Report attached by अपर सचिव जोन -बनारस for approval is only visible to him, chief minister office not others

आवेदन
का विवरण
शिकायत
संख्या
60000190074707
आवेदक कर्ता का
नाम:
Yogi M P Singh
आवेदक कर्ता का
मोबाइल न०:
7379105911,
विषय:
श्री मान जिला मजिस्ट्रेट वाराणसी को मामले को निस्तारण हेतु क्षेत्रीय शिक्षा सचिव क्षेत्रीय कार्यालय माध्यमिक शिक्षा परिषद् उत्तर प्रदेश वाराणसी को भेजना था किन्तु मकसद तो
मात्र टालमटोल करके ठंडे बस्ते में डालना था
इसलिए जिलाधिकारी महोदय ने कभी महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ को भेजा तथा कभी
जिलाविद्यालय निरीक्षक कार्यालय वाराणसी को भेजा और आश्चर्य जनक तब हुआ जब आपने
जिला विद्यालय निरीक्षक के २४
०५२०१९ के पत्र को जिसमे उन्होंने
कहा है मामला जिला विद्यालय निरीक्षक मिर्ज़ापुर से सम्बंधित है आपने उसे सी
श्रेणीकृत कर दिया फीडबैक के उपरांत और फिर फीडबैक
: दिनांक 03/06/2019को फीडबैक:- आवश्यक कार्यवाही करने का
कष्ट करें एवं आख्या प्रेषित करें फीडबैक की स्थिति: जिलाधिकारी द्वारा दिनाक 03/06/2019 को
कार्यवाही C- श्रेणीकृत कर दी गयी है ०७जून २०१९ को आपने उसी पत्र के आधार
पर मामले को निस्तारित मान लिया श्री मान जी फीडबैक के पूर्व का रिपोर्ट और
फीडबैक के बाद के रिपोर्ट में क्या अंतर है दोनों वही पत्र है सिर्फ यह बता रहा
है की सरकारी तंत्र में जंगल राज है सोचिये योगी आदित्यनाथ जी के सख्त होने के
बावजूद आपलोग जब इतना मनमानी कर रहे है तो जो मुख्य मंत्री सख्त नहीं रहते होंगे
उनके समय में क्या होगा श्री मान जी जिलाविद्यालय निरीक्षक और कॉलेज प्रबध तंत्र
द्वारा भी कई बार पत्र क्षेत्रीय शिक्षा सचिव क्षेत्रीय कार्यालय माध्यमिक
शिक्षा परिषद् उत्तर प्रदेश वाराणसी को भेजा जा चूका है किन्तु वे हर पत्र को
फाइल कर देते है बिना कोई कार्यवाही किये श्री मान जिलाधिकारी महोदय वाराणसी
क्या आप इस शिकायत का गलत ढंग से निस्तारण के बजाय क्या आप क्षेत्रीय शिक्षा
सचिव क्षेत्रीय कार्यालय माध्यमिक शिक्षा परिषद् उत्तर प्रदेश वाराणसी को नहीं
को नहीं भेज सकते थे निस्तारण वास्ते श्री मान जी क्या आपने अपना रोल रचनात्मक
तरीके से रखा क्या किसी शिकायत का निस्तारण इसी तरह से होता है श्री मान जी आप
तो प्रधान मंत्री संसदीय सीट पोस्टेड है आपसे ऐसी आशा नहीं थी
नियत तिथि:
05 – Jul – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:

आवेदन
का संलग्नक

अग्रसारित विवरण

क्र..
सन्दर्भ
का प्रकार
आदेश
देने वाले अधिकारी
आदेश
दिनांक
अधिकारी
को प्रेषित
आदेश
आख्या
दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या
रिपोर्ट
1
अंतरित
लोक शिकायत अनुभाग – 1(मुख्यमंत्री कार्यालय )
20 – Jun – 2019
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव माध्‍यमिक शिक्षा विभाग
कृपया
शीघ्र नियमानुसार कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा की गई है।
अधीनस्थ
को प्रेषित
2
अंतरित
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव (माध्‍यमिक शिक्षा विभाग )
21 – Jun – 2019
निदेशक माध्यमिक शिक्षा निदेशालय
नियमनुसार
आवश्यक कार्यवाही करें
अनमार्क

