L.D.A. is neither providing information under R.T.I. nor redressing the representation by overlooking the direction of senior rank

संदर्भ संख्या : 40015719059911 , दिनांक – 12 Sep 2020 तक की स्थिति
आवेदनकर्ता का विवरण :
शिकायत संख्या:-
40015719059911
आवेदक का नाम-
Yogi M P Singh
विषय-
महोदय पुलिस से ज्यादा यह मामला लखनऊ विकास प्राधिकरण के भ्रस्टाचार से सम्बंधित है किस तरह से एक एक लोगो ने पांच पांच छह छह प्लाट लेकर सरकारी खजाने को लखनऊ विकास प्राधिकरण के कर्मचारिओं से साठ  गाठ करके चूना  लगाया है वह चौकाने वाला है और महत्वपूर्ण है की इतना बड़ा घोटाला सरकार  की एजेंसिआ पूर्ण रूप से असफल रही पकड़ने में | श्री मान जी मामले की जांच कराके  दोषिओं को दण्डित किया जाए और सरकारी धन की रिकवरी कराई जाय | सोचिये एक गरीब आदमी पांच प्लाट खरीद कर एक मकान बनाएगा जो की पूर्ण रूप से अबैध और अप्राकृतिक है किन्तु लखनऊ विकास प्राधिकरण में व्याप्त भ्रस्टाचार से ऐसा संभव हो रहा है | नई सरकार  की कथनी और करनी में  यदि थोड़ा भी सामंजस्य है तो प्राथी कार्यवाही की अपेक्षा करता है | महोदय प्रार्धना पत्र के साथ लखनऊ विकास प्राधिकरण के तीन इकरार नामा लगे है जो बाबू सिंह उसकी पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी और कनिष्क कुमार सिंह के है जिसको उपरोक्त प्राधिकरण के कर्मचारी शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी द्वारा सम्पादित किया गया है | जिसके अनुसार बाबू सिंह की उम्र ३० वर्ष पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी सिंह की उम्र २५ वर्ष तथा पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र १८ वर्ष है अर्थात गर्भ स्थापना के समय पिता की उम्र ११ वर्ष और माता की उम्र ६ वर्ष अर्थात शास्त्र और विज्ञानं दोनों के लिए असंभव है किन्तु लखनऊ पुलिस और विकास प्राधिकरण के लिए बाबू सिंह और  उनकी पत्नी आदर्श है और व्यक्ति आदर्श पुरुष में दोष नहीं देखता तभी तो पति , पत्नी , पुत्र, पत्नी की माँ और पत्नी के भाई के नाम एक झटके में पांच प्लाट लखनऊ विकास प्राधिकरण के कानपुर योजना के सेक्टर एच मुख्य मार्ग पर एस  एस  प्रकार के योजना के हथियाये | गरीब लोगो का हक़ एक ही परिवार को आबंटित किया गया जिसका मुखिया बाबू सिंह पुलिस के अनुसार सीधा साधा अंगूठा टीप लेकिन हस्ताक्षर हिंदी और आंग्ल भाषा में कर लेते थे | सोचिये