If there is no corruption, then why Modi Govt is adopting lackadaisical approach to R.T.I. Act



Here this question arises that if such dilapidated website will be used to invite the online applications under Right to Information Act 2005, then whether the august act will achieve its goal ever? Undoubtedly, the matter is concerned with the deep rooted corruption in the government Machinery.
THE RIGHT TO INFORMATION ACT, 2005 No. 22 of 2005
[15th June, 2005.] An Act to provide for setting out the practical regime of right to information for citizens to secure access to information under the control of public authorities, in order to promote transparency and accountability in the working of every public authority, the constitution of a Central Information Commission and State Information Commissions and for matters connected therewith or incidental thereto.

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
OTP For Feedback
1 message
persmininfotech@nic.in <persmininfotech@nic.in> 29 April 2019 at 01:20

To: yogimpsingh@gmail.com


Your OTP For Feedback Is : 84853

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
During the submission of R.T.I. Communique such error messages are quite common which create hindrance in the conclusion of the process.
1 message
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 29 April 2019 at 01:16

To: “rticall-dopt@nic.in” <rticall-dopt@nic.in>, pmosb <pmosb@pmo.nic.in>


Following payment has been made by me through internet banking.
29 Apr 2019
TO TRANSFER-INB RTI Online Payment
MOSJER2019000 0000471IK0AANR KW1 TRANS
10.00
Following is the error message displayed on the screen of the computer.


