On one side of screen Basic Shiksha Adhikaari did nothing except circulation of false news

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
On one side of screen Basic Shiksha Adhikaari did nothing except circulation of false and fabricated news in the vernacular dailies in regard to free and compulsory education and now falsely crying his subordinate has remitted the fee of one my children through headmistress of kindergarten.
1 message
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 3 May 2017 at 02:23
To: presidentofindia@rb.nic.in, pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, supremecourt <supremecourt@nic.in>,
urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, cmup <cmup@up.nic.in>, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>,
 “csup@up.nic.in” <csup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, lokayukta@hotmail.com

जब दो सगे भाई या दो सगी बहन या एक भाई और एक बहन एक ही विद्यालय  में पढ़ रहे हो तो 
उनमे से एक की शुल्क आधी माफ़ हो जाती है और उसी आधार पर मेरे लड़के की आधी फीस माफ है 
बेसिक शिक्षा अधिकारी सिर्फ बकवास कर रहे है अनर्गल प्रलाप करना उनका जन्म सिद्ध अधिकार है |
सभी जानते है देश में भ्रस्टाचार है और ये भी जानते है भ्रस्टाचार कौन करता है |
To
                                                           District Magistrate
                                                      District –Mirzapur, Uttar Pradesh
Subject –Basic Shiksha Adhikari only misled you in regard to disposal of grievance registered 
on jansunwai
 portal of government of Uttar Pradesh as शिकायत संख्या-40019917000695.
With great respect to revered Sir, your applicant invites the kind attention of the Hon’ble Sir
 to the following submissions as follows.
1-It is submitted before the Hon’ble Sir that  
शिकायत संख्या40019916000669
अग्रसारित विवरण-
क्र.स.   सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी       आदेश दिनांक   अधिकारी को प्रेषित    
 आदेश  आख्या दिनांक       आख्या नियत दिनांक   स्थिति  आख्या रिपोर्ट
1           अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ      04 – Jul – 2016           प्रमुख सचिव/सचिव -बेसिक शिक्षा विभाग  —     22 – Jul – 2016    Nistarit (Akhya Sanlagn)        आख्या उच्च स्तर पर प्रेषित   
2          अंतरित प्रमुख सचिव/सचिव (बेसिक शिक्षा विभाग )       05 – Jul – 2016          
 निदेशक -बेसिक शिक्षा निदेशालय       नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें    
 22 – Jul – 2016           Nistarit (Akhya Sanlagn)        आख्या उच्च स्तर पर प्रेषित     
3          अंतरित निदेशक (बेसिक शिक्षा निदेशालय )      08 – Jul – 2016           बेसिक 
शिक्षा अधिकारी-मिर्ज़ापुर,बेसिक शिक्षा विभाग  नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें     
22 – Jul – 2016           Nistarit (Akhya Sanlagn)        C-श्रेणीकरण   
4          आख्या मुख्यमंत्री कार्यालय     19 – Jan – 2017           बेसिक शिक्षा अधिकारी-मिर्ज़ापुर,
बेसिक शिक्षा विभाग       कृपया प्रकरण का गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही 
करते हुए 15 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है    02 – May – 2017          
nistarit (aakhya sanlagn hai)   निस्तारण हेतु लंबित
2-It is submitted before the Hon’ble Sir that  आवेदक कर्ता का नाम:     
 Yogi M P Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:   7379105911,7379105911      
विषय:  सभी लोग जानते है और बहुत पहले से जानते है की दो सगे भाई या भाई और बहन एक ही 
संस्था में पढ़ रहे तो संस्था सहानुभूति के तौर पर एक का शुल्क आधा ही लेती है और यहां पर नगर शिक्षा
 अधिकारी का रोल एक छलावा जैसा है क्यों की मुक्त व आवश्यक शिक्षा अधिनियम के तहत मेरी पुत्री का 