जो व्यक्ति इतना शातिर है की सरकारी कर्मचारियों से हर गलत काम करवा सकता था उसको लखनऊ पुलिस जिसके कारनामो से हमेशा योगी सरकार की किरकिरी हुई सीधा साधा मानता है | श्री मान किसी भी आपराधिक कृत्य के लिए आपराधिक मन जिम्मेदार होता है इरादा महत्वपूर्ण होता है | किन्तु पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र बढ़ा कर बाबू सिंह,  और आराधना उर्फ गुड्डी सिंह तथा शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी ने कोई अपराध कारित नहीं किया क्योकि सरकारी महकमा ऊपर से नीचे तक भ्रस्ट है | श्री मान जी आप ही अपने पुलिस विभाग को देखे जितने आख्या बाबू सिंह की मृत्यु से सम्बंधित है वे खुद में असंगत है जो इन आख्याओं को संदेहास्पद बना देते है |
विभाग –
विकास प्राधिकरण
शिकायत श्रेणी –
नियोजित तारीख-
31-08-2020
शिकायत की स्थिति-
स्तर –
विकास प्राधिकरण
पद –
उपाध्यक्ष
प्राप्त रिमाइंडर-
प्राप्त फीडबैक –
दिनांक28-09-2019 को फीडबैक:- श्री मान जी आप द्वारा आख्या संख्या  २०६ /२०१९ जनसुनवाई पोर्टल उत्तर प्रदेश पर लगाया गया है जिसके अनुसार आपने सिर्फ भूखंड संख्या -एस एस- १९१४,  १९१५  और १९१६ सेक्टर एच , कानपुर रोड योजना के सम्बन्ध में मूल दस्तावेज तलब किये है किन्तु प्राथी द्वारा पांच प्लाट अपने नजदीकी रिश्तेदारो के नाम खरीद कर एक मकान बनाने की शिकायत की गयी है जैसा की पुलिस की रिपोर्ट से स्पस्ट है | अब प्रार्थी आराधना सिंह उर्फ गुड्डी की माँ श्री मती बीना  पत्नी श्री नेत्र पाल सिंह भूखंड संख्या -एस एस १९१७ और उनका भाई अजय कुमार पुत्र ब्रिज राज सिंह भूखण्ड संख्या – एस  एस  १९१८ सेक्टर एच का भी संज्ञान लीजिए इन दोनों लोगो से भी मूल दस्तावेज तलब  किये जाय क्यों की इन पांच प्लाटों  की एक मालकिन है जैसा की पुलिस की रिपोर्ट से स्पस्ट है | इस घोटाले को हम आगे और बेपर्दा करेंगे | सम्बंधित दस्तावेज संलग्न है | महोदय ब्यथा निवारण का सम्बन्ध जिस तरह से ब्यथा से मुक्ति होता है उसी तरह हर शिकायत का उद्देश्य होता है लक्ष्य हासिल करना और यदि लक्ष्य नहीं हासिल नहीं हुआ तो शिकायत का कोई मतलब नहीं रहा और पत्र लिखना और मूल प्रति मांगना उस दिशा में पहल मात्र है | अभी तो वे लोग मूल प्रति देने में ही आना कानी करेंगे |
फीडबैक की स्थिति –
सन्दर्भ पुनर्जीवित
संलग्नक देखें –
नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अग्रसारित विवरण :

