehradun issued death certificate on 24062019. Whose claim is
authenticated, can only be explained senior rank officers of the department
by throwing more light on the issue. Whether it is not cryptic style of the
dealing and contrary view points are not making the matter more mysterious
and reports incredible as well Carelessness in the investigation of the
police sub inspector Manoj Kumar submitted to the concerned circle officer.
फीडबैक की स्थिति:
फीडबैक प्राप्त

आवेदन का संलग्नक

अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
09 – Sep – 2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट
25/09/2019
प्रस्तुत प्रकरण की जांच की गयी |जांच आख्या संलग्न है |
निस्तारित
 

 

3 comments on What is the credibility of police reports in Uttar Pradesh which are self contradictory?

  1. आवेदक कर्ता का नाम Dinesh Pratap Singh श्री मान जी उपरोक्त प्रकरण में प्रार्थी ने पी डी ऍफ़ डाक्यूमेंट्स के रूप में चार पत्र प्रस्तुत किया जिसमे दो पत्रों द्वारा उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने स्वीकार किया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई फिर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी तनू उपाध्याय द्वारा भी गोपनीय जाँच करा के अपनी आख्या में यह तथ्य उजागर किया गया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई किन्तु क्षेत्राधिकारी कैंट दुर्गेश कुमार सिंह उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारिओं की आख्या को झुठलाते हुए मौत की नयी थ्योरी दिया और मौत की तारीख को एक महींने पीछे खींच दिया अर्थात बाबू सिंह की मौत अप्रैल माह में हुई और हास्यास्पद यह है की हर किसी का रिपोर्ट मनोज कुमार की आख्या पर आधारित है |

  2. Today aggrieved applicant Dinesh Pratap Singh submitted a grievance before the Prime Minister of India so that it may be forwarded to the chief minister of government of Uttarakhand so that Chief Minister office may forward this representation to Municipal Corporation Dehradun in order to get the factual position in regard to the mysterious death of the Babu Singh son of RP Singh. The role of the Lucknow police always remained undercloud and full of suspicion because of its cryptic working style and partial approach. Lucknow police not only violated the order passed by the Lucknow bench of the high court of judicature at Allahabad but itself acted like civil court by making the mockery of the law of land. Here Lucknow police not only registered false cases against aggrieved applicant but also against his family members under various sections of the IPC in order to terrorize them so that they may flee away from the house.

  3. Undoubtedly mysterious death of the Babu Singh must be screened out by the concerned accountable public functionaries but it seems that it can't be expected from the Lucknow police because of their their arbitrary reply in the matter. Undoubtedly Lucknow police acted like civil court and an offender in the uniform quite obvious that they registered false and fabricated cases against the not only aggrieved but also against his wife and daughter which was beyond the limit of atrocity and they crossed every limit to torment the family members.

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