If what is going on is justice, then what is injustice? Applicant is being deprived from making shelter in its land.

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
If what is going on is justice ? then what is injustice? Applicant is being deprived from making shelter in its own land.
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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 29 April 2017 at 17:11
To: pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, supremecourt <supremecourt@nic.in>, cmup <cmup@up.nic.in>, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, “csup@up.nic.in” <csup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in

Judicial independence is the concept that the judiciary needs to be kept away from the other branches of government. That is, courts should not be subject to improper influence from the other branches of government, or from private or partisan interests. Judicial Independence is vital and important to the idea of separation of powers.
With great respect to revered Sir, your applicant invites the kind attention of the Hon’ble Sir to the following submissions as follows.
1-It is submitted before the Hon’ble Sir that Complaint No: 40019917000500 दिनांक-२२-०३-२०१७ APPLICANT DETAILS : Name : Jayprakash Dubey    Father Name : Aditya Narayan Dubey under point 7 your applicant affirmed as – श्री मान जी को ज्ञात हो की श्री मान जी प्रार्थी को आप की पुलिश चार बार उठाई और हर बार एक एक हजार ले कर छोड़ी जब की एक बार भी प्रार्थी को न तो स्टे का कागजात दिखाया गया और नही कोई नोटीस तामील कराई गई यदि कोई अन्यथा आदेश हो तो प्रार्थी पूरी निष्ठा से उसका पालन करेगा लेकिन अभी सिर्फ दबंगई देखने को मिल रही है |
श्री मान जी नोटिस का मतलब सूचना और आदेश यदि आदेश पास हुआ है तो उसका कंप्लायंस होना चाहिए नोटिस जारी होना और केस लिस्ट होना का थाना अध्यक्ष द्वारा कदापि यह मतलब नही निकाला जाना चाहिए कि निर्माण कार्य स्थगन का आदेश हुआ है | प्रस्तुत प्रस्नोत्तरी से स्पस्ट है की १३/०४/२०१७ तक कोई निर्माण कार्य स्थगन आदेश पास नही हुआ था और अब अगली तारीख ०१/०५/२०१४ को है | अर्थात थानाध्यक्ष और उनके हमराहिओं की अब तक की कार्यवाही पुलिसिया आतंक का मात्र पर्याय बना तथा न्याय ब्यवस्था की धज्जिया उड़ाकर रख दिया गया |
यदि उपजिलाधिकारी महोदय द्वारा कोई आदेश पास किया गया है तो उसे वेबसाइट पर अपलोड क्यों नही कर देते |
 2-It is submitted before the Hon’ble Sir that भारत सरकार द्वारा जन सूचना अधिकार २००५ लाया गया जिससे की लोक कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़े और लोक पदाधिकारिओं के कार्यों में जिम्मेदारी तय हो सके किन्तु ऐसा प्रतीत होता है की आज भी हम उसी आंग्ल ब्यवस्था में जी रहे है जो गुलामी के पूर्व की थी |
3-It is submitted before the Hon’ble Sir that उपजिलाधिकारी न्यायलय एक quasi जुडिशल कोर्ट है और न्यायलय का कार्य और उसका संपादन independence of judiciary के प्रावधानों से संरक्षित है उपजिलाधिकारी महोदय सबजुडिस matter में कैसे administrative आदेश पास कर सकते है | क्या बिधि द्वारा स्थापित मानको का पालन किया गया |
-It is submitted before the Hon’ble Sir that जैसा की  थाना प्रभारी विन्ध्याचल के रिपोर्ट से स्पस्ट है की उपजिलाधिकारी महोदय के कोर्ट में अगली सुनवाई ०१-०५-२०१७ को है और बीच में कोई सुनवाई नही हुई फिर उनके पास ऐसा कौन सा आदेश है जिसके आधार पर प्रार्थी का घर पुनः रोका गया लेकिन इस बार उठाया नही गया इस लिए प्रार्थी का  रूपया १००० .०० बच गया लेकीन मटेरियल सब ख़राब हो गये | श्री मान जी प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत संलग्नको का अवलोकन करे और वस्तुस्थित  से अवगत हो | श्री मान जी बटवारा हुए २५ वर्षो से ज्यादा हो गये सभी लोगो ने अपने हिस्से की आधे से ज्यादा जमीने बेच डाली फिर भी फाट बंदी नही हुई थी तो बेचे कैसे और प्रार्थी की स्थित है की अपने ही जमीन में घर बनाने के लिए पुलिस ने चार बार उठाया | भविष्य के लिए क्या नजीर हम पेश कर रहे है | पहले सरपत था तो यह जमीन मिली और अब सरकार ने रोड बना दी तो २५ वर्ष बाद पट्टीदार उसे भी ले लेना चाहते है |क्या यही इमानदारी है | भ्रष्टाचार के केश में समय निश्चित है की इतना समय बीतने के बाद भ्रस्ताचार का मुक़दमा नही शुरू हो सकता क्योकि भ्रष्टाचार में फसने वाला प्रभावी होता है लेकीन साधारण आदमी को कोई न्याय नही |
5 –श्री मान जी को ज्ञात हो की प्रार्थी के पिता के कुछ बोलने पर कहने लगे बूढ़े चुप हो जा नही तो जिन्दगी भर जेल की चक्की का आटा खाओगे उसके बाद पांच मिनट तक भद्दी भद्दी गालिया बके फिर बिपक्षी को अपनी मोटर सायकिल पर बैठा कर घर छोड़े क्या श्री मान जी यह पुलिश का अत्याचार नही है |
६–श्री मान जी को ज्ञात हो की श्री मान जी दैनिक जागरण के २८-सितम्बर -२०१६ का अंक देखे जो वाराणसी से प्रकाशित है प्रार्थी का मकान पानी से गिर गया है पेपर कटिंग संलग्न है क्रपया अवलोकन करे यदि कोई अन्यथा घटना होगी तो उसके लिए पुलिश जिम्मेदार होगी |
७- श्री मान जी को ज्ञात हो की श्री मान जी प्रार्थी को आप की पुलिश चार बार उठाई और हर बार एक एक हजार ले कर छोड़ी जब की एक बार भी प्रार्थी को न तो स्टे का कागजात दिखाया गया और नही कोई नोटीस तामील कराई गई यदि कोई अन्यथा आदेश हो तो प्रार्थी पूरी निष्ठा से उसका पालन करेगा लेकिन अभी सिर्फ दबंगई देखने को मिल रही है |

