Correction in name of aggrieved student could not be made in 9 years is not reflection of sheer insolence

  Apex court of India may entertain this grievance.

Diary No.
Year
/SCI/PIL(E)/ 

Diary
No.
24038/SCI/PIL(E)/2019
Application
Date
30-04-2019
Received
On
21-05-2019
Applicant
Name
YOGI
MP SINGH
Address
MOHALLA
SUREKAPURAM JABALPUR ROAD MIRZAPUR
State
UTTAR
PRADESH
Action
Taken
UNDER
PROCESS

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
Correction in the name of the aggrieved student could not be made in 9 years is not reflection of sheer insolence and tyranny.
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 30 April 2019 at 13:39

To: pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, supremecourt <supremecourt@nic.in>, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, cmup <cmup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, csup@up.nic.in, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, lokayukta@hotmail.com


Now from the procrastination on the part of registrar of Shahu Ji Maharaj University Kanpur, it has been obvious that matter is serious and there is substance in the matter. There are two types of evidence 1-Direct evidences 2-Circumstantial evidences, undoubtedly circumstantial evidences are signalling that every thing is not OK. 

With due respect, your applicant wants to draw the kind attention of the Hon’ble Sir to the following submissions as follows.


1-It is submitted before the Hon’ble Sir that here most important thing is that when the entire formalities were completed one year earlier quite obvious from the attached receipts provided by the university to college administration, then why registrar of the Kanpur University is running away from providing the report again as earlier report was submitted by him without taking the perusal of the contents of the submitted grievance so it may be termed as the arbitrary report.