आधा शुल्क प्रधानाध्यापिका से कह कर माफ करा दिया कृपया संलग्नक देखे | With due respect 
your applicant wants to draw the kind attention of the Honble Sir to the following submissions
 as follows 1-It is submitted before the Honble Sir that समाज कल्याण अधिकारी ने प्रार्थी को 
बताया की कक्षा १ से कक्षा ८ तक के छात्रो की छात्रवृत्ति शासन ने रोक लगा दी इसलिए प्रार्थी की कोई 
सहायता नही की जा सकती है क्या मुक्त एवं अनिवार्य शिक्षा संयुक्त राष्ट्र संघ के दबाव में पास तो कर
 दिया गया लेकिन उस कभी अमल नही किया गया या भ्रस्टाचार रूपी दानव इस जनहित कानून को 
अपने समक्ष पनपने ही नही दिया |2 -It is submitted before the Honble Sir that अब आप का 
प्रार्थी शासन के शरण में गया तो मुख्य मंत्री कार्यालय में सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा(सचिव) जैसा की 
प्रायः होता है प्रत्यावेदन प्रमुख सचिव समाज कल्याण को भेज दिया और फिर चैनलवाइज निदेशक समाज 
कल्याण और अंत में फिर समाज कल्याण अधिकारी के यहां पहुच गया इस बार समाज कल्याण अधिकारी 
को मेरे गरीबी पर रहम आ गया और मुझे राहत देने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से याचना तक
 कर डाली और मुझे भी लगा की हो सकता है प्रभु ने मति परिवर्तन कर दिया हो |3 -It is submitted 
before the Honble Sir that चूकी प्रार्थी ने सरकारी तंत्र के भ्रस्टाचार को बहुत अन्दर से देखा है इसलिए 
उसे भरोसा पहले भी नही था इसलिए कार्यवाही जानने के लिए पुनः प्रत्यावेदन जनसुनवाई पोर्टल पर दिया 
और बेसिक शिक्षा अधिकारी के जिलाधिकारी मिर्ज़ापुर को संबोधित पत्र से स्थित स्पस्ट है जो की प्रत्यावेदन
 के साथ पीडीऍफ़ डाक्यूमेंट्स के रूप में अटैच्ड है ब्यवस्थापिका नियम बनाती समाज को दिखाने के लिए
 और देश को कार्यपालिका और नौकरशाह अपने दिल से चलाते है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्रवृत्ति 
बंद कर दी और इनके विद्यालयों में लडको को बुलाना पड़ता है इसके बावजूद लडके नही जाते तो मुक्त 
और अन्निवार्य शिक्षा डस्ट बिन में डालने जैसा हुआ |
नियत तिथि:    19 – Jul – 2016
शिकायत की स्थिति:    लम्बित
3-It is submitted before the Honble Sir that
1           यह जनशिकायत समय सीमा के अंतर्गत निस्तारित न होने के कारण आपके स्तर पर डिफाल्टर होकर
 लंबित हैजनशिकायत के अधिक समय तक लंबित रहने की स्थिति संतोषजनक नहीं हैकृपया प्रकरण का 
तत्काल नियमानुसार निस्तारण किया जाना अपेक्षित है | – मुख्यमंत्री कार्यालय   08 Mar 2017
2          यह जनशिकायत समयसीमा के अंतर्गत निस्तारित न होने के कारण आपके स्तर पर डिफाल्टर होकर 
लंबित हैजनशिकायत के अधिक समय तक लंबित रहने की स्थिति संतोषजनक नहीं हैकृपया प्रकरण का 
तत्काल नियमानुसार निस्तारण किया जाना अपेक्षित है | —मुख्यमंत्री कार्यालय   30 Jan 2017
4-It is submitted before the Honble Sir that whether in the following 
matter your 
applicant is focused on fee and scholarship as basic shiksha adhikaari is 
crying . 
आवेदन काविवरण
शिकायतसंख्या
40019917000695
आवेदक कर्ताका नाम:
Yogi M P Singh
आवेदक कर्ताका मोबाइलन०:
7379105911,7379105911
विषय:
Why do the managements of colleges change the books in order to earn the commission every year Books are sold in the shops but now a days in schools and colleges To impart education has been business of bargaining In order to strengthen Right to Education as it was made fundamental right ,Government of India enacted the act -Right of children to Free and Compulsory Education Act, 2009 Which means no children will deprived from education because of poverty One of the staffs from chief minister office had talk with your applicant and assured your applicant of public aid through office but it seems that it was like election rhetoric of our politicians 06 April 2017 1245 With due respect your applicant wants to draw the kind attention of the Honble Sir to the following submissions as follows 1-It is submitted before the Honble Sir that