                                                        प्रार्थी
तारीख -२९/०४/२०१७                    जयप्रकाश दुबे पुत्र आदित्य नारायण दुबे चल भाष -९५५९४२६२५५ ग्राम व पोस्ट नीबी गहरवार पुलिश थाना विन्ध्याचल डिस्ट्रिक्ट मिर्ज़ापुर उत्तर प्रदेश 

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Documents of Jayprakash Dubey.pdf
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2 comments on If what is going on is justice, then what is injustice? Applicant is being deprived from making shelter in its land.

  1. उपजिलाधिकारी न्यायलय एक quasi जुडिशल कोर्ट है और न्यायलय का कार्य और उसका संपादन independence of judiciary के प्रावधानों से संरक्षित है उपजिलाधिकारी महोदय सबजुडिस matter में कैसे administrative आदेश पास कर सकते है | क्या बिधि द्वारा स्थापित मानको का पालन किया गया |
    ४-It is submitted before the Hon’ble Sir that जैसा की थाना प्रभारी विन्ध्याचल के रिपोर्ट से स्पस्ट है की उपजिलाधिकारी महोदय के कोर्ट में अगली सुनवाई ०१-०५-२०१७ को है और बीच में कोई सुनवाई नही हुई फिर उनके पास ऐसा कौन सा आदेश है जिसके आधार पर प्रार्थी का घर पुनः रोका गया लेकिन इस बार उठाया नही गया इस लिए प्रार्थी का रूपया १००० .०० बच गया लेकीन मटेरियल सब ख़राब हो गये | श्री मान जी प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत संलग्नको का अवलोकन करे और वस्तुस्थित से अवगत हो | श्री मान जी बटवारा हुए २५ वर्षो से ज्यादा हो गये सभी लोगो ने अपने हिस्से की आधे से ज्यादा जमीने बेच डाली फिर भी फाट बंदी नही हुई थी तो बेचे कैसे और प्रार्थी की स्थित है की अपने ही जमीन में घर बनाने के लिए पुलिस ने चार बार उठाया | भविष्य के लिए क्या नजीर हम पेश कर रहे है | पहले सरपत था तो यह जमीन मिली और अब सरकार ने रोड बना दी तो २५ वर्ष बाद पट्टीदार उसे भी ले लेना चाहते है |क्या यही इमानदारी है | भ्रष्टाचार के केश में समय निश्चित है की इतना समय बीतने के बाद भ्रस्ताचार का मुक़दमा नही शुरू हो सकता क्योकि भ्रष्टाचार में फसने वाला प्रभावी होता है लेकीन साधारण आदमी को कोई न्याय नही |

  2. श्री मान जी नोटिस का मतलब सूचना और आदेश यदि आदेश पास हुआ है तो उसका कंप्लायंस होना चाहिए नोटिस जारी होना और केस लिस्ट होना का थाना अध्यक्ष द्वारा कदापि यह मतलब नही निकाला जाना चाहिए कि निर्माण कार्य स्थगन का आदेश हुआ है | प्रस्तुत प्रस्नोत्तरी से स्पस्ट है की १३/०४/२०१७ तक कोई निर्माण कार्य स्थगन आदेश पास नही हुआ था और अब अगली तारीख ०१/०५/२०१४ को है | अर्थात थानाध्यक्ष और उनके हमराहिओं की अब तक की कार्यवाही पुलिसिया आतंक का मात्र पर्याय बना तथा न्याय ब्यवस्था की धज्जिया उड़ाकर रख दिया गया |
    यदि उपजिलाधिकारी महोदय द्वारा कोई आदेश पास किया गया है तो उसे वेबसाइट पर अपलोड क्यों नही कर देते |

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