2-It is submitted before the Hon’ble Sir that following grievance was submitted by the aggrieved applicant but this grievance was managed to get disposed by the registrar of the university by submitting inconsistent bogus report.
आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
40019919014084
आवेदक कर्ता का नाम:
Santosh Kumar Maurya
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9454367980,9454367980
विषय:
सेवा में श्री मान कुलपति छत्रपति शाहू जी महराज विश्वविद्यालय कानपुर विषय –प्रार्थी का अंकपत्र में नाम सुधरवाने हेतु | महोदय, प्रार्थी श्री मान जी का ध्यान निम्न विन्दुओं पर आकृष्ट करता है | प्रार्थी स्वर्गीय कृपा शंकर तिवारी महाविद्यालय नहवाई मेजा इलाहाबाद का २००९ से २०११ तक छात्र रहा | जो आप के विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था | प्रार्थी का २००९ के अंक पत्र जो विश्वविद्यालय द्वारा घोषित किया गया उसमे SANTOSH KUMAR MAURYA के स्थान पर SANTOSH KUMAS MAURYA जारी हुआ सोचिए R के स्थान पर S की प्रविष्टि की गई जो आप के विश्वविद्यालय के स्तर से की गई | प्रार्थी द्वारा शुद्ध कराने वास्ते १००० रुपये कॉलेज प्रशासन को जो शिक्षक माध्यम से सन २०१० में ही दिया गया | किन्तु २०१० और २०११ में भी वही त्रुटी बनी रही | और आज तक वह शुद्ध हो कर प्रार्थी को नही मिली | श्री मान जी यदि समय बद्ध तरीके से कार्यवाही होता तो २०१० और २०११ में जारी अंकपत्र में अशुद्धी होती | श्री मान जी २०१० में ही जमा १००० रुपये और अब जा कर १४ जून २०१८ को विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्ति रशीद उपलब्ध कराई गई जो की संलग्नको से स्पस्ट है | श्री मान जी २०१० से २०१९ तक अर्थात लगभग वर्षो से प्रार्थी मानसिक शारीरिक उसके साथ आर्थिक छति झेल रहा है और अभी तक उसको शुद्ध अंक पत्र उपलब्ध नही कराया गया | गलती विश्वविद्यालय की और प्रताड़ना छात्र को क्या यही सुशासन है | क्या छात्र का भविष्य अंधकारमय नही किया गया | श्री मान जी सविनय अनुरोध है की प्रार्थी को उसके अंकपत्र के साथ छति पूर्ति भी उपलब्ध कराई जाय | प्रार्थी दिनांक ०७०३२०१९ संतोष कुमार मौर्या पुत्र दशानंद मौर्या ग्राम और पोष्ट –नकहरा जिला मिर्ज़ापुर पिनकोड २३१००१
नियत तिथि:
22 – Mar – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
प्राप्त अनुस्मारक
क्र..
अनुस्मारक
प्राप्त दिनांक
1
नियत तिथि– 22 – Mar – 2019 , शिकायत की स्थितिलम्बित महोदय आप द्वारा निस्तारण का जो तिथि तय किया गया है जैसा कि स्पस्ट है २२ मार्च २०१९ है और आज २३ मार्च २०१९ है अर्थात नियत तिथि का मतलब सरकारी विभाग को अपनी आख्या उस तिथि के पश्चात ही देनी है | क्या यही सुशासन है जिसमे मुख्य मंत्री कार्यालय द्वारा तय समय सीमा का भी ख्याल भी अधीनस्थो द्वारा नही किया जा रहा है | कोई भी शिकायत गई फाइल कर दिए | क्या सरकार घर बैठने की तनख्वाह देती है | इतने वर्षो से टाल मटोल और गजब तो तब हो गया की एक वर्ष से फॉर्मेलिटी पूरा है फिर भी कुमास को कुमार नही बनाना चाहते है | साप जहरीला नहो तब भी फूक फूक कर अपना साख बनाये रखता है किन्तु मुख्य मंत्री कार्यालय का स्तर क्या है वही जाने |
23 Mar 2019
फीडबैक :
दिनांक 30/03/2019को फीडबैक:- A report carrying the sign of registrar of Kanpur university is attached to the grievance on this august portal of the government of Uttar Pradesh and taking the recourse of which concerned accountable public functionaries of the government of Uttar Pradesh considered the submitted grievance of the aggrieved applicant disposed without taking the perusal of the report and points of the submitted grievance. Honourable Sir where is the relevancy between the contents of the grievance and reports submitted by the erring staffs of the Kanpur University. Sir it is unfortunate that Registrar of the aforementioned University instead of taking more than the stipulated time, neither took the perusal of the contents of the grievance nor took the perusal of the pages of the attached PDF documents. I know well that most of the staffs of the Kanpur University are not well versed in the international language so it would be appropriate to describe the lacunae in the redressal of the grievance in the mother tongue Hindi. श्री मान जी प्रार्थी द्वारा रजिस्ट्रार महोदय से यह नही पूछा गया है की वे प्रार्थी को प्रोसेस से अवगत कराये की अंक पत्र सुधारने का क्या फीस है या क्या जमा होना चाहिए बल्कि उन्हें संलग्नक के तीन चौथे पेज को पढ़ कर जान लेना चाहिए था की यह एक वर्ष पूर्व प्रार्थी की ओर से सम्बंधित कॉलेज द्वारा शुल्क रशीद है | परीक्षा वर्ष २००९ , २०१० २०११ का अंक पत्र सुधार वास्ते जमा की गई शुल्क की रशीद संलग्न है | श्री मान क्या कानपूर विश्वविद्यालय अंक पत्र सुधारने के लिए बार बार शुल्क की मांग करता है क्या और बार बार दस्तावेजो की मांग करता है | श्री मान जी रजिस्ट्रार से पूछा जाय की मोदी और योगी के सुशासन में भी वह वर्ष भर में अंक पत्र में सुधार क्यों नही कर पाए | उन्होंने तय समय में जनसुनवाई पोर्टल पर आख्या क्यों नही प्रतुत की | उन्होंने शिकायत को बिना पढ़े और बिना संलग्नको का अवलोकन किये आधारहीन असंगत आख्या क्यों प्रस्तुत की | श्री मान जी रजिस्ट्रार की जवाबदेही निश्चित हो | मामले की जांच कराई जाय जितने भी दोषी हो उनके खिलाफ कार्यवाही हो | सोचिये जिस पोर्टल की बारीकी से निगरानी मुख्य मंत्री कार्यालय करता है उसको रजिस्ट्रार कानपूर विश्वविद्यालय कितना तवज्जोह देता है आख्या से स्पष्ट है श्री मन पोष्ट से व्यक्ति की गरिमा बढ़ते देखा किन्तु व्यक्ति से पोष्ट की गरिमा घटते अब अक्सर देख रहा हूँ |
