Service was taken by the Government now D.F.O. denied the salary of 29 months arbitrarily of poor daily wage staff

Grievance Status for registration number :
PMOPG/E/2019/0026627

 

Grievance Concerns To

 

Name Of Complainant Yogi M P SinghDate of Receipt 15/01/2019

 

Received By Ministry/Department Prime Ministers Office

 

Grievance Description

 

Undoubtedly our member of parliament is the chief minister of state
but we are facing more tyranny in comparison to the period when he was only M.
P. because he used to pay heed to our grievances and now has no time for us.
Think about the gravity of situation that 29 months salary but according to the
divisional forest officer only 19 months salary is not being provided
arbitrarily on flimsy ground. Whether work without salary is not the
encroachment of the fundamental and human rights of aggrieved staff. On one
side of the screen, accountable public functionaries talk of the poor and
weaker section but actually works for the rich otherwise why overlooking the
genuine application of the applicant. आवेदन का विवरण शिकायत संख्या-40018818056270
An application under article 51 A of the constitution of India to enquire in
regards to serious Human Rights Violation by the staffs of the department of
the forest of the government of Uttar Pradesh Prayer- Aggrieved Satyendra Singh
S/O Late Mahendra Singh Dainik Dakiya Baki Range Paniyara Forest Section
Gorakhpur District Gorakhpur Mobile Number 9918646162 is deprived of the salary
for 29 months ie since November 2015 and up till now months arbitrarily Honble
Sir may be pleased to direct aforementioned respondents to pay the wage/
remuneration of the aforementioned aggrieved staffs as soon as possible as such
incidence is the violation of both fundamental rights and human rights of the
aggrieved Those accountable for non payment of the meagre wages provided as
maintenance to aforementioned aggrieved daily wage staff may be subjected to
proper scrutiny under appropriate law of land. भारतीय संबिधान के
अनुच्छेद ५१ अ के तहत कृपया परिशीलनोपरांत नियमानुसार कार्यवाही वास्ते और यदि नही
तो क्यों ? क्या सरकार बेगारी करायेगी फीडबैक की स्थिति: मुख्यमंत्री कार्यालय
द्वारा दिनाक 01/08/2018 को फीडबैक पर कार्यवाही अनुमोदित कर दी गयी है जब
प्रार्थी ने बन विभाग की सेवा की है और कर रहा है तो उसका जीवन निर्वाह हेतु मिलने
वाला छुद्र पारिश्रमिक उसे क्यों नही दिया जा रहा है हमें न्याय चाहिए और अपने
मुख्य मंत्री सर से और वह हमारा अधिकार है वे हमारी रक्षा नही करेंगे तो कौन करेगा
श्री मान जी यह सच है की प्रार्थी का उन्नीस महीने का भुगतान लंबित है और प्रार्थी
के अनुसार २९ महीने का उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष खुद बन विभाग के उस जिम्मेदार
कार्मिक के द्वारा स्वीकार किया गया है जो प्रार्थी एवं प्रार्थी के परिवार को
भूखो मार डालना चाहता है यदि भुगतान नही होता है तो क्या प्रार्थी के मानवाधिकारों
का उल्लंघन नही है निसंदेह विभागी कर्मचारी नियमो से बधे है जो सरकार द्वारा बनाए
जाते है किन्तु मुख्यमंत्री सर द्वारा तो जनहित में दिशा निदेश जारी किये जा सकते
है श्री मान मुख्यमंत्री महोदय ने जिस संसदीय सीट से रिकॉर्ड जीत हासिल की है उसी
के बदौलत आज मुख्य मंत्री पद पर आसीन है क्या उनका दायित्व यह नही है की प्रार्थी
के संबैधानिक व मानवाधिकारों की रक्षा करे श्री मान मुख्य मंत्री सर हम लोगो ने
समर्थन ही नही महा समर्थन दिया है इसलिए आप को हम लोगो को इस तरह से नही भूलना
चाहिए न्याय की बात करना और न्याय करना दोनों में जमीन आसमान का फासला है कोई
विरला ही इस दूरी को तय कर पाता है

 

Grievance Document

 

Current Status Grievance ReceivedDate of Action 15/01/2019

 

Officer Concerns To  Forwarded to Prime Ministers Office

 

Officer Name-Shri Ambuj SharmaOfficer Designation Under Secretary (Public)

 

