How much surprising is that both government and apex court are claiming not to deprive needy from subsidy

View Details ( as on 28 Mar 2018 )
Grievance Concerns To
Registration Number
MPANG/E/2018/01075
Name Of Complainant
Yogi M. P. Singh
Date of Receipt
14 Mar 2018
Received By Ministry/Department
Ministry of Petroleum and Natural Gas
Grievance Description
Please take a glance at attachment and application. Yours sincerely Arun Pratap Singh Village and post-Neebi Gaharwar District-Mirzapur Uttar Pradesh Pin code 231303 Mob-7607966615
Current Status
CASE CLOSED
Officer Concerns To
Officer Name
Officer Designation
Contact Address
MoPNG Shastri Bhawan
Contact Number
Email Address
Date of Action
28 Mar 2018
Details
Addressed.
Attachment

श्री मान जी भारत सरकार
ने प्रार्थी की सब्सिडी क्यों रोक दी जब की प्रार्थी का बैंक अकाउंट पहले से ही
आधार कार्ड से जुडा था एलपीजी से इस लिए नही जुड़ पाया क्यों की विंध्यवासिनी गैस सर्विस
भारत गंज इलाहाबाद ने इसे एलपीजी से जोड़ा ही नही |
अब जब भारत सरकार ने
सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्वीकार कर लिया की उसका उद्देश्य लोगो को उनके अधिकार
से वंचित करना नही वल्कि भ्रष्टाचार रोकना है तो श्री मान जी भारत सरकार प्रार्थी
के पाच महीने की सब्सिडी प्रार्थी के खाते में स्थानांतरित कर दे जो न्याय हित में
होगा |
श्री मान जी
आधार कार्ड के आधार पर किसी की सब्सिडी रोकना ३१-मार्च-२०१८ तक रोकना इल्लीगल है
तो प्रार्थी की सब्सिडी रोकने का आधार भी इललीगल है क्यों की प्रार्थी की सब्सिडी
आधार कार्ड के आधार पर ही रोकी गयी है |
                                                               प्रार्थी
                                                        
अरुण प्रताप सिंह
                           आवेदक कर्ता का मोबाइल न०: 7607966615,0    
आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या 15199170373012
आवेदक कर्ता का नाम: अरूण प्रताप सिंह
विषय: ईमेल पत्र का अवलाेकन कर कार्यवाही करने के संबंध
में।
नियत तिथि:  25 – Oct – 2017
शिकायत की स्थिति:   निस्तारित
रिमाइंडर :    
फीडबैक :     दिनांक 16/10/2017को फीडबैक:- विषय –क्या सरकार इतनी अच्छी
तनख्वाह सिर्फ इसलिए देती है की ऑफिस में बैठे बैठे एक नोट लिख कर ब्यथा का निवारण
कर दिया
| श्री मान जी भारत
सरकार के परिपत्र जो की पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय द्वारा दिनांक
३०-सितम्बर-२०१६ को अपने डिप्टी सेक्रेटरी के.एम्. महेश के द्वारा जारी किया गया
के प्रावधान २.१ में ब्यवस्था दी गयी है की गैस सब्सिडी के लाभार्थिओं को
सुबिधापूर्ण और रुकावट मुक्त एल. पी. जी. सब्सिडी मुहैया कराने के लिए गैस
कम्पनियां अपने अधिनस्थो के माध्यम से सभी आवश्यक ब्य्वस्था करेगी जिसमे शामिल है
मीडिया द्वारा व्यापक प्रचार प्रसार और व्यक्तिगत नोटिस डीलरो के माध्यम से
आवेदकों / लाभार्थियों को जानकारी उपलब्ध कराना की यदि आधार नही उपलब्ध होगा तो
सब्सिडी रुक जायेगी
| और उन्हें यह भी बताया जाय की यदि उन्हें ३०-सितम्बर -२०१६
तक एनरोलमेंट नंबर हासिल कर लेना चाहिए अन्यथा उनका सब्सिडी बाधित हो सकती है
| किन्तु इन सब से अलग
विन्धेश्वरी गैस सर्विस के स्टाफ और गैस कंपनी के स्टाफ इस षडयंत्र में ब्यस्त रहे
की किस प्रकार पब्लिक में आक्रोश पैदा किया जाय की सरकार अपने रिफार्म से पीछे हट
जाय और लूट खसोट वाली पुरानी व्यवस्था लागू कराया जाय जिससे उनकी जेबे भरती रहे
| क्या अरुण प्रताप सिंह को
व्यक्तिगत नोटिस सर्व की गयी है यदि नही तो क्यों
? क्या अभी तक सम्बंधित स्टाफ ने यह जानने का
प्रयास किया की अरुण प्रताप सिंह के कथन में कितनी सच्चाई है की उन्होंने समस्त
दस्तावेज जमा किया था यदि जमा किया था तो विन्धेश्वरी गैस एजेंसी के खामियों का
हर्जाना वह क्यों भुक्ते
| यदि इतनी निष्ठा और स्वामिभक्ति सरकार के प्रति रहती तो आज
भारत विकाश के चरमोत्कर्ष पर होता
| 1-It is submitted
before the Hon’ble Sir that to withhold subsidy and to deprive of subsidy both
are different things. Hon’ble Sir subsidy was provided to your applicant not
because he was Aadhaar card holder but he is entitled to the subsidy. To
provide subsidy is not the prerogative of Vindheshwari Gas Service and
concerned staffs of Indian Oil Corporation so it is the obligation of Indian
Oil Corporation and Vindheshwari Gas Service to deprive any beneficiary of his
rights, he must be given proper opportunities to be heard by pursuing
democratic setup norms. 2-It is submitted before the Hon’ble Sir that according
to the aforementioned gas agency, aadhaar card was not made available by your
applicant so your applicant was not provided with the subsidy. Here this
question arises that when the Aadhaar card is available to your applicant since
more than two and half years and his bank account is linked with Aadhaar
number, then why will he procrastinate in linking the Aadhaar card with the gas
connection? Think about who beneficiaries are and who are losers if my Aadhaar
card not linked with the gas connection? Sir actual fact is that your applicant
had already provided the all required documents to the concerned Gas agency and
your applicant was provided subsidy before the mentioned date in report but not
linked with connection and during this period black rate gas cylinders were
provided and when complaint was made on telephone and written, then they linked
the connection with Aadhaar. Actually, this is a part black marketing of gas
cylinders and poor consumers belonging to the rural area are being looted by
such agencies by taking staffs of Indian Oil Corporation in good faith.
फीडबैक की स्थिति:   फीडबैक निस्तारित
आवेदन का संलग्नक  
संलग्नक देखें
 अग्रसारित विवरण-
क्र.स.  सन्दर्भ का प्रकार      आदेश देने वाले अधिकारी     आदेश
दिनांक  अधिकारी को प्रेषित    आदेश      आख्या
दिनांक आख्या स्थिति आख्या रिपोर्ट
1              अंतरित श्री
शुभ्रान्त कुमार शुक्ल(विशेष सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय )   
22 – May – 2017  अपर मुख्य सचिव/प्रमुख
सचिव/सचिव -खाद्य एवं रसद विभाग    पृष्ठांकित    
16/10/2017         अनुमोदित    निस्तारित     
2              अंतरित अपर
मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव (खाद्य एवं रसद विभाग )     
26 – Sep – 2017   आयुक्त -खाद्य  नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें    16/10/2017         अनुमोदित    निस्तारित    
3              अंतरित आयुक्त
(खाद्य)     
27 –
Sep – 2017  
जिला पूर्ति अधिकारी-इलाहाबाद,खाद्य एवं रसद विभाग  कृपया जॉंचोपरान्त आवश्‍यक कार्यवाही करने का कष्ट करें     16/10/2017         श्री अमित कुमार पूर्ति निरीक्षक द्वारा उक्त शिकायती सन्दर्भ का निस्तारण कर
दिया गया है शिकायत निस्तारित करने की कृपा करें     
C-श्रेणीकरण  

