Vishnu Mrityunjay Stotram compiled by ancient sage Markandey provides immortality to listeners

Yogi Vishnu Mrityunjay Stotram भगवन पुण्डरीकाक्ष नरसिंह भगवान के   प्रसन्न होने पर कुछ भी दुर्लभ नही है जिस तरह से मार्कंडेय ऋषि ने अल्पायु होने पर भी चिरंजीवी बने और उपनिषदों के अनुसार महामुनि मार्कन्डेय अमर है | 

6 comments on Vishnu Mrityunjay Stotram compiled by ancient sage Markandey provides immortality to listeners

  1. य इदं पठते भक्त्या त्रिकालं नियतः शुचिः |
    नाकाले तस्य मृत्युह स्यान्न्ररस्या अच्युत चेतसः ||
    जातक को अकाल मृत्यु से बचने के लिए नियमित रूप से मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए |
    Whoever recites these verses three times a day regularly, never faces untimely death. The verses of the hymn tone up cells and rejuvenate bodily organs. It frees the body from all kind of ailments.

  2. Excellent remedy keep close your eyes and listen the verses of the hymn Vishnu Mrityunjay stotra you will be free from all kind of diseases.Excellent hymn dedicated to Lord Vishnu and its verses are echoing enough to quantize the the cells of the body thus bodily organs are getting rejuvenated because of the sounds of of this hymn. One must listen this hymn daily both morning and evening time in order to enhance the peace of the mind. These verses have extra ordinary healing powers so must be listened daily.

  3. The verses of the hymn are echoing and toning up the cells of the bodily organs which causes bodily organs rejuvenated. Therefore body experience freshness. Because of the blessings of the Lord Vishnu, our body is free of all kind of diseases.
    यह प्रकृति ही हमारा निर्माण अर्थात पञ्च महाभूत और यही प्रकृति हमारा पालन करती है और इसी प्रकृति में ही इस शरीर का विनाश हो जाता है | अर्थात यह प्रकृति ही इश्वर स्वरूप है और त्रिदेव इसी के रूप है यह हिरण्यगर्भ ही तो ब्रह्म है

  4. भगवन पुण्डरीकाक्ष नरसिंह भगवान के प्रसन्न होने पर कुछ भी दुर्लभ नही है जिस तरह से मार्कंडेय ऋषि ने अल्पायु होने पर भी चिरंजीवी बने और उपनिषदों के अनुसार महामुनि मार्कन्डेय अमर है
    Because of the blessings of the Lord Vishnu, our body is free of all kind of diseases.
    Undoubtedly it will decrease the medical bills of the family because it has extraordinary curable efficiency to ailments. Therefore these verses must be heard by sinking itself in the attention of the Lord Shiva. It is beneficial for the striver to concentrate its mind on the Lord Vishnu and this concentration must be so intense that ego of the striver may vanish.

    1. नारायण पद्मनाभ सहस्त्र नेत्र पुरुषोत्तम ऋषिकेश गोविंद पुंडरीकाक्ष अनंत केशव बामन विष्णु नरसिंह जनार्दन माधव पुष्कर पुण्य रूप जगतपति लोकनाथ मैं प्रणाम करता हूं भूत आत्मा महात्मा जगत योनि स्वरूप बिंब रूप भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करता हूं मैं हजार मस्तक वाले अव्यक्त सनातन महायोग रूप भगवान को प्रणाम करता हूं मेरा क्या कर लेगी जो प्राणी नियम पूर्वक इस स्त्रोत का त्रिकाल पाठ करता है उस प्राणी की अकाल मृत्यु कमी नहीं होती जो रोगी अपने हृदय कमल में पुराण पुरुषोत्तम नारायण सास्वत आदि देव सूर्य से भी अधिक तेजस्वी नारायण का ध्यान करता है वह मृत्यु पर निश्चय ही विजय प्राप्त करता है

  5. जो मनुष्य तीनों संध्याकाल में पवित्र होकर इस स्त्रोत का पाठ करता है या सुनता है वह कभी भी असामयिक मृत्यु का सामना नहीं करता जो रोगी अपने हृदय कमल में पुराण पुरुषोत्तम नारायण का ध्यान करता है वह सभी प्रकार के रोग व्याधियों से मुक्त रहता है

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