Contact Address Public Wing 5th Floor, Rail Bhawan New
Delhi

 

Email Address ambuj.sharma38@nic.in

 

Contact Number 011-23386447
संदर्भ संख्या : 60000190009082 , दिनांक – 12 Aug 2020 तक की स्थिति
आवेदनकर्ता का विवरण :
शिकायत संख्या:-
60000190009082
आवेदक का नाम-
Yogi M P Singh
विषय-
Undoubtedly our member of parliament is the chief minister of state but we are facing more tyranny in comparison to the period when he was only M. P. because he used to pay heed to our grievances and now has no time for us. Think about the gravity of situation that 29 months salary but according to the divisional forest officer only 19 months salary is not being provided arbitrarily on flimsy ground. Whether work without salary is not the encroachment of the fundamental and human rights of aggrieved staff. On one side of the screen, accountable public functionaries talk of the poor and weaker section but actually works for the rich otherwise why overlooking the genuine application of the applicant. आवेदन का विवरण शिकायत संख्या-40018818056270 An application under article 51 A of the constitution of India to enquire in regards to serious Human Rights Violation by the staffs of the department of the forest of the government of Uttar Pradesh Prayer- Aggrieved Satyendra Singh S/O Late Mahendra Singh Dainik Dakiya Baki Range Paniyara Forest Section Gorakhpur District Gorakhpur Mobile Number 9918646162 is deprived of the salary for 29 months ie since November 2015 and up till now months arbitrarily Honble Sir may be pleased to direct aforementioned respondents to pay the wage/ remuneration of the aforementioned aggrieved staffs as soon as possible as such incidence is the violation of both fundamental rights and human rights of the aggrieved Those accountable for non payment of the meager wages provided as maintenance to aforementioned aggrieved daily wage staff may be subjected to proper scrutiny under appropriate law of land. भारतीय संबिधान के अनुच्छेद ५१ अ के तहत कृपया परिशीलनोपरांत नियमानुसार कार्यवाही वास्ते और यदि नही तो क्यों ? क्या सरकार बेगारी करायेगी फीडबैक की स्थिति: मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दिनाक 01/08/2018 को फीडबैक पर कार्यवाही अनुमोदित कर दी गयी है जब प्रार्थी ने बन विभाग की सेवा की है और कर रहा है तो उसका जीवन निर्वाह हेतु मिलने वाला छुद्र पारिश्रमिक उसे क्यों नही दिया जा रहा है हमें न्याय चाहिए और अपने मुख्य मंत्री सर से और वह हमारा अधिकार है वे हमारी रक्षा नही करेंगे तो कौन करेगा श्री मान जी यह सच है की प्रार्थी का उन्नीस महीने का भुगतान लंबित है और प्रार्थी के अनुसार २९ महीने का उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष खुद बन विभाग के उस जिम्मेदार कार्मिक के द्वारा स्वीकार किया गया है जो प्रार्थी एवं प्रार्थी के परिवार को भूखो मार डालना चाहता है यदि भुगतान नही होता है तो क्या प्रार्थी के मानवाधिकारों का उल्लंघन नही है निसंदेह विभागी कर्मचारी नियमो से बधे है जो सरकार द्वारा बनाए जाते है किन्तु मुख्यमंत्री सर द्वारा तो जनहित में दिशा निदेश जारी किये जा सकते है श्री मान मुख्यमंत्री महोदय ने जिस संसदीय सीट से रिकॉर्ड जीत हासिल की है उसी के बदौलत आज मुख्य मंत्री पद पर आसीन है क्या उनका दायित्व यह नही है की प्रार्थी के संबैधानिक व मानवाधिकारों की रक्षा करे श्री मान मुख्य मंत्री सर हम लोगो ने समर्थन ही नही महा समर्थन दिया है इसलिए आप को हम लोगो को इस तरह से नही भूलना चाहिए न्याय की बात करना और न्याय करना दोनों में जमीन आसमान का फासला है कोई विरला ही इस दूरी को तय कर पाता है
विभाग –
पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
शिकायत श्रेणी –
नियोजित तारीख-
03-03-2019
शिकायत की स्थिति-
स्तर –
शासन स्तर
पद –
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव
प्राप्त रिमाइंडर-
प्राप्त फीडबैक –
दिनांक14-03-2019 को फीडबैक:- Whether non-payment of 29 months salary of poor staff of the department of the forest of the government of Uttar Pradesh by the government itself is justified. By passing administrative orders to deprive vulnerable government staffs of their rights is justified. On one side of screen few amassing huge salaries more than two lakhs per month causing a heavy burden on public exchequer and on the other side of screen poor staffs drawing meagre amount Rs,5000 per month are being deprived of salary by passing merely arbitrary circulars by colluding with the senior rank staffs.1- Whether such anti-humanitarian practices may be justified in this largest democracy in the world. 2-Whether in this public infrastructure there is share of only elite class and poor and downtrodden section may die on the verge of hunger. 3-Whether such practice is not the human rights violation of public on the large scale. 4-Whether it is not discrimination on the large scale that few amassing huge wealth from public resources.
फीडबैक की स्थिति –
सन्दर्भ पुनर्जीवित
संलग्नक देखें –
नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अग्रसारित विवरण :

