Diary No.19831/SCI/PIL(E)/2018 processing matter concerned with change of books every year in private

Diary No. 19831/SCI/PIL(E)/2018
Application Date 22-04-2018
Received On 28-04-2018
Applicant Name MAHESH PRATAP SINGH YOGI M P SINGH
Address MOHALLA SUREKAPURAM JABALPUR ROAD DISTRICT MIRZAPUR
State UTTAR PRADESH
Action Taken UNDER PROCESS

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
Today book sellar, Anil Book store sells books of Saint BBL School denied to sell me books because I denied to take three books out of thirteen as my Son and daughter already have.
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 22 April 2018 at 10:51
To: pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, supremecourt <supremecourt@nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, cmup <cmup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, csup@up.nic.in, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, lokayukta@hotmail.com

विषय–श्री मान जी बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा मीडिया को बुला कर एन. सी. ई. आर. टी. की पुस्तकों की कमी का रोना क्यों रोया जा रहा है क्योकि सभी जानते है की वह एक जटिल प्रक्रम है वह हमेशा लगभग जुलाई तक होता है| सरकार का ध्यान सही मुद्दों से भटकाने का अच्छा तरीका है|
श्री मान जी प्रार्थी आप का ध्यान निम्न विन्दुओं पर आकृष्ट करता है |
१-श्री मान जी सरकार एन. सी. ई. आर. टी. की पुस्तकों को चला सकती है किन्तु प्राइवेट अंग्रेजी माध्यम के स्कूल नही चला सकते है | क्यों की ये विद्यालय गुड़वत्ता से समझौता नही करते| मै अपनी बच्ची को एक प्रश्न का आंसर बता दिया था मेरी बच्ची दूसरे दिन कहती है आपने जो आंसर बताया उसे क्लास टीचर ने गलत कर दिया यह सुन कर मै आश्चर्यचकित रह गया | किसी ढंग से रात बीती दूसरे दिन ही पहुचे स्कूल और मैडम से पूछा कैसे आंसर गलत है तो प्रधानाध्यापिका महोदया जवाब देती है की आंसर गलत नही है इसलिए काटा गया है की बच्ची ने वह नही लिखा है जो टीचर ने बताया| हमने कहा मैडम जिस शिक्षक / शिक्षिका को यह नही मालूम की विद्यार्थी सही आंसर लिखा है की गलत वह पढाता कैसे होगा|
२-श्री मान जी नये शुल्क नियमन में राज्य सरकार ने कहा है की हर वर्ष प्रवेश शुल्क नही लिया जाएगा किन्तु मैडम ने इस वर्ष भी प्रवेश शुल्क लिया है किन्तु मैंने इस बात का विरोध नही किया और इस वजह से हमारे ऊपर १००० रुपये अतिरिक्त बोझ पड़ा | इस समय मेरा परिवार भुखमरी के कगार पर है किन्तु मै चुप रहा क्यों की बच्चो को वही पढना है क्यों की आवास से नजदीक है दूर जायेगे तो सुरक्षा की भी चिंता होगी और पैदल चले जाते है तो रिक्शे का भाडा बच जाता है|
३-श्री मान जी मै तीन वर्षो से मांग कर रहा हु की हर वर्ष किताबे न बदली जाय क्यों अनावश्यक रूप से मुझे अपने लड़के की किताब खरीदनी पड़ती है किन्तु कौन सुने | बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आराजकता का राज है कुछ भी लिख कर शिकायत का निस्तारण करा लेते है | इस बार तो हद ही हो गयी विद्यालय में भी किताब का सेट न लेने पर सम्बंधित बुक सेलर का नाम बताया गया और वह भी सेट न लेने पर किताब बेचने से मना कर दिया एक बहाना बना कर | क्या यह मोनोपोली नही है | यह भ्रष्टाचार नही बल्कि भ्रस्टाचार का राज है और निरीह जनता इसमें पिस रही है | इसका असर २०१९ के चुनाव में दिखाई देगा जब एक तरफ से पार्टी का सफाया हो जाएगा | खुले आम भ्रस्टाचार को प्रश्रय दिया जा रहा है और भ्रष्टाचारियो के खिलाफ कार्यवाही नही हो रही है |
                        कार्यवाही करने का आप के पास समय ही नही है |
This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that It can never be justified to overlook the rights of the citizenry by delivering services in an arbitrary manner by floating all set up norms. This is sheer mismanagement which is encouraging wrongdoers to reap the benefit of loopholes in the system and depriving poor citizens of the right to justice. Therefore it is need of the hour to take concrete steps in order to curb grown anarchy in the system. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.
                                             Yours sincerely
                                    Yogi M. P. Singh Mobile number-7379105911
Mohalla-Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, India.