whether it is justified that concerned may procrastinate on the representation of your applicant Swift and logistic approach of a public functionary towards the grievances of citizenry is the reflection of good governance 2-It is submitted before the Honble Sir that why following communication addressed to various public functionaries of this country couldnt reap any fruit3-It is submitted before the Honble Sir that when the inflation is on the top and education materials are so costly and fees are huge ,then how is it feasible for unemployed people to arrange education for their wards Every year books are changed so younger cant take the help of elder in regard to study material Every where is loot nothing else Whether it is justified for commission books are changed every year This is humble request of your applicant to you Honble Sir that It can never be justified to overlook the rights of citizenry by delivering services in arbitrary manner by floating all set up norms This is sheer mismanagement which is encouraging wrongdoers to reap benefit of loopholes in system and depriving poor citizens from right to justice Therefore it is need of hour to take concrete steps in order to curb grown anarchy in the system For this your applicant shall ever pray you Honble Sir Yours sincerely Yogi M P Singh Mobile number-7379105911 Mohalla-Surekapuram, Jabalpur Road District-Mirzapur , Uttar Pradesh ,India
नियत तिथि:
30 – Apr – 2017
शिकायत कीस्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ काप्रकार
आदेश देनेवाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्यादिनांक
आख्या
नियत दिनांक
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइनसन्दर्भ
15 – Apr – 2017
जिलाधिकारीमिर्ज़ापुर,
02 – May – 2017
nistarit (aakhya sanlagn hai)
निस्तारित
2
आख्या
जिलाधिकारी ( )
16 – Apr – 2017
बेसिक शिक्षा अधिकारीमिर्ज़ापुर,बेसिक शिक्षाविभाग
नियमनुसारआवश्यककार्यवाहीकरें nistarit (aakhya sanlagn hai)
02 – May – 2017
nistarit (aakhya sanlagn hai)
निस्तारित
This is humble request of your applicant to you Honble Sir that It can never be justified to 
overlook the rights of citizenry by delivering services in arbitrary manner by floating all set 
up norms This is sheer mismanagement which is encouraging wrongdoers to reap benefit of 
loopholes in system and depriving poor citizens from right to justice Therefore it is need of
 hour to take concrete steps in order to curb grown anarchy in the system For this your 
applicant shall ever pray you Honble Sir Yours sincerely Yogi M P Singh 
Mobile number-7379105911 Mohalla-Surekapuram, Jabalpur Road District-Mirzapur 
, Uttar Pradesh ,India


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2 comments on On one side of screen Basic Shiksha Adhikaari did nothing except circulation of false news

  1. जब दो सगे भाई या दो सगी बहन या एक भाई और एक बहन एक ही विद्यालय में पढ़ रहे हो तो
    उनमे से एक की शुल्क आधी माफ़ हो जाती है और उसी आधार पर मेरे लड़के की आधी फीस माफ है
    बेसिक शिक्षा अधिकारी सिर्फ बकवास कर रहे है अनर्गल प्रलाप करना उनका जन्म सिद्ध अधिकार है |
    सभी जानते है देश में भ्रस्टाचार है और ये भी जानते है भ्रस्टाचार कौन करता है |

  2. Honble Sir when the inflation is on the top and education materials are so costly and fees are huge ,then how is it feasible for unemployed people to arrange education for their wards Every year books are changed so younger cant take the help of elder in regard to study material Every where is loot nothing else Whether it is justified for commission books are changed every year

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