क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी प्राप्त/आपत्ति दिनांक नियत दिनांक अधिकारी को प्रेषित आदेश स्थिति
1 अंतरित लोक शिकायत अनुभाग – 1(मुख्यमंत्री कार्यालय ) 01-02-2019 03-03-2019 अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव -पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग कृपया शीघ्र नियमानुसार कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा की गई है। श्रेणीकरण पूर्व निस्तारित
2 अंतरित अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव (वन विभाग ) 04-02-2019 03-03-2019 प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष -वन नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें श्रेणीकरण पूर्व निस्तारित
3 अंतरित प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष (वन ) 06-02-2019 03-03-2019 मुख्य वन संरक्षक/ वन संरक्षकमण्डल -गोरखपुर,पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें C-श्रेणीकरण
4 आख्या मुख्य वन संरक्षक (वन विभाग ) 13-02-2019 03-03-2019 प्रभागीय वन अधिकारी-गोरखपुर,पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें श्रेणीकरण पूर्व निस्तारित
5 आख्या प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष ( वन) 11-10-2019 14-04-2019 मुख्य वन संरक्षक/ वन संरक्षकमण्डल -गोरखपुर,पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग कृपया प्रकरण का गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 15 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है आख्या प्रेषित,अनुमोदन लंबित
6 आख्या मुख्य वन संरक्षक (वन विभाग ) 09-04-2019 14-04-2019 प्रभागीय वन अधिकारी-गोरखपुर,पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें आख्या उच्च स्तर पर प्रेषित
7 आख्या मुख्य वन संरक्षक (वन विभाग ) 24-06-2019 14-04-2019 प्रभागीय वन अधिकारी-गोरखपुर,पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग उक्त शिकायत का निस्तारण क्षेत्रीय वनाधिकारी/ विभागीय जाँच रिपोर्ट के आधार पर की गयी है अस्वीकृत
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Yogi M. P. Singh
3 months ago

Hon’ble Sir that Honourable sir please take a glance of the communication dated-1st August 2017 which was addressed to divisional forest officer Gorakhpur division. According to this communication Satyendra Singh had to be furnished salary of 19 months ipso facto obvious from the second page Of the attached PDF documents to the representation. Which is quite obvious from the communication of the range officer of the Baki range of Gorakhpur zone at that time posted named Sanjiv Kumar Singh.
Honourable Sir third page of the attached documents to this representation is the letter number 3257/ 16F-1 dated 12th March 2019 chief Conservator Gorakhpur zone Gorakhpur. Through this letter concerned divisional forest officer of division Gorakhpur was directed by the Chief Conservator Gorakhpur zone that he may furnish the arrears of the Satyendra Singh who is posted at the post of Dakiya in the Baki range of the Gorakhpur zone. Think about the gravity of the situation that 9 months have passed of the order issued by chief Conservator Gorakhpur zone but his order was not complied by the divisional forest officer Gorakhpur. Whether it is not a reflection of Anarchy in the department of the forest of the Government of Uttar Pradesh? It is most unfortunate that our accountable public functionaries are overlooking this Anarchy which is going on in the department of the forest. Whether it is a signal of good governance in this largest populous state in this largest democracy in the world? No justice.