फीडबैक की स्थिति:
सन्दर्भ पुनर्जीवित
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
07 – Mar – 2019
रजिस्ट्रार छत्रपति शाहूजी महाराज विश्विद्यालय, कानपुर
27/03/2019
regarding the complaint resolved letter copy is attached kindly find it.
C-श्रेणीकरण
2
आख्या
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव( उच्‍च शिक्षा विभाग)
15 – Apr – 2019
रजिस्ट्रार छत्रपति शाहूजी महाराज विश्विद्यालय, कानपुर
कृपया प्रकरण का गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 15 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है
अनमार्क
 3-It is submitted before the Hon’ble Sir that following complaint was submitted by the applicant itself under article 51 A of the constitution of India but its fixed to dispose the grievance is about to reach but it seems that such procedures in the mind of registrar is useless so he does  not think seriously about the directions of the Jansunwai portal.
आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
60000190036504
आवेदक कर्ता का नाम:
Yogi M P Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
7379105911,
विषय:
Correction in the name of the aggrieved student could not be made in 9 years is not reflection of sheer insolence and tyranny.An application under article 51 A of the constitution of the India. Undoubtedly to error is human but how those errors are compoundable which is made by public functionaries deliberately in order to promote corruption in the system? Think about the serious outcome of such dereliction of duty by the concerned staff in order to pressurise the student for the bribe. Every one knows that there are two types of evidences in regard to allegations made against an individual i.e. direct evidences and circumstantial evidences since we are overlooking the circumstantial evidences so growing corruption in the government machinery is on its climax. With due respect, your applicant wants to draw the kind attention of the Hon’ble Sir to the following submissions as follows. 1-It is submitted before the Hon’ble Sir that following complaint was submitted by the aggrieved student on the august portal of the government of Uttar Pradesh.2-It is submitted before the Hon’ble Sir that every one knows about the credibility of this Kanpur Shahu Ji Maharaj University famous for liberal approaches to the menace of copy and allowing mass scale copy in its affiliated colleges. Even today, several students who are failed in the other universities are seeking shelter in this university to pass the exam. University is flooded with affiliated colleges which are mushrooming in each district of the province so in order to reduce its burden, state government established Allahabad state university. Whether recognition to colleges is provided without illegal gratification? 3-It is submitted before the Hon’ble Sir that undoubtedly staffs of the universities makes errors in the certificates in order to charge illegal gratification from the students in the name of correction but such a procrastination and planned set up to charge illegal gratification from students are exemplary and surprising. Since nine years, a student is being physically and mentally tortured without any reasonable cause? Hon’ble Sir may be pleased to take a glance of the attached documents with this representation. This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that how can it be justified to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness and chaos in an arbitrary manner by making the mockery of law of land? This is the need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer in order to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir. Yours sincerely Date-11-03-2019 Yogi M. P. Singh, Mobile number-7379105911, Mohalla- Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001
नियत तिथि:
03 – May – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
लोक शिकायत अनुभाग – 1(मुख्यमंत्री कार्यालय )
03 – Apr – 2019
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव उच्‍च शिक्षा विभाग
कृपया शीघ्र नियमानुसार कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा की गई है।
अधीनस्थ को प्रेषित
2
अंतरित
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव (उच्‍च शिक्षा विभाग )
03 – Apr – 2019
रजिस्ट्रार छत्रपति शाहूजी महाराज विश्विद्यालय, कानपुर
नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें
अनमार्क

