Post retirement benefits to higher judicial members by political masters can never be justified.


The post
provided to judicial members after retirement as loyalty to political bosses
can never be justified and this act plays key role in promoting anarchy in the
system. It has been proved fact that judiciary in this country has been
paralyzed and handicaped and no poor and downtrodden can get justice in this
anarchy. Entire judicial process has been hijacked by outfits in this country
for personal gains. How a judicial member can remain impartial in delivering
judgement if he is being lured by political masters through post retirement
benefits like awarding key constitutional post in the system. Every one talk of
ideology when on public platform but the behind the screen indulge in wrong
practice.
Every one
is apprised with tyranny and anarchy in the judiciary. Gonda and Azamgarh
episode are ipsofacto obvious proof. Several judges of apex court criticized
for attacking on the dignity of women. What is being done by Narendra Modi is
in planned way to hijack entire democracy. Common man in this country is
frightened in the name of judiciary and accountable functionaries in the
judiciary are accountable for it.
NEW DELHI: Many
articles and statements have appeared in several newspapers and journals
criticizing Justice Sathasivam, former Chief Justice of India, for having
accepted the post of governor of Kerala. I respectfully differ from them, and
would like to present my own view that there is nothing wrong in what Justice
Sathasivam did. 
The first criticism
is that Justice Sathasivam had decided a case quashing the second charge sheet
against Mr Amit Shah regarding the Sohrabuddin encounter incident, and that it
was a sort of quid pro quo given by the BJP government to Justice Sathasivam by
appointing him governor.
जज ने सीना छुआ और सलवार उतारने को कहा…  गोंडा ज़िले मेंदो लड़कियों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि एक जज ने अपने चैंबर में उनके साथ छेड़छाड़ की.        
                     
                     
      
पीड़ित लड़कियों में से एक की उम्र तेरह साल हैऔर दूसरीकी इक्कीस सालदोनों अलगअलग परिवारों से हैं और दोनों के साथ यह घटना एक ही दिन पर अलग समय पर हुई
                     
        
एक लड़की का आरोप है कि जज ने उससे शॉल हटाकर कपड़े उतारने को कहाजिससे वह उसकीउम्र का पता लगा सके.
लड़की ने अपने बयान में कहा है कि इसके बाद जज ने उसका सीना छुआ और सलवार उतारने को कहाइस पर लड़की रोने लगीऔर कहा कि यह सब मुझसे नही होगा.    
                     
                 
दूसरी लड़की ने भी इसी तरह काबयान दिया हैउसका कहना है कि जज ने कपड़े  उतारने पर गलत बयान लिखने की धमकी भी दी.       
                     
     
अतिरिक्त पुलिस महा निदेशक अरुण कुमार का कहना है कि चूँकि यहशिकायत जज के अपनी अदालत के कार्य से सम्बन्धित हैइसलिए पुलिस ने मुकदमा सीधे मुकदमा दर्ज करने के बजाय जिलाजज के अलावा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी शिकायत भेज दी है.
पता चला है कि गृह विभाग ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के कार्यालय को भी पूरी जानकारी भेज दी है और उनके रुख काइन्तजार किया जा रहा है.         
                     
   
आजमगढ़ की जिला अदालत में बुधवार को बयान दर्ज कराने आई एक युवती ने बयान दर्ज करने वाले जज पर ही चैंबर के अंदर छेड़खानी का आरोप लगाया है। घटना की खबर मिलते ही युवती के साथ आए परिजनों तथा वकीलों ने जज के चैंबर के सामने हंगामा खड़ा कर दिया। 
युवती ने घटना की लिखित शिकायत सीजेएम से की है। हंगामे और तनाव के मद्देनजर अदालत परिसर में देर शाम तक फोर्स तैनात रही। देर रात खबर लिखे जाने तक पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।
थाना बिलरियागंज पुलिस अपहरण के बाद बरामद एक युवती को धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए बुधवार को अदालत लाई थी। आरोप है कि जज ने अपने चैंबर में लड़की से बातचीत के दौरान साथ आई महिला कांस्टेबल तथा परिजनों को बाहर निकाल दिया। 
थोड़ी देर बाद बदहवास हालत में भागती हुई युवती चैंबर से बाहर आई। युवती ने महिला पुलिस और घरवालों को जज की करतूत की जानकारी दी। युवती ने बताया कि जज ने उसे धमकी दी कि इस बारे में किसी को कुछ बताया तो जेल भेज देंगे।
घटना की खबर फैलते ही साढ़े तीन बजे तक दीवानी कचहरी परिसर में हंगामा शुरू हो गया। अधिवक्ताओं ने जज के विरुद्ध कार्रवाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। 
हंगामे की सूचना मिलने पर अपर पुलिस अधीक्षक नगर विनोद, सीओ नगर केके सरोज फोर्स के साथ कचहरी पहुंचे। इसी दौरान जज मौके से चले गए। पीड़ित युवती के अधिवक्ता आनंद राय ने बताया कि जज की इस हरकत के कारण युवती का बयान भी दर्ज नहीं हो सका।
25 अगस्त युवती का हुआ था अपहरण
जज पर छेड़खानी का आरोप लगाने वाली 19 वर्षीया युवती का अपहरण 25 अगस्त को हुआ था। उसके पिता की शिकायत पर 26 अगस्त को रिपोर्ट दर्ज करने के बाद बिलरियागंज पुलिस ने उसी दिन शाम को युवती को महराजगंज थाना क्षेत्र से बरामद किया था। 
इस दौरान चार आरोपी युवक भी गिरफ्तार किए गए थे। युवती को महिला कांस्टेबल मिथिलेश राय के साथ बुधवार को कोर्ट में बयान कराने के लिए भेजा गया था।
आजमगढ़ के एएसपी सिटी विनोद कुमार ने बताया क‌ि युवती के द्वारा लगाए गए आरोप को कोर्ट ने संज्ञान में ले लिया है। कोर्ट के अगले आदेश आने तक पीड़ित युवती को महिला सिपाही की अभिरक्षा में वापस थाने भेजा गया है।

1 comment on Post retirement benefits to higher judicial members by political masters can never be justified.

  1. आजमगढ़ की जिला अदालत में बुधवार को बयान दर्ज कराने आई एक युवती ने बयान दर्ज करने वाले जज पर ही चैंबर के अंदर छेड़खानी का आरोप लगाया है। घटना की खबर मिलते ही युवती के साथ आए परिजनों तथा वकीलों ने जज के चैंबर के सामने हंगामा खड़ा कर दिया।

    युवती ने घटना की लिखित शिकायत सीजेएम से की है। हंगामे और तनाव के मद्देनजर अदालत परिसर में देर शाम तक फोर्स तैनात रही। देर रात खबर लिखे जाने तक पुलिस ने घटना की रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी।

    थाना बिलरियागंज पुलिस अपहरण के बाद बरामद एक युवती को धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए बुधवार को अदालत लाई थी। आरोप है कि जज ने अपने चैंबर में लड़की से बातचीत के दौरान साथ आई महिला कांस्टेबल तथा परिजनों को बाहर निकाल दिया।

    थोड़ी देर बाद बदहवास हालत में भागती हुई युवती चैंबर से बाहर आई। युवती ने महिला पुलिस और घरवालों को जज की करतूत की जानकारी दी। युवती ने बताया कि जज ने उसे धमकी दी कि इस बारे में किसी को कुछ बताया तो जेल भेज देंगे।
    घटना की खबर फैलते ही साढ़े तीन बजे तक दीवा

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