Quantum of corruption in the government of Uttar Pradesh can be guessed from the fact that grievances are redressed arbitrarily

दिनांक24-01-2020 को फीडबैक:-महोदय तहसीलदार सदर का कहना है की आख्यां अपलोड। प्रकरण में आवेदक को अवगत कराया गया कि आवश्य क साक्ष्यी के साथ कृषि विभाग से सम्प र्क कर अनुतोष प्राप्त् कर सकता है। श्री मान जी ब्यथित महबूब अली द्वारा तीन बार प्रार्थना पत्र लेखपाल के माध्यम से तहसीलदार को दिया गया जिसका परिणाम शून्य रहा और चौथी बार का प्रार्थना पत्र इनको पंजीकृत डाक से भेजा गया जो की संलग्नको से स्पस्ट है श्री मान जी तहसीलदार नियमानुसार प्रार्थनापत्र अग्रसारित करने के बजाय सिर्फ टाल मटोल कर रहे है जो की कदापि उचित नही है श्री मान जी जो बात तहसीलदार महोदय के लेखपाल ने कही है आख्या में वही आवेदन महबूब अली का लेखपाल के पास है क्यों नही तहसीलदार महोदय उसको अग्रसारित करते नियमानुसार श्री मान जी स्कीम के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का प्रोसेसिंग तहसीलदार महोदय का कार्यालय करता है उसके पश्चात कृषी अधिकारी कार्यालय जाता है कोई आवेदन इस बात की भी जवाबदेही तय हो जो प्रार्थना पत्र लेखपाल द्वारा हाथो हाथ लिया गया उनकी प्रोसेसिंग की क्या स्थिति है क्या यह सुशासन है की सीधे साधे ग्रामीणों के पत्रों को कूड़े की टोकरी में फेक दिया जाय |

फीडबैक की स्थिति –

अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्वद्वारा दिनाक08-02-2020 को फीडबैक पर कार्यवाही अनुमोदित कर दी गयी है |

If the matter is concerned with the dept. of agriculture, then Tahsildar had to forward the matter to dept. of agriculture as required by law.

Grievance Status for registration number : GOVUP/E/2020/08802

Grievance Concerns To
Name Of Complainant
Yogi M. P. Singh
Date of Receipt
16/03/2020
Received By Ministry/Department
Uttar Pradesh
Grievance Description
If the matter is concerned with Dept. of Agriculture Mirzapur district as suggested by Tahsildar sadar Mirzapur, then ought to forward the matter to same public authority instead of considering the grievance to be disposed. Now it may be forwarded to concerned mandate.
Grievance Document
Current Status
Case closed
Date of Action
19/08/2020
Remarks
अधीनस्थ अधिकारी के स्तर पर निस्तारित अधीनस्थ अधिकारी के स्तर पर निस्तारित अधीनस्थ अधिकारी के स्तर पर निस्तारित आख्याै अपलोड कर सेवा में सादर प्रेषित है
Reply Document
Rating
Poor
Rating Remarks
Here matter is concerned with the proper redressal of the grievance of aggrieved concerned. Whatever report has been submitted same report was already submitted and applicant made objection and this time requested to send the matter to concerned mandate but they again sent it to Tahsildar sadar, if they deem it fit then why grievance of the concerned is still unresolved. This grievance and earlier was redressible by the aforementioned public authority, then still matter is deprived of proper report in the matter which may be based on the submissions of the grievance. They may tell about the note written on the corner of the report as defaulter/ return in Hindi as applicant could not understand the cryptic meaning of this world and use of this world so that proper reply could be made available to them in the next grievance. Who is defaulter if they have guts must tell and whom they are saying. Because in my eye those are great defaulters who are misusing posts to take bribe from innocen
Officer Concerns To
Officer Name
Shri Arun Kumar Dube
Officer Designation
Joint Secretary
Contact Address
Chief Minister Secretariat U.P. Secretariat, Lucknow
Email Address
sushil7769@gmail.com
Contact Number
0522 2226349

क्या एक विकलांग की दुर्दशा पर केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार को दया नही आती इश्वर से प्रार्थना है की इन पत्थर हृदयों में प्रभु करुणा का संचार करे |

जब एक सन्यासी को प्रदेश का मुखिया बनाया गया तो उम्मीद बधी की निश्चित रूप से प्रदेश का काया कल्प होगा किन्तु आराजकता दो गुनी हो गयी हो भी क्यों न क्योकि आराजकता दूर करने के लिए कार्यवाही की आवश्यकता होती है और मुख्यमंत्री कार्यालय में उसकी क्षमता ही नही है |