आवेदन
का विवरण
शिकायत
संख्या
40019719011582
आवेदक कर्ता का
नाम:
Yogi M P Singh
आवेदक कर्ता का
मोबाइल न०:
9794760348,9794760348
विषय:
अपर शिक्षा सचिव , क्षेत्रीय कार्यालय, माध्यमिक शिक्षा परिषद् वाराणसी आठ
महीने से
भेजे गए
१८ पत्रों को गंभीरता से क्यों नही लिए और श्री मान जी
क्या यह
सुशासन के
लक्षण है
| महोदय शिकायत संख्या-40019919020629, आवेदक कर्ता का नाम: Yogi M P Singh में आख्या प्राप्त/प्रेषित/अनुमोदन लंबित | आज तक जनसुनवाई पोर्टल पर
किसी अधिकारी ने इतना हिम्मत नहीं दिखाया जितना आप आख्या भी नहीं लगाते और
आप की
आख्या स्वीकार हो जाती है | चार वर्ष से प्रकरण लंबित है
महोदय अपर शिक्षा सचिव , क्षेत्रीय कार्यालय, माध्यमिक शिक्षा परिषद् वाराणसी आख्या तक नहीं प्रस्तुत कर
पा रहे है | मेरे यह पूछने पर
की आप
वाराणसी बोर्ड ऑफिस गए
थे तो
अपर सचिव को अपनी व्यथा बता देते लड़का बता
रहा था अपर शिक्षा सचिव
, क्षेत्रीय
कार्यालय
, माध्यमिक शिक्षा परिषद् वाराणसी
का वातानुकूलित कार्यालय बहुत ही आलिशान है वहा तो हम लोगो की हिम्मत ही नहीं है
जाने की और यदि हिम्मत जुटाए तो मिलने जाने ही नहीं देंगे
| सिर्फ बाबू से
मिलते है
और वक
कहते है
की घबडाओं मत जन्म तिथि सुधर जाएगी धैर्य धारण करना सीखो | सोचिये २०१५ से २०१९ गया विद्यार्थी कब
तक धैर्य धारण करेगा अंकपत्र जमा कर टालमटोल और हर
जगह अंक पत्र ही मांगा जाता है | श्री मान जी
जनसूचना अधिकार २००५ के
तहत जो
जानकारी स्वतः उपलब्ध होनी चाहिए उपधारा
धारा ४ के तहत वह भी उपलब्ध नहीं है माध्यमिक शिक्षा परिषद् की वेबसाइट पर
| हर सूचना को
रहस्य्मयी तरीके से छुपाया जा रहा है | यदि सीधे साक्ष्य कुछ बया नहीं कर रहे है तो भी परिस्थित जन्य साक्ष्य जो
कुछ कह रहे वह भयाक्रांत करने वाला है
|
नियत तिथि:
28 – Jul – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:

आवेदन
का संलग्नक

अग्रसारित विवरण

क्र..
सन्दर्भ
का प्रकार
आदेश
देने वाले अधिकारी
आदेश
दिनांक
अधिकारी
को प्रेषित
आदेश
आख्या
दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या
रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन
सन्दर्भ
13 – Jun – 2019
अपर सचिव जोन बनारस
कार्यालय
स्तर पर लंबित

