Mockery of High court order by Lucknow police accountable public functionaries are mute spectators

 

संदर्भ संख्या : 40015719066963 , दिनांक – 05 Nov 2019 तक की स्थिति
आवेदनकर्ता का विवरण शिकायत संख्या:-40015719066963
आवेदक का नामDinesh Pratap Singh
विषयMost revered Sir Your applicant invites the kind attention of Hon’ble Sir with due respect to the following submissions as follows. 1It is submitted before the Hon’ble Sir that 51A. Fundamental duties It shall be the duty of every citizen of India a to abide by the Constitution and respect its ideals and institutions, the National Flag and the National Anthem to develop the scientific temper, humanism and the spirit of inquiry and reform i to safeguard public property and to abjure violence j to strive towards excellence in all spheres of individual and collective activity so that the nation constantly rises to higher levels of endeavour and achievement . 2It is submitted before the Hon’ble Sir that Hon’ble Sir may be pleased to take the perusal of the following submissions. Most respected Superintendent of police, District Lucknow, Uttar Pradesh, the applicant aggrieved Dinesh Pratap Singh, wants to draw the kind attention of the revered Sir to the order passed by the Lucknow bench of the High court of Judicature at Allahabad in the Writ Petition Number135 HC Year 2006 as follows It is simply ordered that the respondent number 4 to7 shall open the lock of the stair case so that Smt Anuradha Singh the petitioner may come out of the house and take the proper and appropriate remedy in the competent court and after that, she may have the liberty to go anywhere. Since it is not a case in the strict sense of illegal detention, therefore, no direction can be issued to the respondent to produce the detenue in the court and allow her to live free at her home but since she can not take necessary steps for taking the remedy in the competent court, therefore it is simply ordered that the alleged detenue Smt Anuradha Singh shall be allowed to go out of the house and respondent number 4 to 7 shall open the lock of the door and open the door so that Smt Anuradha Singh may come out and take appropriate remedy. Dated-07/03/2006 Signed by the concerned Honourable Justice of High court of Judicature of Allahabad, bench of Lucknow. It would be better to take perusal by Sir itself. 
Respondent-1 State of U.P. through Secretary of home. 2-S.S.P. Lucknow 3-S.H.O. Ashiyana Police station. Whether competent court means police as defined by the aforementioned respondents To open the lock of the door and open the door for seeking appropriate remedy means to open the door for always and hatching a conspiracy against the applicant and his family. Consequently, a fabricated First Information Report by colluding with the police was lodged in the police station Ashiyana on 11 July 2009 after 3 years 4 months 4 days of Judgement Dated07032006 under sections of I.P.C. as case number-2692009 Indian Penal Code sections 448,406,420,467,468,471,394 of India Penal Code. All these documents were submitted by the police before the Lucknow bench of High court of judicature at Allahabad and the court took the cognizance and passed the order in accordance with the law but later on police found the records forged and aforementioned fabricated charges not only framed on the applicant but on his wife and daughter as well. Thus terrorised entire family so they fled by putting locks in the rooms latter locks were broken and the entire house was grabbed even valuables were looted. Which means Lucknow police had submitted forged records before the High court along with the affidavit. Thus a competent and appropriate court delivered the Jud
विभाग 
पुलिस
शिकायत श्रेणी नियोजित तारीख31-10-2019
शिकायत की स्थिति– स्तर क्षेत्राधिकारी स्तर पद क्षेत्राधिकारी
प्राप्त रिमाइंडरप्राप्त फीडबैक 
दिनांक05-11-2019 को फीडबैक:-श्री मान जी कुंडी खोल कर दरवाजा खोलने का आदेश लखनऊ पीठ माननीय उच्च 
न्यायालय इलाहाबाद ने इसलिए दिया की अनुराधा सिंह उर्फ आराधना सिंह उर्फ गुड्डी सक्षम न्यायालय के समक्ष वाद
 प्रस्तुत कर सिविल उपचार हासिल करे उपरोक्त ने क्या उपचार हासिल किया है श्री मान जी किस अधिसूचना के माध्यम
 से लखनऊ पुलिस को सिविल कोर्ट को दर्जा प्राप्त है या किसी सक्षम अधिकरण या न्यायालय ने लखनऊ पुलिस को अपना 
अधिकार डेलिगेट कर दिया है जिससे की लखनऊ पुलिस ने उपरोक्त महिला को जमीन और मकान का मालिकाना हक 
प्रदान कर दिया और  सिर्फ प्रार्थी बल्कि औरत बेटी के खिलाफ संगीन धाराओं में मुक़दमा कर दिया और उनके हटते ही 
मकान का ताला तोड़ कर मकान पर कब्ज़ा कर लिया गया समस्त गृहस्थी और दुसरे कीमती सामानों को लूट लिया गया
 इस तरह से लखनऊ पुलिस माननीय उच्च न्यायालय के आदेशो का अक्षरशः पालन किया है श्री मान जी दश भिन्न 
भिन्न शिकायतों में एक ही रिपोर्ट लगा कर लखनऊ पुलिस अपने दायित्वों से इति श्री कर लेती है या तो पुलिस विभाग 
को शिकायतों का निवेदन समझ में नही आता या जान बूझ कर समझने का प्रयास नही करते मामले में सम्बंधित पुलिस 
कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही होनी चाहिए और उच्च न्यायालय आदेश की यथा स्थिति बहाल होनी चाहिए 
पुलिस का रिपोर्ट सिर्फ भ्रामक है किसी भी तरह से स्वीकार किया जाता तो उच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का 
ल्लंघन होगा |
फीडबैक की स्थिति 
फीडबैक प्राप्त संलग्नक देखें 
नोट– अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!
अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :
क्र..
सन्दर्भ 
का प्रकार
आदेश देने 
वाले अधिकारी
आदेश/
आपत्ति 
दिनांक
आदेश/
आपत्ति
आख्या देने 
वाले अधिकारी
आख्या 
दिनांक
आख्या
स्थिति
संल
गनक
1
अंतरित
ऑनलाइन 
सन्दर्भ
01-10-2019
क्षेत्राधिकारी
क्षेत्राधिकारी कैंट ,
जनपदलखनऊ
22-10-2019
प्रस्तुत प्रकरण 
की जांच की गयी |
जांच आख्या 
संलग्न है |
निस्तारित