4              आख्या आयुक्त
(खाद्य )    
18 – Nov – 2017  जिला पूर्ति अधिकारी-इलाहाबाद,खाद्य
एवं रसद विभाग  कृपया प्रकरण का गंभीरता से
पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए
15 दिवस
में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है अनुमोदित  
06/12/2017         श्री
अमित कुमार चौधरी पूर्ति निरीक्षक द्वारा उक्त शिकायती सन्दर्भ का निस्तारण कर
दिया गया है शिकायत निस्तारित करने की कृपा करें निस्तारित

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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

श्री मान जी भारत सरकार ने प्रार्थी की सब्सिडी क्यों रोक दी जब की प्रार्थी का बैंक अकाउंट पहले से ही आधार कार्ड से जुडा था एलपीजी से इस लिए नही जुड़ पाया क्यों की विंध्यवासिनी गैस सर्विस भारत गंज इलाहाबाद ने इसे एलपीजी से जोड़ा ही नही |
अब जब भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्वीकार कर लिया की उसका उद्देश्य लोगो को उनके अधिकार से वंचित करना नही वल्कि भ्रष्टाचार रोकना है तो श्री मान जी भारत सरकार प्रार्थी के पाच महीने की सब्सिडी प्रार्थी के खाते में स्थानांतरित कर दे जो न्याय हित में होगा |
श्री मान जी आधार कार्ड के आधार पर किसी की सब्सिडी रोकना ३१-मार्च-२०१८ तक रोकना इल्लीगल है तो प्रार्थी की सब्सिडी रोकने का आधार भी इललीगल है क्यों की प्रार्थी की सब्सिडी आधार कार्ड के आधार पर ही रोकी गयी है |
प्रार्थी
अरुण प्रताप सिंह
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०: 7607966615,0

Preeti Singh
2 years ago

किन्तु इन सब से अलग विन्धेश्वरी गैस सर्विस के स्टाफ और गैस कंपनी के स्टाफ इस षडयंत्र में ब्यस्त रहे की किस प्रकार पब्लिक में आक्रोश पैदा किया जाय की सरकार अपने रिफार्म से पीछे हट जाय और लूट खसोट वाली पुरानी व्यवस्था लागू कराया जाय जिससे उनकी जेबे भरती रहे | क्या अरुण प्रताप सिंह को व्यक्तिगत नोटिस सर्व की गयी है यदि नही तो क्यों ? क्या अभी तक सम्बंधित स्टाफ ने यह जानने का प्रयास किया की अरुण प्रताप सिंह के कथन में कितनी सच्चाई है की उन्होंने समस्त दस्तावेज जमा किया था यदि जमा किया था तो विन्धेश्वरी गैस एजेंसी के खामियों का हर्जाना वह क्यों भुक्ते | यदि इतनी निष्ठा और स्वामिभक्ति सरकार के प्रति रहती तो आज भारत विकाश के चरमोत्कर्ष पर होता |

Beerbhadra Singh
Beerbhadra Singh
10 months ago

Think about the gravity of situation that subsidy has been withheld by the concerned staff of the government especially Indian Oil Corporation Limited but it is unfortunate that there is rampant corruption in the department of Government of India that they are not taking seriously about the matter and not making efforts to refund the subsidy into the account of the aggrieved Arun Pratap Singh which is illegal and showing arbitrariness of the concerned staff.