There is only show off otherwise in three years penalties had to be recovered from erring PIOs

 

 

 

 

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
Whether it is not obligation of D.M. Mirzapur to ensure recovery of imposed penalties on erring public information officers by state information commission.
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 11 November 2019 at 22:12
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श्री मान जी मिर्ज़ापुर के चार जनसूचना अधिकारियों के विरुद्ध २५ हजार  रुपये शास्ति राज्य सूचना आयोग ने तीन वर्ष पूर्व लगाया और आज तक उसकी वसूली नहीं हो पायी बंश बहादुर सिंह अपर जिलाधिकारी के बारे में  कहा जा रहा है जिला प्रशासन द्वारा की उनके द्वारा शास्ति जमा कर दी गयी है किन्तु उन्होंने कोई चालान संख्या व अन्य सबूत नहीं दिए अर्थात पुख्ता सबूत न होना ही इस बात की और इसारा करता है की डाल मे कुछ न कुछ काला और हमे तो प्रतीत होता पूरा का पूरा दाल ही काला है | श्री  मान जी जब स्पष्ट आदेश है और कापिया संबंधितों पंजीकृत डाक से भेजी जा चुकी है तब तो वसूली हुई ही नहीं तब तो डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने वसूली ही नहीं कराया ऐसा ही तो कोई जिला मजिस्ट्रेट वहा पर भी होंगे | श्री मान जी यदि सही ढंग से राज्य सूचना आयोग के निर्देशों का पालन किया जाय तो कोई भी जनसूचना अधिकारी हिम्मत नहीं जुटा  पायेगा सूचना  का और यहां तो चार चार साल तक केस चला और तब भी सूचनाए नहीं दिए और तब जा कर शास्ति अधिरोपित किया गया | 
Sir under Right to Information Act 2005, maximum pecuniary penalty imposed on the public information officer is Rs.25 thousand, how can it be 10000 rupees as published in the leading Hindi Daily Amar Ujala. 
Sir whether District Magistrate is a public information officer because under Right to Information Act 2005, pecuniary penalties are imposed by the State Information Commission or central information commission only on public information officers. Under Right to Information Act 2005, District Magistrate is considered as Nodal officer and being the administrative head at the district level, first appeal is generally made before the district Magistrate as it is generally made before senior rank officer of the CPIO or PIO. 
इस प्रकार के न्यूज़ सिर्फ महिमामंडित करते है और सच्चाई से कोसो दूर है यह गैरजिम्मेदाराना कार्यशैली ही इस आराजकता रुपी राक्षस के लिए जिम्मेदार है | फरवरी 2018 में राज्य सूचना आयोग में तारीख लगी। लेकिन सूचना नहीं दी गई। जिसके बाद मुख्यमंत्री पोर्टल पर इसकी शिकायत की गई। श्री मान जी मुख्यमंत्री पोर्टल कहता  की जनसूचना से सम्बंधित , न्यायालय में लंबित मामले और भी कुछ कृपया इस पोर्टल पर न डाले तो फिर उन्होंने ने कौन सा रोल प्ले कर दिया | अगर वही लोग सही होते  तो चारो जनसूचना अधिकारिओं से जिलाधिकारी महोदय शास्ति की वसूली तनख्वाह से नहीं कर लेते क्यों की अब तक प्रार्थी द्वारा सैकड़ो प्रत्यावेदन प्रस्तुत किया गया है और वे सभी गोल मटोल जवाब दे कर बंद कर दिया गया और अभी तक किसी से एक सिक्का भी वसूली नहीं किया गया |   
राज्य सूचना आयोग ने डीएम पर लगाया 10 हजार रुपये का जुर्मानावजह है बड़ी
न्यूज डेस्कअमर उजालासहारनपुर Updated Mon, 11 Nov 2019 08:25 PM IST
सांकेतिक तस्वीर
सहारनपुर में सौर ऊर्जा के संबंध में आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना नहीं दिए जाने पर राज्य सूचना आयोग ने जिलाधिकारी पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आदेश अनुपालन की आख्या भेजने के निर्देश दिए हैं।
ग्राम खतौली ब्लॉक पुंवारका निवासी रणवीर सिंह ने सौर ऊर्जा के संबंध में वर्ष 2017 में सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगी थी। सिविल कोर्ट अधिवक्ता राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि 2018 में फिर से अपील की गई और फरवरी 2018 में राज्य सूचना आयोग में तारीख लगी। लेकिन सूचना नहीं दी गई। जिसके बाद मुख्यमंत्री पोर्टल पर इसकी शिकायत की गई। 

 