क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी प्राप्त/आपत्ति दिनांक नियत दिनांक अधिकारी को प्रेषित आदेश स्थिति
1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 11-09-2019 26-09-2019 अधीक्षण अभियंतामण्डल -लखनऊ,उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद श्रेणीकरण पूर्व निक्षेपित
2 अंतरित अधीक्षण अभियंता (उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद ) 17-09-2019 26-09-2019 उपाध्यक्ष-लखनऊ,विकास प्राधिकरण कृपया प्रकरण में नियमानुसार कार्यवाही करने का कष्ट करें C-श्रेणीकरण
3 आख्या मंडलायुक्त( ) 24-08-2020 31-08-2020 उपाध्यक्ष-लखनऊ,विकास प्राधिकरण कृपया प्रकरण का गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 07 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है कार्यालय स्तर पर लंबित

It seems that government of Uttar Pradesh has thrown the R.T.I. Act 2005 in a dustbin.

12 September 2020

10:27

Subject

RE: It seems that government of Uttar Pradesh has thrown the R.T.I. Act 2005 in a dustbin.

From

Mahesh Pratap Singh Yogi M. P. Singh

To

sonagarvikasec2@gmail.com; awas8.sahari@gmail.com; sec.sic@up.nic.in; Sushil Kumar Singh; cmup; csup@up.nic.in; hgovup@up.nic.in; pmosb; supremecourt; presidentofindia@rb.nic.in; urgent-action

Sent

12 August 2020 14:24

श्री मान जी प्रार्थी को सूचनाए दिलवाई जाय इस समय प्रदेश में सिर्फ जंगल राज है कोई नियम कानून नही है | राज्य सूचना आयोग द्वारा अधिरोपित शास्तिओं की वसूली सिर्फ राज्य सरकार इसलिए नही करा रही है की जिससे जनसूचना अधिकारिओं में भय न ब्याप्त हो और वे इसी तरह से जनता को कोई सूचना  न दे और सरकार का भ्रष्टाचार जनता में न आये | इतनी ज्यादा आराजकता कभी नही थी | इस समय देश में संबैधानिक ब्यवस्था ही ख़त्म हो चुकी है | हर कोई कुछ को छोड़ कर जितना अपने पद का दुरपयोग कर पा रहा है कर रहा है | प्रदेश में कानून का शासन नही आराजकता का शासन है |

An application under subsection 3 of section 19 of the Right to Information Act 2005 as the information sought was not made available by the concerned public information officers.

To

                                      Chief Information Commissioner

                                      Government of Uttar Pradesh

                                                      U.P. Information Commission

                                                7/7A, RTI Bhawan,

                                           Vibhuti Khand, Gomti Nagar

                                               Lucknow, Uttar Pradesh

Prayer-No information is being made available in the government of Uttar Pradesh by the public information officers. Please curb this anarchy.

Following is the denial of sought information which is a violation of subsection 3 of section 6 of the Right to Information Act 2005.

RTI Online – Request Returned Back To Applicant.

RTI-Online via gov.in                   

10 Aug 2020, 17:12 (2 days ago)

Dear Sir/Madam,

This is concerning your request registered to vide Registration number DOHUP/R/2020/80043

Your Request has been disposed of by this office.

Please log on to https://rtionline.up.gov.in to check the final status of your request.

Registration Number

DOHUP/R/2020/80043

Name

Yogi M P Singh

Date of Filing

11/03/2020

Status

RTI REQUEST APPLICATION RETURNED TO APPLICANT as on 10/08/2020

Remarks:- The desired information can be given by the Lucknow Development Authority. Lucknow Development Authority is not connected to online portals. Therefore, your application form is being returned with the intention of getting the desired information by referring the application form to the concerned Development Authority.

  Nodal Officer Details  

Telephone Number

9454413311

Email-ID

awas8.sahari@gmail.com

State Public Information Officer concerned did not provide the proper intimation about the public authority to whom the matter was transferred. Cryptic dealings are not allowed under the transparency act. Sir, you have not physically transferred the matter under subsection 3 of section 6 of the Right to Information Act 2005 quite obvious from the available status which states as to where an application is made to a public authority requesting for an information-1-which is held by another public authority; or 2- the subject matter of which is more closely connected with the functions of another public authority, the public authority, to which such application is made, shall transfer the application or such part of it as may be appropriate to other public authority and inform the applicant immediately about such transfer: Whether concerned SPIO followed the aforementioned subsection 3 of section 6 of R.T.I. Act of 2005.

Sir concerned public authority has supervisory power over the L.D.A. and L.D.A. comes under the ambit of it and large scale irregularity which has been taken place can not be feasible without taking the supervisory body under good faith so they are acting in caucus to deprive the information seeker of sought information.

खुदा भी आसमाँ से जब जमी पे देखता होगा |

             इस मेरे प्यारे देश को क्या हुआ सोचता होगा||

This is a humble request of your applicant to you Honble Sir that how can it be justified to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness and chaos arbitrarily by making the mockery of law of land? There is need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray you, Honble Sir.

Date-12/08/2020           Yours sincerely

                              Yogi M. P. Singh, Mobile number-7379105911, Mohalla- Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001.

From: Mahesh Pratap Singh Yogi M. P. Singh

Sent: 04 August 2020 16:26

To: sonagarvikasec2@gmail.com; awas8.sahari@gmail.com; sec.sic@up.nic.in; Sushil Kumar Singh; cmup; csup@up.nic.in; hgovup@up.nic.in; pmosb; supremecourt; presidentofindia@rb.nic.in; urgent-action

Subject: It seems that government of Uttar Pradesh has thrown the R.T.I. Act 2005 in a dustbin.

An appeal under subsection 1 of section 19 of the Right to Information Act 2005.