आवेदन
का विवरण
शिकायत
संख्या
40019919020629
आवेदक कर्ता का
नाम:
Yogi M P Singh
आवेदक कर्ता का
मोबाइल न०:
7379105911,7379105911
विषय:
An application under article 51 A of the constitution of India.
Herewith attached detail application of the aggrieved student Pradip Kumar
Maurya submitted by the complainant itself.
नियत तिथि:
15 – Jun – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
प्राप्त अनुस्मारक
क्र..
अनुस्मारक
प्राप्त दिनांक
1
2आख्या निदेशक( हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग उद्योग) 22 – May – 2019 अपर सचिव जोन बनारस कृपया प्रकरण का गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 15 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है | अपर सचिव जोन बनारस से प्रकरण सम्बंधित
है और लड़का २०१५ से ही इनके यह टहल रहा इनके बाबू कहते है प्रोसेस में है हो जाएगा | खुद प्रार्थी पिछले आठ महीने में १८ पत्र जनसुनवाई के माध्यम से इनके
यहा भेज चूका है किन्तु महोदय निस्तारित शब्द लिख कर ख़त्म कर दिए
| जो मेहनत करके प्रत्यावेदन प्रस्तुत
करता है और सामने वाला बिना बिचार किये निस्तारित लिख कर उसका निस्तारण करा के
खुद को मुक्त कर ले
| श्री मान जी जब अपर शिक्षा सचिव , क्षेत्रीय कार्यालय
माध्यमिक शिक्षा परिषद् वाराणसी वास्तव में कोई कार्य नहीं करना चाहते है तो उन्हें स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लेनी चाहिए क्यों की योगी सर ने यह पहल आप जैसे अक्रिय लोकसेवको के लिए यह
व्यवस्था दी है
| Honble Sir that according to section 4 (1) (d) of Right to
Information Act 2005, Every public authority shall—provide reasons for its
administrative or quasi-judicial decisions to affected persons
अपर शिक्षा सचिव , क्षेत्रीय कार्यालय माध्यमिक
शिक्षा परिषद् वाराणसी आठ महीने से भेजे गए १८ पत्रों को गंभीरता से क्यों नही लिए और श्री मान जी क्या यह सुशासन के लक्षण है |
09 Jun 2019
फीडबैक :
दिनांक 06/05/2019को फीडबैक:- Hon’ble Sir please take a
glance of historic judgement delivered by apex court of India. Accountability
must be ensured in order to achieve good governance. Even in respect of
administrative orders Lord Denning M.R. in Breen v. Amalgamated Engineering
Union (1971 (1) All E.R. 1148) observed “The giving of reasons is one of
the fundamentals of good administration”. In Alexander Machinery
(Dudley) Ltd. v. Crabtree (1974 LCR 120) it was observed: “Failure to
give reasons amounts to denial of justice”. Reasons are live links
between the mind of the decision taker to the controversy in question and the
decision or conclusion arrived at”. Reasons substitute subjectivity by
objectivity. The emphasis on recording reasons is that if the decision
reveals the “inscrutable face of the sphinx”, it can, by its
silence, render it virtually impossible for the Courts to perform their
appellate function or exercise the power of judicial review in adjudging the
validity of the decision. Right to reason is an indispensable part of a sound
judicial system, reasons at least sufficient to indicate an application of
mind to the matter before Court. Another rationale is that the affected party
can know why the decision has gone against him. One of the salutary
requirements of natural justice is spelling out reasons for the order made,
in other words, a speaking out. The “inscrutable face of a sphinx”
is ordinarily incongruous with a judicial or quasi-judicial performance.
फीडबैक की स्थिति:
सन्दर्भ
पुनर्जीवित

आवेदन
का संलग्नक

अग्रसारित विवरण

क्र..
सन्दर्भ
का प्रकार
आदेश
देने वाले अधिकारी
आदेश
दिनांक
अधिकारी
को प्रेषित
आदेश
आख्या
दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या
रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन
सन्दर्भ
01 – May – 2019
अपर सचिव जोन बनारस
06/05/2019
C-श्रेणीकरण
2
आख्या
निदेशक( हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग उद्योग)
22 – May – 2019
अपर सचिव जोन बनारस
कृपया प्रकरण का
गंभीरता से
पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 15 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई
है
11/06/2019
आख्या प्राप्त/प्रेषित/अनुमोदन लंबित

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Yogi
1 year ago

अपर सचिव जोन -बनारस से प्रकरण सम्बंधित है और लड़का २०१५ से ही इनके यह टहल रहा इनके बाबू कहते है प्रोसेस में है हो जाएगा | खुद प्रार्थी पिछले आठ महीने में १८ पत्र जनसुनवाई के माध्यम से इनके यहा भेज चूका है किन्तु महोदय निस्तारित शब्द लिख कर ख़त्म कर दिए | जो मेहनत करके प्रत्यावेदन प्रस्तुत करता है और सामने वाला बिना बिचार किये निस्तारित लिख कर उसका निस्तारण करा के खुद को मुक्त कर ले | श्री मान जी जब अपर शिक्षा सचिव , क्षेत्रीय कार्यालय माध्यमिक शिक्षा परिषद् वाराणसी वास्तव में कोई कार्य नहीं करना चाहते है तो उन्हें स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लेनी चाहिए क्यों की योगी सर ने यह पहल आप जैसे अक्रिय लोकसेवको के लिए यह व्यवस्था दी है |