जब एक लोकल लेखपाल उसी गृह तहसील में अपनी पूरी सर्विस का कार्यकाल गुजार देगा तो परिवर्तन कहा से होगा सरकार की स्थानांतरण नीति केवल एक कागज के कुछ पेजेज है हमारे जिम्मेदार अधिकारिओं के लिए क्योकि कोई योग्य व्यक्ति तो उनकी निगरानी तो कर नही रहा है |

Now it is proved fact that there is a huge irregularity in the public assistance being provided by the government because of the corrupt staffs of the government which is quite obvious from the procrastination on the submitted grievances on the part of aggrieved by the concerned public functionaries instead of redressing the grievances or forwarding the matter to the appropriate authority. They are disposing of the matter by submitting substanceless reports not consistent with the submissions of the grievance which is the mockery of the law of land. It is an obligatory duty of the accountable public functionaries of the Government of Uttar Pradesh to take appropriate steps to punish the earring staffs at the district level but since they blessings of the senior rank officers so it is not feasible in this state.

5 comments on Quantum of corruption in the government of Uttar Pradesh can be guessed from the fact that grievances are redressed arbitrarily

  1. दिनांक24-01-2020 को फीडबैक:-महोदय तहसीलदार सदर का कहना है की आख्यां अपलोड। प्रकरण में आवेदक को अवगत कराया गया कि आवश्य क साक्ष्यी के साथ कृषि विभाग से सम्प र्क कर अनुतोष प्राप्त् कर सकता है। श्री मान जी ब्यथित महबूब अली द्वारा तीन बार प्रार्थना पत्र लेखपाल के माध्यम से तहसीलदार को दिया गया जिसका परिणाम शून्य रहा और चौथी बार का प्रार्थना पत्र इनको पंजीकृत डाक से भेजा गया जो की संलग्नको से स्पस्ट है | श्री मान जी तहसीलदार नियमानुसार प्रार्थनापत्र अग्रसारित करने के बजाय सिर्फ टाल मटोल कर रहे है जो की कदापि उचित नही है | श्री मान जी जो बात तहसीलदार महोदय के लेखपाल ने कही है आख्या में वही आवेदन महबूब अली का लेखपाल के पास है क्यों नही तहसीलदार महोदय उसको अग्रसारित करते नियमानुसार |

  2. यह शिकायत और इससे पहले उपरोक्त लोक प्राधिकरण द्वारा निवारण किया गया था, फिर भी यह मामला उस मामले में उचित रिपोर्ट से वंचित है जो शिकायत के प्रस्तुतिकरण पर आधारित हो सकता है। वे रिपोर्ट के कोने पर लिखे नोट के बारे में डिफॉल्टर / हिंदी में वापसी के बारे में बता सकते हैं क्योंकि आवेदक इस दुनिया के गूढ़ अर्थ और इस दुनिया के उपयोग को समझ नहीं पाए थे, ताकि अगली शिकायत में उन्हें उचित उत्तर उपलब्ध कराया जा सके। डिफॉल्टर कौन है अगर उनके पास हिम्मत है तो वे बताएं कि वे किससे कह रहे हैं। क्योंकि मेरी नजर में वे महान डिफाल्टर हैं जो बेगुनाहों से रिश्वत लेने के लिए पदों का दुरुपयोग कर रहे हैं

  3. Government offices are flooded with the incompetent staff who have no capacity to redress the grievances submitted by the common citizens in the state even they have no capacity to understand the contents of the grievances submitted by the common people. Such is the the dangerous position in the state of Uttar Pradesh and it seems that here government accountable functionaries have jealousy with the people having more intellectual power than him.

  4. A man occupying key post must have it’s own discretion but he himself accepting it that he has no idea to monitor and operate government he was forcibly given the charge of Chief Minister ship which is too much ridiculous and cruel joke with the people in the state. Now rule of law has been substituted by the rule of Anarchy in the state because of Incompetence of the chief minister of this state. Not a single application under Right to Information Act 2005 is being entertained by the public functionaries in the state of Uttar Pradesh which is the mockery of the the law of land and the reflection of the failure of the constitution in the state.

  5. Here matter is concerned with the proper redressal of the grievance of aggrieved concerned. Whatever report has been submitted same report was already submitted and applicant made objection and this time requested to send the matter to concerned mandate but they again sent it to Tahsildar sadar,
    Already repeated requests were made to redress the grievance of handicapped but no concrete action was taken by the concerned. This time also they attached arbitrary report.

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