सोचिये जिन जन सूचना अधिकारी को यही नही मालूम है की कितने दिन के भीतर जन सूचना प्रार्थना पत्रों का निस्तारण करना है वे सूचना क्या उपलब्ध करायेगे | खुद मुख्यमंत्री कार्यालय में ७ महीने में कार्यवाही होती है जन सूचना आवेदनों पर | क्या यह जन सूचना अधिकार २००५ का मखौल नही है | ऐसा प्रतीत होता है जनसूचना अधिकार २००५ को प्रदेश सरकार ने कचरे के ढेर में दाल दिया जो की लोक कार्यालयों की रहस्यमयी कार्यशैली से स्पष्ट है | यह सरकार तो जनसूचना अधिकार २००५ से कोसो दूर है क्यों की राज्य सरकार का कोई भी जन सूचना अधिकारी सूचनाएँ नही देता है और राज्य सूचना आयोग दन्त विहीन आयोग बन कर रह गया है |

Disposal of request. Provided that the transfer of an application according to this subsection shall be made as soon as practicable but in no case later than five days from the date of receipt of the application. 7. (1) Subject to the proviso to sub-section (2) of section 5 or the proviso to subsection (3) of section 6, the Central Public Information Officer or State Public Information Officer, as the case may be, on receipt of a request under section 6 shall, as expeditiously as possible, and in any case within thirty days of the receipt of the request, either provide the information on payment of such fee as may be prescribed or reject the request for any of the reasons specified in sections 8 and 9: Provided that where the information sought for concerns the life or liberty of a person, the same shall be provided within forty-eight hours of the receipt of the request.

महोदय प्रार्धना पत्र के साथ लखनऊ विकास प्राधिकरण के तीन इकरार नामा लगे है जो बाबू सिंह उसकी पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी और कनिष्क कुमार सिंह के है जिसको उपरोक्त प्राधिकरण के कर्मचारी शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी द्वारा सम्पादित किया गया है जिसके अनुसार बाबू सिंह की उम्र ३० वर्ष पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी सिंह की उम्र २५ वर्ष तथा पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र १८ वर्ष है अर्थात गर्भ स्थापना के समय पिता की उम्र ११ वर्ष और माता की उम्र ६ वर्ष अर्थात शास्त्र और विज्ञानं दोनों के लिए असंभव है किन्तु लखनऊ पुलिस और विकास प्राधिकरण के लिए बाबू सिंह और  उनकी पत्नी आदर्श है और व्यक्ति आदर्श पुरुष में दोष नहीं देखता तभी तो पति , पत्नी , पुत्र, पत्नी की माँ और पत्नी के भाई के नाम एक झटके में पांच प्लाट लखनऊ विकास प्राधिकरण के कानपुर योजना के सेक्टर एच मुख्य मार्ग पर एस  एस  प्रकार के योजना के हथियाये गरीब लोगो का हक़ एक ही परिवार को आबंटित किया गया जिसका मुखिया बाबू सिंह पुलिस के अनुसार सीधा साधा अंगूठा टीप लेकिन हस्ताक्षर हिंदी और आंग्ल भाषा में कर लेते थे सोचिये जो व्यक्ति इतना शातिर है की सरकारी कर्मचारियों से हर गलत काम करवा सकता था उसको लखनऊ पुलिस जिसके कारनामो से हमेशा योगी सरकार की किरकिरी हुई सीधा साधा मानता है श्री मान किसी भी आपराधिक कृत्य के लिए आपराधिक मन जिम्मेदार होता है इरादा महत्वपूर्ण होता है किन्तु पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र बढ़ा कर बाबू सिंहऔर आराधना उर्फ गुड्डी सिंह तथा शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी ने कोई अपराध कारित नहीं किया क्योकि सरकारी महकमा ऊपर से नीचे तक भ्रस्ट है श्री मान जी आप ही अपने पुलिस विभाग को देखे जितने आख्या बाबू सिंह की मृत्यु से सम्बंधित है वे खुद में असंगत है जो इन आख्याओं को संदेहास्पद बना देते है पुलिस की यही रहस्य्मयी शैली बहुत से सवालिया निशान पैदा करती है श्री मान जी इकरारनामा के दो पक्ष है बाबू सिंह और दिनेश प्रताप सिंह और मुख्तारनामा जो की उप निबंधक लखनऊ के समक्ष बाबू सिंह ने दिनेश प्रताप सिंह को दिया महत्वपूर्ण है की लगभग २० सालो से भी अधिक समय बीत गया और बाबू सिंह द्वारा कोई आपत्ति नहीं किया गया किन्तु लखनऊ पुलिस और आराधना उर्फ गुड्डी सिंह ने मकान और जमीन हथियाने के सिर्फ प्रार्थी ही नहीं प्रार्थी के समस्त परिवार पर संगीन आरोपों के गंभीर धाराओं में झूठा मुकदमा पंजीकृत किया गया  जो गंभीर अपराध की कोटि में आता है इसलिए एक वरिष्ठ ईमानदार अधिकारी के द्वारा या मामले को अन्य एजेंसी द्वारा और यदि संभव हो तो केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा जांच कराइ जाय जिससे इस गंभीर अपराध में शामिल पुलिस कर्मी बे नकाब हो प्रार्थी द्वारा पत्रकार पुरम गोमतीनगर में स्थित अपने आवास  संख्या बी -९९ जिसका रकबा २०० वर्ग मीटर में बने मकान को बेच कर बाबू सिंह को पैसा दिया था पैसा बाबू सिंह ने लिया जमीन और मकान बाबू सिंह ने दिया लेकिन उस मकान को पुलिस की मदद से कब्ज़ा आराधना उर्फ गुड्डी ने किया प्रार्थी जानना चाहता है की किस कैनन लॉ ने आराधना उर्फ गुड्डी को अधिकारिता प्रदान की है  आराधना उर्फ गुड्डी जा कर बाबू सिंह से अपने अधिकार की बात करे जिनको उन्होंने अपने  हक़ की जमीन बेचने का हक़ दिया था वैसे भी नियमानुसार एक ही प्लाट उनके नाम है और वह भी जब सक्षम न्यायालय का आदेश पारित होने पर|