Arun Pratap Singh
1 year ago

फीडबैक : दिनांक 11/07/2019को फीडबैक:- आवेदक द्वारा बताया गया है कि आवेदक आवेदक असंतुष्ट है कृपया समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए
फीडबैक की स्थिति: फीडबैक प्राप्त श्री मान जी अपर शिक्षा निदेशक क्षेत्रीय कार्यालय उत्तर प्रदेश बोर्ड वाराणसी चार वर्ष के उपरांत यह पत्र लिख रहे है की मामला सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रेषित है जैसे ही अनुमोदन प्राप्त होगा जन्म तिथि सुधार की कार्यवाही कर दी जाएगी | श्री मान जी हो सकता है चार वर्ष पुनः अनुमोदन प्राप्त होने में लगे | श्री मान जी क्या क्षेत्रीय कार्यालय में आराजकता नहीं व्याप्त है और जब योगी आदित्य नाथ जी के शासन में कोई सुधार नहीं होगा तो ईश्वर ही मालिक है | जब क्षेत्रीय कार्यालय के कर्मचारी कार्य करना ही नहीं चाहते है तो स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति का रास्ता योगी जी ने खोल दिया है | कार्य करे या घर की ओर प्रस्थान करे उसी में राष्ट्र का हित है | कार्यालय में बैठ कर कुर्सी तोड़ने और एयर कंडीशनर का मजा लेने में राष्ट्र कल्याण नहीं है वैसे भी देश की ५० प्रतिशत आबादी भुखमरी के कगार पर है | श्री मान जी अपर शिक्षा निदेशक क्षेत्रीय कार्यालय उत्तर प्रदेश बोर्ड वाराणसी चार वर्ष से कर क्या रहे थे क्योकि प्रकरण २०१५ का है और एक किशोर छात्र का है जो की गरीब और शोषित वर्ग का है |
Hon’ble Sir please take a glance of historic judgement delivered by apex court of India. Accountability must be ensured in order to achieve good governance. Even in respect of administrative orders Lord Denning M.R. in Breen v. Amalgamated Engineering Union (1971 (1) All E.R. 1148) observed "The giving of reasons is one of the fundamentals of good administration". In Alexander Machinery (Dudley) Ltd. v. Crabtree (1974 LCR 120) it was observed: "Failure to give reasons amounts to denial of justice". Reasons are live links between the mind of the decision taker to the controversy in question and the decision or conclusion arrived at". Reasons substitute subjectivity by objectivity. The emphasis on recording reasons is that if the decision reveals the "inscrutable face of the sphinx", it can, by its silence, render it virtually impossible for the Courts to perform their appellate function or exercise the power of judicial review in adjudging the validity of the decision. Right to reason is an indispensable part of a sound judicial system, reasons at least sufficient to indicate an application of mind to the matter before Court. Another rationale is that the affected party can know why the decision has gone against him. One of the salutary requirements of natural justice is spelling out reasons for the order made, in other words, a speaking out. The "inscrutable face of a sphinx" is ordinarily incongruous with a judicial or quasi-judicial performance.

Beerbhadra Singh
1 year ago

There is ample evidence that additional secretary UP Board regional office Varanasi is procrastinating on the matter but it is unfortunate that our accountable public functionaries are adopting lackadaisical approach in order to take action against the additional secretary which is not only unfortunate but havoc to the constitutional machinery and creating a path of the future generation which is not a good precedent for them. A student belonging to weaker and oppressed section is seeking justice from pillar to post but instead of providing justice to this student, concerned public staff only procrastinating on his representation in order to change date of birth which was made wrong by the UP Board staff itself.