शिकायत
 संख्या 60000190116470 आवेदक कर्ता का नाम Yogi M P Singh नियत तिथि 12 – Sep – 2019 शिकायत की स्थिति लम्बितमहोदय अब आप यह
 बताये की आज तो १५ सितम्बर  २०१९ है जिलाधिकारी मिर्ज़ापुर ने नियत तिथि का ख़याल क्यों नहीं किया और महोदय यह कोई छोटा ब्यथा  या शिकायत नहीं है बल्कि सूचना 
आयुक्त जो की एक संबैधानिक पद है उनके द्वारा आपके चार अधिकारिओं पर शास्ति अधिरोपित की गयी है वह भी प्रत्येक पर २५ हजार रूपये और उसके वसूली होने
 पर सरकारी खजाने को एक लाख रूपये का फायदा होगा और पिछले एक वर्षो से संघर्ष कर रहा हूँ किन्तु वसूली नहीं हो पायी क्यों की यहां केवल भ्रस्टाचार का शासन है 
और कुछ नहीं विधि सम्मत शासन से आप कोसो दूर है | 

 

 

On Thu, 6 Dec 2018 at 14:45, Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> wrote:

 

If the district magistrate Mirzapur ascertains the recovery of penalties imposed on the following erring PIOs who made the mockery of Right to Information Act 2005 by Hon’ble state information commission of government of Uttar Pradesh, then it will cause a surplus of Rs.100000.00 to the public exchequer i.e. government treasury but if he shows the lackadaisical approach, then his actions will only promote the corruption i.e. lawlessness and anarchy in the government machinery.
Most revered Sir –Your applicant invites the kind attention of the Hon’ble Sir with due respect to following submissions as follows.
 
1-It is submitted before the Hon’ble Sir that undoubtedly matter came for recovery after too much delay but it is a moment of happiness for me that whatever hard labour made by me during five years as cases pursued by me without being absent from process of the commission has brought up fruit. I consider it a triumph truth over evil (in the form of corruption} in our surroundings.
2-It is to be submitted before the Hon’ble Sir that it is a right time when it is urgent need of the hour to implement such public-spirited decisions as the violation of provisions of Right to Information Act 2005 is quite rampant in the government Machinery and recovery of penalty will discourage the violators who usually take under teeth the provisions of the transparency act in a schizophrenic way. 
3-It is to be submitted before the Hon’ble Sir that undoubtedly there are so many cases of recovery of pecuniary penalties in which recovery was not made but I will shatter if such unethical illegal practices will repeat in this case also. Undoubtedly I thank Hon’ble Information Commissioner who took such a bold step of imposing pecuniary penalties against erring violators of provisions of Transparency Act.
                               This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that how can it be justified to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness and chaos in an arbitrary manner by making the mockery of law of land? There is need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer in order to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.                                               Yours sincerely

 

 

 

Date-0612-2018              Yogi M. P. Singh, Mobile number-7379105911, 

 9336252631, 9794103433,


 Mohalla- Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001.

 

 

 

5 comments on There is only show off otherwise in three years penalties had to be recovered from erring PIOs

  1. श्री मान जी मिर्ज़ापुर के चार जनसूचना अधिकारियों के विरुद्ध २५ हजार रुपये शास्ति राज्य सूचना आयोग ने तीन वर्ष पूर्व लगाया और आज तक उसकी वसूली नहीं हो पायी बंश बहादुर सिंह अपर जिलाधिकारी के बारे में कहा जा रहा है जिला प्रशासन द्वारा की उनके द्वारा शास्ति जमा कर दी गयी है किन्तु उन्होंने कोई चालान संख्या व अन्य सबूत नहीं दिए अर्थात पुख्ता सबूत न होना ही इस बात की और इसारा करता है की डाल मे कुछ न कुछ काला और हमे तो प्रतीत होता पूरा का पूरा दाल ही काला है |

  2. Commissioner under Right to Information Act 2005 is a constitutional post so order passed by this post must be complied by the concerned public authorities. Government must ensure the compliance of the order passed by the commissioner under transparency act.Here aforementioned post represents the mockery of the order passed by the state information commission.

  3. Undoubtedly true if there may be regard of rule of law but rule of law has reached at the stage dying so nothing is obtained through the provisions of law if bribe is not provided to the concerned.

  4. Whether action would be taken against D.M. Mirzapur who took under teeth law of land arbitrarily?
    महोदय अब आप यह बताये की आज तो १५ सितम्बर २०१९ है जिलाधिकारी मिर्ज़ापुर ने नियत तिथि का ख़याल क्यों नहीं किया और महोदय यह कोई छोटा ब्यथा या शिकायत नहीं है बल्कि सूचना आयुक्त जो की एक संबैधानिक पद है उनके द्वारा आपके चार अधिकारिओं पर शास्ति अधिरोपित की गयी है वह भी प्रत्येक पर २५ हजार रूपये और उसके वसूली होने पर सरकारी खजाने को एक लाख रूपये का फायदा होगा और पिछले एक वर्षो से संघर्ष कर रहा हूँ किन्तु वसूली नहीं हो पायी क्यों की यहां केवल भ्रस्टाचार का शासन है और कुछ नहीं | विधि सम्मत शासन से आप कोसो दूर है |

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