Most revered Sir –Your applicant invites the kind attention of Hon’ble Sir with due respect to the following submissions as follows.

1-It is submitted before the Hon’ble Sir that  51A. Fundamental duties It shall be the duty of every citizen of India (a) to abide by the Constitution and respect its ideals and institutions, the National Flag and the National Anthem;(h) to develop the scientific temper, humanism and the spirit of inquiry and reform;

(i) to safeguard public property and to abjure violence;

(j) to strive towards excellence in all spheres of individual and collective activity so that the nation constantly rises to higher levels of endeavour and achievement.

2-It is to be submitted before the Hon’ble Sir that following is the status of the R.T.I. Communique submitted by the information seeker on the online portal of the government of Uttar Pradesh but unfortunately, this act has been put by the government Uttar Pradesh into the heap of garbage.

Registration Number

DOUDV/R/2019/60062

Name

Yogi M P Singh

Date of Filing

21/12/2019

Status

REQUEST TRANSFERRED TO OTHER PUBLIC AUTHORITY as on 11/03/2020

Details of Public Authority:- Housing and Urban Planning Department.

vide registration number:- DOHUP/R/2020/80043 respectively.

Note:- Further details will be available on viewing the status of the above-mentioned new request registration number.

  Nodal Officer Details  

Telephone Number

9454412522

Email-ID

sonagarvikasec2@gmail.com

Online RTI Request Form Details

Top of Form

Public Authority Details:-

* Public Authority

Urban Development Department

Personal Details of RTI Applicant:-

Registration Number

DOUDV/R/2019/60062

Date of Filing

21/12/2019

* Name

Yogi M P Singh

Gender

Male

* Address

Mohalla Surekapuram , Jabalpur Road, Sangmohal post office

Pincode

231001

Country

India

State

Uttar Pradesh

Status

Details not provided

Pincode

Literate

Above Graduate

Phone Number

Details not provided

Mobile Number

+91-7379105911

Email-ID

yogimpsingh[at]gmail[dot]com

Request Details:-

Citizenship

Indian

* Is the Applicant Below Poverty Line?