This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that how can it be justified to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness and chaos in an arbitrary manner by making the mockery of law of land? This is the need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer in order to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.                                                         
                                                                                                Yours sincerely
Date-30-04-2019                                            Yogi M. P. Singh, Mobile number-7379105911, Mohalla- Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001.

On Mon, 11 Mar 2019 at 12:02, Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> wrote:
An application under article 51 A of the constitution of the India.
Undoubtedly to error is human but how those errors are compoundable which is made by public functionaries deliberately in order to promote corruption in the system? Think about the serious outcome of such dereliction of duty by the concerned staff in order to pressurise the student for the bribe. Every one knows that there are two types of evidences in regard to allegations made against an individual i.e. direct evidences and circumstantial evidences since we are overlooking the circumstantial evidences so growing corruption in the government machinery is on its climax.

With due respect, your applicant wants to draw the kind attention of the Hon’ble Sir to the following submissions as follows.


1-It is submitted before the Hon’ble Sir that following complaint was submitted by the aggrieved student on the august portal of the government of Uttar Pradesh.

आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
40019919014084
आवेदक कर्ता का नाम:
Santosh Kumar Maurya
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9454367980,9454367980
विषय:
सेवा में श्री मान कुलपति छत्रपति शाहू जी महराज विश्वविद्यालय कानपुर विषय –प्रार्थी का अंकपत्र में नाम सुधरवाने हेतु | महोदय, प्रार्थी श्री मान जी का ध्यान निम्न विन्दुओं पर आकृष्ट करता है | प्रार्थी स्वर्गीय कृपा शंकर तिवारी महाविद्यालय नहवाई मेजा इलाहाबाद का २००९ से २०११ तक छात्र रहा | जो आप के विश्वविद्यालय से सम्बद्ध था | प्रार्थी का २००९ के अंक पत्र जो विश्वविद्यालय द्वारा घोषित किया गया उसमे SANTOSH KUMAR MAURYA के स्थान पर SANTOSH KUMAS MAURYA जारी हुआ सोचिए R के स्थान पर S की प्रविष्टि की गई जो आप के विश्वविद्यालय के स्तर से की गई | प्रार्थी द्वारा शुद्ध कराने वास्ते १००० रुपये कॉलेज प्रशासन को जो शिक्षक माध्यम से सन २०१० में ही दिया गया | किन्तु २०१० और २०११ में भी वही त्रुटी बनी रही | और आज तक वह शुद्ध हो कर प्रार्थी को नही मिली | श्री मान जी यदि समय बद्ध तरीके से कार्यवाही होता तो २०१० और २०११ में जारी अंकपत्र में अशुद्धी होती | श्री मान जी २०१० में ही जमा १००० रुपये और अब जा कर १४ जून २०१८ को विश्वविद्यालय द्वारा प्राप्ति रशीद उपलब्ध कराई गई जो की संलग्नको से स्पस्ट है | श्री मान जी २०१० से २०१९ तक अर्थात लगभग वर्षो से प्रार्थी मानसिक शारीरिक उसके साथ आर्थिक छति झेल रहा है और अभी तक उसको शुद्ध अंक पत्र उपलब्ध नही कराया गया | गलती विश्वविद्यालय की और प्रताड़ना छात्र को क्या यही सुशासन है | क्या छात्र का भविष्य अंधकारमय नही किया गया | श्री मान जी सविनय अनुरोध है की प्रार्थी को उसके अंकपत्र के साथ छति पूर्ति भी उपलब्ध कराई जाय | प्रार्थी दिनांक ०७०३२०१९ संतोष कुमार मौर्या पुत्र दशानंद मौर्या ग्राम और पोष्ट –नकहरा जिला मिर्ज़ापुर पिनकोड २३१००१
नियत तिथि:
22 – Mar – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:
आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
07 – Mar – 2019
रजिस्ट्रार छत्रपति शाहूजी महाराज विश्विद्यालय, कानपुर
कार्यालय स्तर पर लंबित

2-It is submitted before the Hon’ble Sir that every one knows about the credibility of this Kanpur Shahu Ji Maharaj University famous for liberal approaches to the menace of copy and allowing mass scale copy in its affiliated colleges. Even today, several students who are failed in the other universities are seeking shelter in this university to pass the exam. University is flooded with affiliated colleges which are mushrooming in each district of the province so in order to reduce its burden, state government established Allahabad state university. Whether recognition to colleges is provided without illegal gratification? 

3-It is submitted before the Hon’ble Sir that undoubtedly staffs of the universities makes errors in the certificates in order to charge illegal gratification from the students in the name of correction but such a procrastination and planned set up to charge illegal gratification from students are exemplary and surprising. Since nine years, a student is being physically and mentally tortured without any reasonable cause? Hon’ble Sir may be pleased to take a glance of the attached documents with this representation.

This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that how can it be justified to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness and chaos in an arbitrary manner by making the mockery of law of land? This is the need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer in order to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.                                                         

                                                                                                Yours sincerely
Date-11-03-2019                                            Yogi M. P. Singh, Mobile number-7379105911, Mohalla- Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001.

             


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Yogi
1 year ago

Now from the procrastination on the part of registrar of Shahu Ji Maharaj University Kanpur, it has been obvious that matter is serious and there is substance in the matter. There are two types of evidence 1-Direct evidences 2-Circumstantial evidences, undoubtedly circumstantial evidences are signalling that every thing is not OK.

Preeti Singh
1 year ago

प्राप्त अनुस्मारक –
क्र.स. अनुस्मारक प्राप्त दिनांक
1 Registrar Sir, you are being provided huge salary by Yogi Government in order to provide the services and date fixed by the chief minister office to dispose of the grievance is 03-May-2019 and today is 12-June-2019 which means you have made the delay of 40 days Whether you have no interest in the delivery of public services of which you are being provided huge salary from the public exchequer, then take my advice in this regard, Chief minister Yogi Sir has initiated compulsory retirement scheme and you may apply voluntarily in order to reap the benefit of the scheme as the recommendation of office head would be embarrassing 12 Jun 2019

Beerbhadra Singh
1 year ago

Undoubtedly the role of Chhatrapati shahuji Maharaj University Kanpur is too much negative as He is deviating the attention of the concerned accountable public functionaries from the real issue ipso facto obvious that he is asking for a fresh application from the student in order to correct the mark sheets of the aggrieved student but the actual fact is that he had made already an application to the college in order to correct the mark sheets and also deposited the required fee. The act of the registrar is full of arbitrariness and tyranny by colluding with the vice chancellor of the aforementioned in university.