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
Today book sellar, Anil Book store sells books of Saint BBL School denied to sell me books because I denied to take three books out of thirteen as my Son and daughter already have.
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 19 April 2018 at 22:28
To: pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, supremecourt <supremecourt@nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, cmup <cmup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, csup@up.nic.in, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, lokayukta@hotmail.com

With due respect, your applicant wants to draw the kind attention of the Hon’ble Sir to the following submissions as follows.
1-It is submitted before the Hon’ble Sir that Anil Bookstore is located in front of Arykanya Girls inter college Mirzapur as Saint BBL School denied to sell books to those who were not purchasing the entire set so book list was made available by the school staffs in order to purchase books and name of the bookseller. Hon’ble Sir, please take a glance at the attached document to this representation. 
  2-It is submitted before the Hon’ble Sir that today aforementioned bookseller also denied providing the books when I said to pick out three books already available to my daughter and Son sell only ten books. The pretext made by bookseller is that after 30-May-2018, a new consignment of books from Delhi will available, then books will be sold separately i.e. not in a set. When I reached the home made a call to the headmistress cum founder of Saint BBL School at 08:01 PM lasted 1 minute 31 seconds, she suggested to buy from somewhere else. She assured to make available the name of writers of the books as well. First, she herself pressurized my daughter to buy books and attached bookseller now denied to sell in the name of a set of books and now telling me the name of the writer. Why set of books are being sold in the institution instead of making available the syllabus and name of prescribed books and its writers. When I asked to allow N.C.E.R.T. books, then she replied you are alone. Why will she allow N.C.E.R.T. books because no commission will be made available to the concern? 
3-It is submitted before the Hon’ble Sir that if Hon’ble Sir may think about the role of state machinery, then it always remains failed before the tyranny of its subordinates at the district level. In the following grievance, B.S.A. Mirzapur attached the same report which was already submitted in the earlier grievance in order to get it disposed of. What is the loss of management and concerned public staffs if books of my daughter are read by my son? Whether to impose books on children for the commission is not causing additional burden on the guardians? 
आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
40019918008572
आवेदक कर्ता का नाम:
योगी एम पी सिंह
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
7379105911,7379105911
विषय:
मै शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रस्टाचार से बहुत ब्यथित हूँ जिसमे अधिकारी और प्रबंध तंत्र मिल कर गरीब अभिभावकों का शोषण कर रहा है |श्री मान जी कमीशन मिलता है प्रति छात्र वह बहुत छोटी रकम किताब की मूल्य की तुलना में |चुकी नगर क्षेत्र में बहुत से विद्यालय है इसलिए प्रति विद्यालय १०००० रुपये भी मिला तो सोचिये पूरे नगर से कितनी काली कमाई हो रही है | मेरी प्रिसिपल से कोई दुश्मनी नही है और सारे नर्सिंग स्कूलों के प्रबंध तंत्र और प्रधानाचार्यों से भी कोई दुश्मनी नही है किन्तु अभिभावकों का इतने बड़े स्तर पर शोषण मुझे बर्दास्त नही है | श्री मान जी पत्रांक ३३७ दिनांक १२०४२०१८ जो की जिलाधिकारी मिर्ज़ापुर को संबोधित है पूर्ण रूप से मनगढ़ंत और भ्रामक है और ऐसे रिपोर्टो पर पूर्ण रूप से अंकुश लगना चाहिए | श्री मान जी यदि इस वर्ष ही ऐसा हुआ है तो श्री मान जी पिछले चार वर्षो से प्रार्थी क्यों प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर रहा है इस सन्दर्भ में और नगर शिक्षा अधिकारी इसी तरह गोल मटोल जवाब दे रहे है | श्री मान जी नगर शिक्षा हमें बताए की कक्षा सात में कितनी पुस्तके चलती है | इस वर्ष सम्बंधित प्रबंध तंत्र ने कितनी पुस्तके बदली है उनके नाम क्या है उनके लेखक का नाम क्या है |और कितनी पुरानी पुस्तके चल रही है उनका भी डिटेल उपलब्ध कराये |पुराना पाठ्यक्रम नया पाठ्यक्रम दोनों उपलब्ध कराये और यदि पाठ्यक्रम में कोई परिवर्तन नही हुआ है तो टेक्स्ट बुक बदलने का कोई प्रश्न ही नही उठता | पिछले पांच वर्षो से कोई ऐसा वर्ष नही है एक दो किताबे छोड़ कर पूरी किताबे बदली गई हो |एक का देखी देखा सभी कर रहे है और इस तरह बड़े स्तर पर अभिभावकों का शोषण सिर्फ शिक्षा विभाग में व्याप्त बहुत बड़े स्तर पर भ्रस्टाचार की वजह से संभव है |श्री मान जी क्या अभिभावकों पर पड़ने वाले अनावश्यक अबैध बोझ को कम नही किया जा सकता है | सभी जानते है किताबो में चालीस परसेंट से भी ज्यादा कमीशन संभव है जो की आराम से सम्बंधित को पहुच जाता है |इसलिए नगर शिक्षा अधिकारी की रहस्यमयी शैली कुछ ज्यादा चौकाने वाली नही है |उनसे ऐसा अपेक्षित था |सोचिये ऐसे ब्यथा निवारण का कोई मतलब है की भ्रस्टाचार एक परसेंट भी कण्ट्रोल नही हो रहा है |श्री मान राष्ट्रीय शिक्षा परिषद् की किताबे क्यों नही चलाते वह तो बहुत सस्ती है किन्तु उसमे कमीशन नही है |श्री मान जी बेसिक शिक्षा अधिकारी का पत्र जो की जिलाधिकारी को संबोधित है पत्र के साथ संलग्न है |