No

((Description of Information sought (up to 500 characters) )

* Description of Information Sought

PIO, L.D.A. Lucknow may provide information concerned with letter number-302 dated-24-10-2019 and letter number-206 dated-26-09-2019 attached to R.T.I. Communique. Point-wise as sought. 1-Provide detail of communications and its copies exchanged subsequently in the aforementioned reference. 2-Provide the legible copies of documents sought through aforementioned communications if not provided, then a detail of action taken by the department. 3-Provide the detail of staffs who processed the matter also provide their findings.

* Concerned PIO

Nodal Officer

Supporting document ((only pdf up to 1 MB))

The matter was forwarded/transferred by the Department of Urban Development to the Housing and Urban Planning Department of the government of Uttar Pradesh.

Bottom of Form

Registration Number

DOHUP/R/2020/80043

Name

Yogi M P Singh

Date of Filing

11/03/2020

Status

RTI REQUEST RECEIVED as on 11/03/2020

  Nodal Officer Details  

Telephone Number

9454413311

Email-ID

awas8.sahari@gmail.com

3-It is to be submitted before the Hon’ble Sir that following is the application submitted under subsection 1 of section 6 of the Right to Information Act 2005 concerned with the working of Lucknow Development Authority not know the provisions of Right to Information Act 2005 ipso facto and is now concerned with the senior rank staffs of the Department of Urban Development, Government of Uttar Pradesh.   

Online RTI Request Form Details

Top of Form

Public Authority Details:-

* Public Authority

Housing and Urban Planning Department

Personal Details of RTI Applicant:-

Registration Number

DOHUP/R/2020/80043

Date of Filing

11/03/2020

* Name

Yogi M P Singh

Gender

Male

* Address

Mohalla Surekapuram , Jabalpur Road, Sangmohal post office

Pincode

231001

Country

India

State

Uttar Pradesh

Status

Details not provided

Pincode

Literate

Above Graduate

Phone Number

Details not provided

Mobile Number

+91-7379105911

Email-ID

yogimpsingh[at]gmail[dot]com

Request Details:-

Citizenship

Indian

* Is the Applicant Below Poverty Line?

No

((Description of Information sought (up to 500 characters) )

* Description of Information Sought

PIO, L.D.A. Lucknow may provide information concerned with letter number-302 dated-24-10-2019 and letter number-206 dated-26-09-2019 attached to R.T.I. Communique. Point-wise as sought.

1-Provide detail of communications and its copies exchanged subsequently in the aforementioned reference. 2-Provide the legible copies of documents sought through aforementioned communications if not provided, then a detail of action taken by the department.

3-Provide the detail of staffs who processed the matter also provide their findings.

* Concerned PIO

Nodal Officer

Supporting document ((only pdf up to 1 MB))

4-It is to be submitted before the Hon’ble Sir that

Registration Number

DOUDV/A/2020/60012

Name

Yogi M P Singh

Date of Filing

02/02/2020

Status

FIRST APPEAL APPLICATION RETURNED TO APPLICANT as on 20/05/2020

Remarks:- your RTI refers to housing and urban planning department.

  Nodal Officer Details  

Telephone Number

9454412522

Email-ID

sonagarvikasec2@gmail.com

5-It is to be submitted before the Hon’ble Sir that

Online RTI Appeal Form Details

Top of Form

Public Authority Details:-

* Public Authority

Urban Development Department

Personal Details of Appellant:-

Request Registration Number

DOUDV/R/2019/60062

Request Registration Date

21/12/2019

* Name

Yogi M P Singh

Gender

Male

* Address

Mohalla Surekapuram , Jabalpur Road, Sangmohal post office

Pincode

231001

Country

India

State

Uttar Pradesh

Status

Details not provided

Pincode

Literate

Phone Number

Details not provided

Mobile Number

+91-7379105911

Email-ID

yogimpsingh[at]gmail[dot]com

Appeal Details:-

Citizenship

Indian

* Is the Applicant Below Poverty Line?