Forbidden

You have a form submission error or you do not have permission to access this resource .
Please click here to go to homepage
If you believe you have received this page in error, please contact the administrator.
Following information was sought from the aforementioned public authority.
1-Provide the feedback in regard to measures taken by the central government to curb irregularities in the disbursement of scholarship to the students to ensure proper utilization of the central fund.
2-Hard copy of the online submitted application for a scholarship and subsequent correction as attached. Please make available reason of not accepting Scheduled tribe as corrected by the aggrieved student.
3-Provide the provisions which empower staffs of the social welfare department to change the filled entries of the aggrieved scheduled tribe student Kajal.
This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that how can it be justified to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness and chaos in an arbitrary manner by making the mockery of law of land? This is the need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer in order to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.                                                         
                                                                                                Yours sincerely
Date-29-04-2019                                            Yogi M. P. Singh, Mobile number-7379105911, Mohalla- Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001
Sent from Mail for Windows 10
आवेदन
का विवरण
शिकायत
संख्या
60000190041001
आवेदक कर्ता का
नाम:
Yogi M P Singh
आवेदक कर्ता का
मोबाइल न०:
7379105911,
विषय:
An application under article 51 A of the
constitution of India in order to be instrumental in providing justice to
weaker and downtrodden section. Matter is concerned with the deep rooted
irregularities in the disbursement of scholarships to students.If director
social welfare Lucknow and social welfare officer at district level are whole
sole authority, then there is open gate of tyranny, arbitrariness and
corruption.
श्री मान जी समाज कल्याण अधिकारी मिर्ज़ापुर पहले छात्रा का
नाम या
संबोधन बंद करे क्योकि यदि कोई जालसाजी प्रार्थी के आवेदन से जुड़ा है तो
प्रार्थी दंड भुगतने के
लिए तैयार है छात्रा को इन
सभी बातो से दूर रखा जाय और हमारी बात हमारे परंपरा के
अनुरूप है
प्रार्थी ने भारतीय संबिधान के अनुच्छेद ५१ अ के अंतर्गत स्वतः प्रत्यावेदन
प्रस्तुत किया है जोकि प्रार्थी का मूल कर्तव्य है प्रार्थी समाज कल्याण अधिकारी
की इस बात से सहमत है की कॉलेज इन्हें वह प्रति उपलब्ध कराई जिसमे प्रार्थी
द्वारा अनुसूचित जाति भरा है किन्तु वह संशोधन के पहले का है श्री मान जी प्रार्थी
द्वारा दिनांक २२
/१२/२०१८ को संशोधन किया गया है जो
की संलग्नको से स्पष्ट है और उसमे प्रार्थी द्वारा अनुसूचित जनजाति भरा गया है
श्री मान जी २२
/१२/२०१८ के पश्चात जब प्रार्थी
द्वारा डाटा शुद्ध करके लॉक कर दिया गया तो उसे अनुसूचित जनजाति से अनुसूचित
जाति किसने बनाया यह उन्ही लोगो की साजिश है जो प्रार्थी को छात्रवृत्ति से
वंचित करना चाहते है यह हेराफेरी जालसाजी की कोटि में आता है जिसका उद्देश्य एक
दलित वर्ग की कन्या को उसके अधिकार से वंचित करने हेतु किया गया कुचक्र है जो की
किसी भी तरह से क्षम्य नही है श्री मान जी क्या प्रार्थी द्वारा संशोधित लॉक्ड
डाटा को क्या समाज कल्याण अधिकारी मिर्ज़ापुर और निदेशक समाज कल्याण पुनः संशोधित
कर सकते है या उसे उसी अवस्था में बने रहना चाहिए श्री मान जी क्या प्रार्थी के
लॉक्ड डाटा को सुरक्षित रखना सरकार का काम नही है श्री मान जी डाटा संशोधन करने
के उपरांत कन्या ने हार्ड कॉपी कॉलेज में जमा करने का प्रयास किया किन्तु
महाविद्यालय में सारे काम काज थप थे छात्रसंघ हड़ताल पर था जो की पूर्व के
ग्रिएवांस में स्पस्ट है ऐसी दशा में प्रार्थी द्वारा शुद्ध की गई हार्ड कॉपी
समाज कल्याण अधिकारी मिर्ज़ापुर को उपलब्ध कराइ थी जिसकी प्रति तुरंत समाज कल्याण
अधिकारी द्वारा कॉलेज और निदेशक को भेजी गई किन्तु बाद में इन लोगो के मन में
पाप आ गया और इन लोगो ने लॉक्ड अकाउंट को खोल कर अनुसूचित जन जाति पुनः अनुसूचित
जाति बना दिया जो की गंभीर और अक्षम्य अपराध है जिसके लिए मामले में प्रथम सूचना
रिपोर्ट दर्ज होनी ही चाहिए श्री मान जी इस रिपोर्ट को भी गौर से देखे और पूर्व
रिपोर्ट और इस रिपोर्ट में क्या अंतर है अर्थात मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट
दाखिल होना ही चाहिए चाहे वह निदेशक ही क्यों न हो
नियत तिथि:
12 – May – 2019
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
दिनांक 23/04/2019को फीडबैक:- श्री मान जी
जिला समाज कल्याण अधिकारीमिर्ज़ापुर,समाज कल्याखण बार बार एक
ही बात को दुहरा रहे है
और आप
उसे इस
तरह ले
रहे है
जैसे वही मुख्यमंत्री मुख्य सचिव , प्रमुख सचिव हो गये है | श्री मान जी समाज कल्याण अधिकारी और निदेशक समाज कल्याण की की
गयी है
और यह
सच है
की उनका प्रस्तुत किया गया रिपोर्ट तर्क संगत नही है
किन्तु आप
लोग आख
मूद कर
स्वीकार किये जिससे भ्रस्टाचार को बल
मिल रहा है | श्री मान जी यह
तो प्रार्थी द्वारा भी
स्वीकार किया गया की
छात्रा द्वारा अनुसूचित जाति भरा गया है किन्तु उसको संशोधित किया गया है नियमानुसार जब राज्य सरकार द्वारा संशोधन वास्ते वेबसाइट खोली गयी संशोधन के पश्चात सुधारवास्ते समाज कल्याण अधिकारी राज्य सरकार के
समस्त जिम्मेदार अधिकारिओं के
यह भेजी गई| तो उसमे कॉलेज को शामिल करने की
आवश्यकता कैसे हो गयी | कॉलेज को भी
कॉपी समाज कल्याण अधिकारी के माध्यम से भेजी गयी जिसका
प्रमाण है
| ठीक है आप
स्वीकार कर
रहे है
किन्तु यही सब बाते जनसूचना अधिकार के तहत प्राइम मिनिस्टर कार्यालय के
समक्ष अवसर आने पर
जनसूचना अधिकार के तहत रखा जाएगा | देखता हु वह
क्या करते है |
फीडबैक की स्थिति:
फीडबैक
विचाराधीन
आवेदन
का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ
का प्रकार
आदेश
देने वाले अधिकारी
आदेश
दिनांक
अधिकारी
को प्रेषित
आदेश
आख्या
दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या
रिपोर्ट
1
अंतरित
लोक शिकायत अनुभाग – 1(मुख्यमंत्री कार्यालय )
12 – Apr – 2019
जिलाधिकारीमिर्ज़ापुर,
कृपया
शीघ्र नियमानुसार कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा की गई है।
22/04/2019
निस्तारित
2
आख्या
जिलाधिकारी ( )
12 – Apr – 2019
जिला समाज कल्याण अधिकारीमिर्ज़ापुर,समाज कल्‍याण विभाग
नियमनुसार
आवश्यक कार्यवाही करें
18/04/2019
Letter No 76 Date 18-04-2019 DSWO Mirzapur
…………………………………………
………………………………………..
………………………………………..
निस्तारित


