Matter is concerned with deep irregularity and corruption in the allotment of avases but not entertained

 

जनसुनवाई
समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली, उत्तर प्रदेश
सन्दर्भ संख्या:-  
लाभार्थी का विवरण
नाम
मोबइल नंबर(१)
आधार कार्ड न.
आवेदन पत्र का ब्यौरा
लाभार्थी का विवरण/शिकायत क्षेत्र का
संदर्भ संख्या : 40015720054268 , दिनांक – 04 Oct 2020 तक की स्थिति
आवेदनकर्ता का विवरण :
शिकायत संख्या:-
40015720054268
आवेदक का नाम-
Dinesh Pratap Singh
विषय-
Order passed by the Lucknow bench of the High court of Judicature at Allahabad in the Writ Petition Number 135 HC Year 2006 as follows It is simply ordered that the respondent number 4 to 7 shall open the lock of the staircase so that Smt Anuradha Singh the petitioner may come out of the house and take the proper and appropriate remedy in the competent court and after that, she may have the liberty to go anywhere. Since it is not a case in the strict sense of illegal detention, therefore, no direction can be issued to the respondent to produce the detenue in the court and allow her to live free at her home but since she can not take necessary steps for taking the remedy in the competent court, therefore it is simply ordered that the alleged detenue Smt Anuradha Singh shall be allowed to go out of the house and respondent number 4 to 7 shall open the lock of the door and open the door so that Smt Anuradha Singh may come out and take appropriate remedy. Dated 07032006 Signed by the concerned Honourable Justices of Division bench of Lucknow.महोदय उपरोक्त आदेश प्रत्यावेदन के साथ संलग्न है | संलग्नक के प्रथम व द्वितीय पेज में प्रार्थी द्वारा दिनांक १५/ ०३ /२००७ तथा २६/०६ /२००७ को विपक्षियों के पक्ष में निबंधन किये जाने का विरोध किया गया जिसके कारण दिनांक १३/०८/२००७ को लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा अपने तत्कालीन संपत्ति अधिकारी के. के. सिंह द्वारा नोटिस जारी किया गया | पक्ष विपक्ष को सुनने के लिए उपरोक्त अधिकारी द्वारा तिथि दिनांक २५/०८/२००७ समय प्रातः ११ बजे तय किया | अफ़सोस की बात है की पक्ष अर्थात प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह उपस्थित हुए किन्तु पांचो विपक्ष उपस्थित नहीं हुए | प्रार्थी निम्न उक्त बिंदुओं को पुनः श्री मान के संज्ञान में लाना चाहता है | १- क्या बिपक्षी टाइटल बिबाद को निबंधन के समय तक सक्षम न्यायालय के माध्यम से हल कर चुके थे | २- सक्षम न्यायालय का विवरण उपलब्ध कराये | ३- सक्षम न्यायालय द्वारा पारित आदेश की प्रति उपलब्ध कराये | ४-श्री मान जी यदि मूल दस्तावेज प्रार्थी के पास है तो लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा निबंधन की कार्यवाही किस आधार पर सम्पादित की गयी | ५- प्रार्थी के उपरोक्त प्रत्यावेदन पर तत्कालीन संपत्ति अधिकारी के. के. सिंह द्वारा क्या निर्णय लिया गया उसकी प्रति उपलब्ध कराया जाय | प्रार्थी द्वारा पत्रकार पुरम गोमतीनगर में स्थित अपने आवास संख्या बी -९९ जिसका रकबा २०० वर्ग मीटर में बने मकान को बेच कर बाबू सिंह को पैसा दिया था जो की उपनिरीक्षक सत्तेश प्रसाद के माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद के लखनऊ एकल पीठ के समक्ष प्रस्तुत हलफनामे से स्पस्ट है पैसा बाबू सिंह ने लिया जमीन और मकान बाबू सिंह ने दिया लेकिन उस मकान को पुलिस की मदद से कब्ज़ा आराधना उर्फ गुड्डी ने किया | प्रार्थी जानना चाहता है की किस कैनन लॉ ने आराधना उर्फ गुड्डी को अधिकारिता प्रदान की है आराधना उर्फ गुड्डी जा कर बाबू सिंह से अपने अधिकार की बात करे जिनको उन्होंने अपने हक़ की जमीन बेचने का हक़ दिया था वैसे भी नियमानुसार एक ही प्लाट उनके नाम है और वह भी जब सक्षम न्यायालय का आदेश पारित होने पर | Applicant wants to draw the kind attention of the respondent number First who is Secretary of home department, civil secretariat, Government of Uttar Pradesh and respondent number second who is senior superintendent of police Lucknow as well as the station house officer police station Ashiana who is the respondent number 3 in the Writ Petition Number 135 HC Year 2006 filed in the Lucknow bench of the High court of Judicature at Allahabad filed by Anuradha Singh also named Guddi also named Aradhana Singh through her mother Beena Singh wife of Brijraj Singh also Beena Singh wife of Netrpal Singh. Whether in the same matter, to get remedy from various redressal bodies
विभाग –
उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद
शिकायत श्रेणी –
नियोजित तारीख-
07-10-2020
शिकायत की स्थिति-
स्तर –
निदेशालय / विभागाध्यक्ष स्तर/न
पद –
आयुक्त
प्राप्त रिमाइंडर-
प्राप्त फीडबैक –
दिनांक को फीडबैक:-
फीडबैक की स्थिति –
संलग्नक देखें –
नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :

क्र.

स.

सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी आदेश/आपत्ति दिनांक आख्या देने वाले अधिकारी आख्या दिनांक आख्या स्थिति
1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 22-09-2020 आयुक्त -उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद 22-09-2020 प्रकरण आवास विकास परिषद् से सम्बंधित नहीं है| निस्तारित
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God Man
1 month ago

Matter is concerned with the deep rooted corruption in the Lucknow Development Authority which comes under the Ambit of Avas Vikas Parishad subordinate organisation of the Government of Uttar Pradesh and here role of the Commissioner of the department is quite mysterious as the matter is concerned with the multiple avases allotted to single individual. These avases were to be allotted to the scheduled caste and Scheduled Tribes but because of rampant corruption in the department, these houses were allotted to the rich people quite obvious from the post.

Bhoomika Singh
Bhoomika Singh
1 month ago

Think about the gravity of situation that Yogi government is procrastinating on this matter concerned with the deep rooted corruption since one year which is the mockery of the law of land and the reflection of rampant corruption in the public offices and also showing the lackadaisical approach of the Yogi government to curb the corruption in the government machinery. Think about the gravity of situation that government land which was to be allotted to weaker and downtrodden section was provided to the rich people and they had managed to purchase land five six plots directly from the Lucknow Development Authority by paying the bribe to its staff which is the reflection of the rampant corruption but government is not taking any action in the matter which is quite obvious from the post.

Arun Pratap Singh
1 month ago

प्रार्थी निम्न उक्त बिंदुओं को पुनः श्री मान के संज्ञान में लाना चाहता है | १- क्या बिपक्षी टाइटल बिबाद को निबंधन के समय तक सक्षम न्यायालय के माध्यम से हल कर चुके थे | २- सक्षम न्यायालय का विवरण उपलब्ध कराये | ३- सक्षम न्यायालय द्वारा पारित आदेश की प्रति उपलब्ध कराये | ४-श्री मान जी यदि मूल दस्तावेज प्रार्थी के पास है तो लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा निबंधन की कार्यवाही किस आधार पर सम्पादित की गयी | ५- प्रार्थी के उपरोक्त प्रत्यावेदन पर तत्कालीन संपत्ति अधिकारी के. के. सिंह द्वारा क्या निर्णय लिया गया उसकी प्रति उपलब्ध कराया जाय |

Preeti Singh
1 month ago

Anuradha Singh also named Guddi also named Aradhana Singh through her mother Beena Singh wife of Brijraj Singh also Beena Singh wife of Netrpal Singh. Whether in the same matter, to get remedy from various redressal bodies by changing the name is justified? Here most important thing is that who decided the title dispute? If the title dispute was not decided, how the registry of the land was made?