No

* Ground For Appeal

No Response Within the Time Limit

* PIO of Public Authority approached

Nodal Officer

PIO Order/Decision Number

Details not provided

* PIO Order/Decision Date

((Description of Information sought (up to 500 characters) )

* Prayer or Relief Sought

Think about the gravity of the situation that about two months passed but concerned State Public Information Officer did not provide the information sought by the information seeker while under subsection 1 of section 7 of Right to Information Act 2005 there is stipulated 30 days to provide information to the information seeker. But it seems that our public functionaries in the Government of Uttar Pradesh have been habitual to violate subsection 1 of section 7 of Right to Information act 2005 ipso facto obvious from the concerned matter. Because of corruption law of land is always taken under teeth by the correct public functionaries and our society remains a mute spectator of it because they are disparate before this lawlessness and Anarchy.

Supporting document ((only pdf upto 1 MB))

खुदा भी आसमाँ से जब जमी पे देखता होगा |

             इस मेरे प्यारे देश को क्या हुआ सोचता होगा||

This is a humble request of your applicant to you Honble Sir that how can it be justified to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness and chaos arbitrarily by making the mockery of law of land? There is need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray you, Honble Sir.

Date-04/08/2020           Yours sincerely

                              Yogi M. P. Singh, Mobile number-7379105911, Mohalla- Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001.

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Yogi
Admin
2 months ago

कृपया प्रकरण का गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 07 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है | 24-08-2020 मंडलायुक्त Think about the deep-rooted corruption in Lucknow Development Authority and near about one year passed but they are still only exchanging documents.
Why report was not made available to the commissioner Lucknow division as he had given only one week to submit report. Undoubtedly credibility of the government has reached to nadir so concerned accountable public functionaries may think about credibility of government instead of own pocket.

Arun Pratap Singh
2 months ago

यदि लखनऊ विकास प्राधिकरण इमानदार है तो वह सूचना देने से क्यों भाग रहा है और आवेदक को अपील करना पडा
PIO, L.D.A. Lucknow may provide information concerned with letter number-302 dated-24-10-2019 and letter number-206 dated-26-09-2019 attached to R.T.I. Communique. Point-wise as sought.

1-Provide detail of communications and its copies exchanged subsequently in the aforementioned reference.
2-Provide the legible copies of documents sought through aforementioned communications if not provided, then a detail of action taken by the department.

3-Provide the detail of staffs who processed the matter also provide their findings.

Preeti Singh
2 months ago

Where is the rule of law in the state of Uttar Pradesh undoubtedly there is substantial evidence of corruption but concerned are only procrastinating on the matter.
श्री मान जी प्रार्थी को सूचनाए दिलवाई जाय इस समय प्रदेश में सिर्फ जंगल राज है कोई नियम कानून नही है | राज्य सूचना आयोग द्वारा अधिरोपित शास्तिओं की वसूली सिर्फ राज्य सरकार इसलिए नही करा रही है की जिससे जनसूचना अधिकारिओं में भय न ब्याप्त हो और वे इसी तरह से जनता को कोई सूचना न दे और सरकार का भ्रष्टाचार जनता में न आये | इतनी ज्यादा आराजकता कभी नही थी | इस समय देश में संबैधानिक ब्यवस्था ही ख़त्म हो चुकी है | हर कोई कुछ को छोड़ कर जितना अपने पद का दुरपयोग कर पा रहा है कर रहा है | प्रदेश में कानून का शासन नही आराजकता का शासन है |

Bhoomika Singh
Bhoomika Singh
2 months ago

The matter is concerned with the serious irregularity being committed in the allocation of the avases under Lucknow Development Authority which was to be allocated to the the oppressed section was actually allocated to the rich people and this serious irregularity is being overlooked by the public functionaries in the state of Uttar Pradesh which is the reflection of rampant corruption in the government machinery. This cheap land was purchased by the rich people in the name of different persons by colluding with corrupt staff of the government