नियत तिथि:
27 – Apr – 2018
शिकायत की स्थिति:
निस्तारित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
दिनांक 18/04/2018को फीडबैक:- श्री मान जी जब अधीनस्थ कारनामे दिखाते है तो बेसिक शिक्षा अधिकारी विभाग प्रमुख है वह इतना कारनामा तो दिखा ही सकते है श्री मान प्रतीत होता है महोदय ने चश्मा नही लगाया था इसलिए संशोधित आवेदन उनको दिखाई नही दिया और प्रस्तुत प्रकरण को पूर्व की रिपोर्ट के आधार पर निस्तारित करा दिए | पुस्तकों को बदलने में पर्याप्त काली कमाई है |माननीय उच्चतम न्यायलय ने यदि इस जनहित मुद्दे पर कोई आदेश दे दिया तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा Diary No.17501/SCI/PIL(E)/2018, Application Date-04-04-2018 Received On-18-04-2018,Applicant Name-MAHESH PRATAP SINGH YOGI M P SINGH Address MOHALL SUREKAPURAM JABALPUR ROAD DIST MIRZAPUR,State UTTAR PRADESH Action Taken-UNDER PROCESS शिकायत संख्या-15199170325584 अंतरित श्री जिन्नूरैन अहमद खां(संयुक्त सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय ) 25 – Apr – 2017 अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव माध्य मिक शिक्षा विभाग पृष्ठांकित 13/11/2017 अनुमोदित जिससे यह स्पस्ट है की यह संघर्ष इस वर्ष का नही बल्कि पूर्व के वर्षो से हो रहा है इसलिए बेसिक शिक्षा अधिकारी का पूर्व का रिपोर्ट भ्रामक और भ्रस्टाचार को बढ़ानेवाला है | Whether the matter is concerned with the regulation of fee or change of books even when curriculum remains same? Whether they think that applicant is stupid and layman can’t understand their cunning tricks? Subject-Curriculum REMAINS unchanged but books are changed every year by the management of private schools and colleges whether such unlawful practice is justified. With great respect to revered Sir, your applicant invites the kind attention of the Hon’ble Sir to the following submissions as follows. 1-It is submitted before the Hon’ble Sir that my daughter reads in sixth class and son reads in fifth class but Son can’t use the textbooks of his elder sister because management of Kindergarten changed the book current year. Such unjustified practice caused the extra burden of Rs.4000.00and government is not providing any reprieve by providing scholarship or any other kind of help. 2-It is submitted before the Hon’ble Sir that why the government is not making N.C.E.R.T. books compulsory in these C.B.S.E. BOARD schools. When the N.C.E.R.T. books are AVAILABLE at accessible prices, then why the government is allowing this corrupt and unethical practice to promote in our society. Whether such unlawful practice lacks public spirit is not reflecting insensitivity of public staffs towards miseries of common citizenry. We are seeking justice but not available in this largest democracy in the world. 3-It is submitted before the Hon’ble Sir that our public servants are drawing a huge salary for serving us but whether they are not failed if the citizenry is being robbed in the daylight. What logistic approach can be explained by NOT allowing N.C.E.R.T. BOOKS by the management of private schools and colleges? Whether the book stalls and clothes stall opened in the temple of learning is justified and reasoned approach. Whether incompetency does not reflect in our public functionaries to deliver us justice? Undoubtedly Right to justice is an indispensable part of sound judicial and administrative system but not possible from such people who have shut their eyes and ears forever.
फीडबैक की स्थिति:
फीडबैक विचाराधीन
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
12 – Apr – 2018
जिलाधिकारीमिर्ज़ापुर,
18/04/2018
आख्‍या अपलोड है
निस्तारित
2
आख्या
जिलाधिकारी ( )
13 – Apr – 2018
बेसिक शिक्षा अधिकारीमिर्ज़ापुर,बेसिक शिक्षा विभाग
नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें आख्‍या अपलोड है
18/04/2018
पत्रांक: बेसिक /337/२०१८१९ दिनांक 2-०४२०१८ द्वारा निस्तारित (आख्या संलग्न है)
निस्तारित
This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that It can never be justified to overlook the rights of the citizenry by delivering services in an arbitrary manner by floating all set up norms. This is sheer mismanagement which is encouraging wrongdoers to reap the benefit of loopholes in the system and depriving poor citizens of the right to justice. Therefore it is need of the hour to take concrete steps in order to curb grown anarchy in the system. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.
                                             Yours sincerely
                                    Yogi M. P. Singh Mobile number-7379105911
Mohalla-Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, India.