0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
3 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Yogi
1 year ago

1-Provide the feedback in regard to measures taken by the central government to curb irregularities in the disbursement of scholarship to the students to ensure proper utilization of the central fund.
2-Hard copy of the online submitted application for a scholarship and subsequent correction as attached. Please make available reason of not accepting Scheduled tribe as corrected by the aggrieved student.
3-Provide the provisions which empower staffs of the social welfare department to change the filled entries of the aggrieved scheduled tribe student Kajal.

Preeti Singh
1 year ago

फीडबैक : दिनांक 23/04/2019को फीडबैक:- श्री मान जी जिला समाज कल्याण अधिकारी-मिर्ज़ापुर,समाज कल्याखण बार बार एक ही बात को दुहरा रहे है और आप उसे इस तरह ले रहे है जैसे वही मुख्यमंत्री मुख्य सचिव , प्रमुख सचिव हो गये है | श्री मान जी समाज कल्याण अधिकारी और निदेशक समाज कल्याण की की गयी है और यह सच है की उनका प्रस्तुत किया गया रिपोर्ट तर्क संगत नही है किन्तु आप लोग आख मूद कर स्वीकार किये जिससे भ्रस्टाचार को बल मिल रहा है | श्री मान जी यह तो प्रार्थी द्वारा भी स्वीकार किया गया की छात्रा द्वारा अनुसूचित जाति भरा गया है किन्तु उसको संशोधित किया गया है नियमानुसार जब राज्य सरकार द्वारा संशोधन वास्ते वेबसाइट खोली गयी संशोधन के पश्चात सुधारवास्ते समाज कल्याण अधिकारी व राज्य सरकार के समस्त जिम्मेदार अधिकारिओं के यह भेजी गई| तो उसमे कॉलेज को शामिल करने की आवश्यकता कैसे हो गयी | कॉलेज को भी कॉपी समाज कल्याण अधिकारी के माध्यम से भेजी गयी जिसका प्रमाण है | ठीक है आप स्वीकार कर रहे है किन्तु यही सब बाते जनसूचना अधिकार के तहत प्राइम मिनिस्टर कार्यालय के समक्ष अवसर आने पर जनसूचना अधिकार के तहत रखा जाएगा | देखता हु वह क्या करते है |
फीडबैक की स्थिति: मंडलायुक्त द्वारा दिनाक 02/05/2019 को फीडबैक पर कार्यवाही अनुमोदित कर दी गयी है

Beerbhadra Singh
1 year ago

Why not action is initiated against social welfare officer and director department of social welfare Lucknow under the SC ST act which is required in accordance with the law because they hatched conspiracy to deprive schedule tribe girl from her scholarship which is quite obvious from their cryptic dealings and in the interest of justice such dealings must be not supported.Undoubtedly there is no Social Justice in the Government of Uttar Pradesh and no action is being taken against the Evil doers consequently corruption is rampant in the departments of government of Uttar Pradesh.