6 comments on Mockery of High court order by Lucknow police accountable public functionaries are mute spectators

  1. श्री मान जी क्या न्याय पालिका की गरिमा नहीं गिर रही है जिस तरह से विद्वान न्यायाधीश ने आदेश दिया कुंडी खोल कर दरवाजे को खोल दिया जाय जिससे की अनुराधा सिंह सक्षम न्यायालय से सिविल उपचार हासिल करे किन्तु यह क्या लखनऊ पुलिस खुद ही सिविल कोर्ट का पॉवर रखती है | किन्तु प्रार्थी को यह नही मालूम की यह पॉवर लखनऊ पुलिस को किसने डेलिगेट किया है या देश के किस कानून के अनुसार लखनऊ पुलिस को सिविल कोर्ट का दर्जा प्राप्त है | श्री मान जी भ्रष्टाचार का इतना बड़ा साम्राज्य है की लखनऊ पुलिस ने प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह के इतनी संगीन धाराए लगाया की और इतना ही नही पत्नी और बेटी को भी नही छोड़ा की वे लोग रातो रात मकान छोड़ दिए इतना अच्छा आदेश तो कोई कोर्ट भी न पास करता फिर क्या था कमरे का ताला तोड़ कर मकान कब्ज़ा हो गया समस्त सामान को लूट लिया गया प्रार्थी तो जेल में बंद था वकील खड़ा ही नही हुआ जमानत कैंसिल हो गयी पूरा परिवार आतंक के साये में जीने लगा | यहा पर लोकतंत्र है की आराजकता है जहा पुलिस सिर्फ मनमाना करती है और न्यायालय सिर्फ खेद व्यक्त करके प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मसाला परोस देता है | कार्यवाही तो किसी के विरुद्ध होती नही |

  2. श्री मान जी कुंडी खोल कर दरवाजा खोलने का आदेश लखनऊ पीठ माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने इसलिए दिया की अनुराधा सिंह उर्फ आराधना सिंह उर्फ गुड्डी सक्षम न्यायालय के समक्ष वाद प्रस्तुत कर सिविल उपचार हासिल करे | उपरोक्त ने क्या उपचार हासिल किया है | श्री मान जी किस अधिसूचना के माध्यम से लखनऊ पुलिस को सिविल कोर्ट को दर्जा प्राप्त है या किसी सक्षम अधिकरण या न्यायालय ने लखनऊ पुलिस को अपना अधिकार डेलिगेट कर दिया है जिससे की लखनऊ पुलिस ने उपरोक्त महिला को जमीन और मकान का मालिकाना हक प्रदान कर दिया और न सिर्फ प्रार्थी बल्कि औरत बेटी के खिलाफ संगीन धाराओं में मुक़दमा कर दिया और उनके हटते ही
    मकान का ताला तोड़ कर मकान पर कब्ज़ा कर लिया गया समस्त गृहस्थी और दुसरे कीमती सामानों को लूट लिया गया इस तरह से लखनऊ पुलिस माननीय उच्च न्यायालय के आदेशो का अक्षरशः पालन किया है | श्री मान जी दश भिन्न भिन्न शिकायतों में एक ही रिपोर्ट लगा कर लखनऊ पुलिस अपने दायित्वों से इति श्री कर लेती है

  3. Undoubtedly the matter is serious and concerned with the deep rooted corruption but it is unfortunate that government of Uttar Pradesh is not serious to curb the corruption in the government machinery. How Lucknow police can act like civil court as High court of judicature at Allahabad passed order to seek civil remedy to take possession of the house but Lucknow police by lodging F.I.R. Against the aggrieved and his wife and daughter provided the civil remedy. The power with which High court was vested but Lucknow police has those powers.

  4. Where is justice in this largest democracy in the world? If there is rampant corruption in the government offices and no one is acting in accordance with the law of land. Why Lucknow police is behaving like civil court? Who has given the power to the Lucknow police to act like Civil Court. How Lucknow police encroached the Human Rights of the aggrieved individual and his family members?

  5. यह मैटर यह दिखाता है की देश में भ्रष्टाचार का आलम क्या है और दरोगा पुलिस के लिए न्यायालय के आदेश की कितनी अहमियत है कैसे वह कूट रचना करके भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं और उनके कूट रचना पर न्यायालय पुनः संज्ञान नहीं लेता न हीं उन्हें दंडित करता है जिसके कारण न्यायालय की गरिमा कम हो रही है

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