0 0 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
2 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

श्री मान जी सरकार एन. सी. ई. आर. टी. की पुस्तकों को चला सकती है किन्तु प्राइवेट अंग्रेजी माध्यम के स्कूल नही चला सकते है | क्यों की ये विद्यालय गुड़वत्ता से समझौता नही करते| मै अपनी बच्ची को एक प्रश्न का आंसर बता दिया था मेरी बच्ची दूसरे दिन कहती है आपने जो आंसर बताया उसे क्लास टीचर ने गलत कर दिया यह सुन कर मै आश्चर्यचकित रह गया | किसी ढंग से रात बीती दूसरे दिन ही पहुचे स्कूल और मैडम से पूछा कैसे आंसर गलत है तो प्रधानाध्यापिका महोदया जवाब देती है की आंसर गलत नही है इसलिए काटा गया है की बच्ची ने वह नही लिखा है जो टीचर ने बताया| हमने कहा मैडम जिस शिक्षक / शिक्षिका को यह नही मालूम की विद्यार्थी सही आंसर लिखा है की गलत वह पढाता कैसे होगा|

Preeti Singh
2 years ago

Now local district officer of primary education apprised the district magistrate Mirzapur that school management has been directed to teach N.C.E.R.T. Books and show cause notice was issued to management that why books are being sold in lists instead individually/separately? Why did the concerned not check the authenticity of the report submitted by the junior subordinates?