Arun Pratap Singh
3 months ago

भारतीय संबिधान के अनुच्छेद ५१ अ के तहत कृपया परिशीलनोपरांत नियमानुसार कार्यवाही वास्ते और यदि नही
तो क्यों ? क्या सरकार बेगारी करायेगी फीडबैक की स्थिति: मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दिनाक 01/08/2018 को फीडबैक पर कार्यवाही अनुमोदित कर दी गयी है जब प्रार्थी ने बन विभाग की सेवा की है और कर रहा है तो उसका जीवन निर्वाह हेतु मिलने वाला छुद्र पारिश्रमिक उसे क्यों नही दिया जा रहा है हमें न्याय चाहिए और अपने मुख्य मंत्री सर से और वह हमारा अधिकार है वे हमारी रक्षा नही करेंगे तो कौन करेगा श्री मान जी यह सच है की प्रार्थी का उन्नीस महीने का भुगतान लंबित है और प्रार्थी के अनुसार २९ महीने का उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष खुद बन विभाग के उस जिम्मेदार कार्मिक के द्वारा स्वीकार किया गया है जो प्रार्थी एवं प्रार्थी के परिवार को भूखो मार डालना चाहता है यदि भुगतान नही होता है तो क्या प्रार्थी के मानवाधिकारों का उल्लंघन नही है निसंदेह विभागी कर्मचारी नियमो से बधे है जो सरकार द्वारा बनाए जाते है किन्तु मुख्यमंत्री सर द्वारा तो जनहित में दिशा निदेश जारी किये जा सकते है

Preeti Singh
3 months ago

उत्तर प्रदेश सरकार को दैनिक वेतन भोगी डाकिया का वेतन भुगतान करना ही चाहिए पाच हजार पर मंथ होता ही क्या है जहा दो लाख रुपये पर मंथ तनख्वाह है ऐसे में वेतन का भुगतान न होना सरकार की गरीब विरोधी मानसिकता को उजागर करता है | धर्म से बड़ा कोई नही होता और न्याय के बिना धर्म की कल्पना संभव नही है |

Vandana Singh
Vandana Singh
3 months ago


निस्संदेह हमारे संसद सदस्य राज्य के मुख्यमंत्री हैं लेकिन हम उस समय की तुलना में अधिक अत्याचार का सामना कर रहे हैं जब वह केवल सांसद थे क्योंकि वह हमारी शिकायतों पर ध्यान देते थे और अब हमारे लिए समय नहीं है। स्थिति के गुरुत्वाकर्षण के बारे में सोचें कि 29 महीने का वेतन लेकिन प्रभागीय वन अधिकारी के अनुसार केवल 19 महीने का वेतन मनमाने ढंग से जमीन पर प्रदान नहीं किया जा रहा है। क्या बिना वेतन के काम, पीड़ित कर्मचारियों के मौलिक और मानवाधिकारों का अतिक्रमण नहीं है। स्क्रीन के एक तरफ, जवाबदेह सार्वजनिक अधिकारी गरीब और कमजोर वर्ग की बात करते हैं, लेकिन वास्तव में अमीर के लिए काम करते हैं अन्यथा आवेदक के वास्तविक आवेदन की अनदेखी क्यों। दैनिक वेतन कर्मचारियों को भूमि के उचित कानून के तहत उचित जांच के अधीन किया जा सकता है। भारतीय संबिधान के अनुच्छेद ५१ अ के तहत: परिशीलनोपरांत नियमनुसार आगे वास्ते और अगर नहीं तो क्यों? क्या सरकार बेगारी करायेगी फीडबैक की स्थिति:

Pratima Parihar
Pratima Parihar
3 months ago

स्क्रीन के एक तरफ दो महीने से अधिक भारी वेतन पाने वाले कुछ लोगों पर सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता है और दूसरी तरफ स्क्रीन पर गरीब कर्मचारी कम राशि का भुगतान करते हैं, जो प्रति माह 5000 रुपये प्रति माह के हिसाब से मनमाने परिपत्र पारित करके वेतन से वंचित किए जा रहे हैं। वरिष्ठ रैंक के कर्मचारियों के साथ। क्या दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसी मानवता विरोधी प्रथाओं को उचित ठहराया जा सकता है। क्या इस सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में केवल कुलीन वर्ग का हिस्सा है और गरीब और दलित वर्ग भूख के कगार पर मर सकता है। क्या इस तरह का अभ्यास बड़े पैमाने पर मानव अधिकारों का उल्लंघन नहीं है। क्या यह बड़े पैमाने पर भेदभाव नहीं है कि सार्वजनिक संसाधनों से बड़ी संपत्ति अर्जित करना।