Commissioner housing and development council first forwarded the matter to L.D.A. but now escaping from matter

 

जनसुनवाई
समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली, उत्तर प्रदेश
सन्दर्भ संख्या:-  
लाभार्थी का विवरण
नाम
मोबइल नंबर(१)
आधार कार्ड न.
आवेदन पत्र का ब्यौरा
लाभार्थी का विवरण/शिकायत क्षेत्र का
संदर्भ संख्या : 40015720057601 , दिनांक – 05 Oct 2020 तक की स्थिति
आवेदनकर्ता का विवरण :
शिकायत संख्या:-
40015720057601
आवेदक का नाम-
दिनेश प्रताप सिंह
विषय-
महोदय आप द्वारा ही निम्न प्रकरण को लखनऊ विकास प्राधिकरण को भेजा गया है तो आप का आचरण दो मुहा साप जैसा है क्योकि वही प्रकरण आप आगे बढ़ाने से कतरा रहे है जब की मामला मलाई काटने से सम्बंधित है | अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 11092019 26 09 2019अधीक्षणअभियंतामण्डल लखनऊ,उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद श्रेणीकरण पूर्व निक्षेपित अंतरित अधीक्षण अभियंता उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद 17 09 2019 26 09 2019 उपाध्यक्षलखनऊ, विकास प्राधिकरण कृपया प्रकरणमें नियमानुसारकार्यवाही करने का कष्ट करें Cश्रेणीकरण 3 आख्या मंडलायुक्त 24 082020 31 082020 उपाध्यक्षलखनऊ, विकास प्राधिकरण कृपया प्रकरण कगंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 07 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है कार्यालय स्तरपर लंबित Order passed by the Lucknow bench of the High court of Judicature at Allahabad in the Writ Petition Number 135 HC Year 2006 as follows It is simply ordered that the respondent number 4 to 7 shall open the lock of the staircase so that Smt Anuradha Singh the petitioner may come out of the house and take the proper and appropriate remedy in the competent court and after that, she may have the liberty to go anywhere. Since it is not a case in the strict sense of illegal detention, therefore, no direction can be issued to the respondent to produce the detenue in the court and allow her to live free at her home but since she can not take necessary steps for taking the remedy in the competent court, therefore it is simply ordered that the alleged detenue Smt Anuradha Singh shall be allowed to go out of the house and respondent number 4 to 7 shall open the lock of the door and open the door so that Smt Anuradha Singh may come out and take appropriate remedy. Dated 07032006 Signed by the concerned Honourable Justices of Division bench of Lucknow.महोदय उपरोक्त आदेश प्रत्यावेदन के साथ संलग्न है | संलग्नक के प्रथम व द्वितीय पेज में प्रार्थी द्वारा दिनांक १५/ ०३ /२००७ तथा २६/०६ /२००७ को विपक्षियों के पक्ष में निबंधन किये जाने का विरोध किया गया जिसके कारण दिनांक १३/०८/२००७ को लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा अपने तत्कालीन संपत्ति अधिकारी के. के. सिंह द्वारा नोटिस जारी किया गया | पक्ष विपक्ष को सुनने के लिए उपरोक्त अधिकारी द्वारा तिथि दिनांक २५/०८/२००७ समय प्रातः ११ बजे तय किया | अफ़सोस की बात है की पक्ष अर्थात प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह उपस्थित हुए किन्तु पांचो विपक्ष उपस्थित नहीं हुए | प्रार्थी निम्न उक्त बिंदुओं को पुनः श्री मान के संज्ञान में लाना चाहता है | १- क्या बिपक्षी टाइटल बिबाद को निबंधन के समय तक सक्षम न्यायालय के माध्यम से हल कर चुके थे | २- सक्षम न्यायालय का विवरण उपलब्ध कराये | ३- सक्षम न्यायालय द्वारा पारित आदेश की प्रति उपलब्ध कराये | ४-श्री मान जी यदि मूल दस्तावेज प्रार्थी के पास है तो लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा निबंधन की कार्यवाही किस आधार पर सम्पादित की गयी | ५- प्रार्थी के उपरोक्त प्रत्यावेदन पर तत्कालीन संपत्ति अधिकारी के. के. सिंह द्वारा क्या निर्णय लिया गया उसकी प्रति उपलब्ध कराया जाय |
विभाग –
उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद
शिकायत श्रेणी –
नियोजित तारीख-
19-10-2020
शिकायत की स्थिति-
स्तर –
निदेशालय / विभागाध्यक्ष स्तर/न
पद –
आयुक्त
प्राप्त रिमाइंडर-
प्राप्त फीडबैक –
दिनांक को फीडबैक:-
फीडबैक की स्थिति –
संलग्नक देखें –
नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :

क्र.

स.

सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी आदेश/आपत्ति दिनांक आख्या देने वाले अधिकारी आख्या दिनांक आख्या स्थिति
1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 04-10-2020 आयुक्त -उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद 05-10-2020 यह शिकायत उ.प्र.आवास एवं विकास परिषद् से सम्बंधित नहीं है | यह शिकायत लखनऊ विकास प्राधिकरण , जिला लखनऊ से सम्बंधित है | कृपया सम्बन्धित विभाग को शिकायत प्रेषित करने का कष्ट करें | निस्तारित
संदर्भ संख्या : 40015720054268 , दिनांक – 05 Oct 2020 तक की स्थिति
आवेदनकर्ता का विवरण :
शिकायत संख्या:-
40015720054268
आवेदक का नाम-
Dinesh Pratap Singh
विषय-
Order passed by the Lucknow bench of the High court of Judicature at Allahabad in the Writ Petition Number 135 HC Year 2006 as follows It is simply ordered that the respondent number 4 to 7 shall open the lock of the staircase so that Smt Anuradha Singh the petitioner may come out of the house and take the proper and appropriate remedy in the competent court and after that, she may have the liberty to go anywhere. Since it is not a case in the strict sense of illegal detention, therefore, no direction can be issued to the respondent to produce the detenue in the court and allow her to live free at her home but since she can not take necessary steps for taking the remedy in the competent court, therefore it is simply ordered that the alleged detenue Smt Anuradha Singh shall be allowed to go out of the house and respondent number 4 to 7 shall open the lock of the door and open the door so that Smt Anuradha Singh may come out and take appropriate remedy. Dated 07032006 Signed by the concerned Honourable Justices of Division bench of Lucknow.महोदय उपरोक्त आदेश प्रत्यावेदन के साथ संलग्न है | संलग्नक के प्रथम व द्वितीय पेज में प्रार्थी द्वारा दिनांक १५/ ०३ /२००७ तथा २६/०६ /२००७ को विपक्षियों के पक्ष में निबंधन किये जाने का विरोध किया गया जिसके कारण दिनांक १३/०८/२००७ को लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा अपने तत्कालीन संपत्ति अधिकारी के. के. सिंह द्वारा नोटिस जारी किया गया | पक्ष विपक्ष को सुनने के लिए उपरोक्त अधिकारी द्वारा तिथि दिनांक २५/०८/२००७ समय प्रातः ११ बजे तय किया | अफ़सोस की बात है की पक्ष अर्थात प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह उपस्थित हुए किन्तु पांचो विपक्ष उपस्थित नहीं हुए | प्रार्थी निम्न उक्त बिंदुओं को पुनः श्री मान के संज्ञान में लाना चाहता है | १- क्या बिपक्षी टाइटल बिबाद को निबंधन के समय तक सक्षम न्यायालय के माध्यम से हल कर चुके थे | २- सक्षम न्यायालय का विवरण उपलब्ध कराये | ३- सक्षम न्यायालय द्वारा पारित आदेश की प्रति उपलब्ध कराये | ४-श्री मान जी यदि मूल दस्तावेज प्रार्थी के पास है तो लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा निबंधन की कार्यवाही किस आधार पर सम्पादित की गयी | ५- प्रार्थी के उपरोक्त प्रत्यावेदन पर तत्कालीन संपत्ति अधिकारी के. के. सिंह द्वारा क्या निर्णय लिया गया उसकी प्रति उपलब्ध कराया जाय | प्रार्थी द्वारा पत्रकार पुरम गोमतीनगर में स्थित अपने आवास संख्या बी -९९ जिसका रकबा २०० वर्ग मीटर में बने मकान को बेच कर बाबू सिंह को पैसा दिया था जो की उपनिरीक्षक सत्तेश प्रसाद के माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद के लखनऊ एकल पीठ के समक्ष प्रस्तुत हलफनामे से स्पस्ट है पैसा बाबू सिंह ने लिया जमीन और मकान बाबू सिंह ने दिया लेकिन उस मकान को पुलिस की मदद से कब्ज़ा आराधना उर्फ गुड्डी ने किया | प्रार्थी जानना चाहता है की किस कैनन लॉ ने आराधना उर्फ गुड्डी को अधिकारिता प्रदान की है आराधना उर्फ गुड्डी जा कर बाबू सिंह से अपने अधिकार की बात करे जिनको उन्होंने अपने हक़ की जमीन बेचने का हक़ दिया था वैसे भी नियमानुसार एक ही प्लाट उनके नाम है और वह भी जब सक्षम न्यायालय का आदेश पारित होने पर | Applicant wants to draw the kind attention of the respondent number First who is Secretary of home department, civil secretariat, Government of Uttar Pradesh and respondent number second who is senior superintendent of police Lucknow as well as the station house officer police station Ashiana who is the respondent number 3 in the Writ Petition Number 135 HC Year 2006 filed in the Lucknow bench of the High court of Judicature at Allahabad filed by Anuradha Singh also named Guddi also named Aradhana Singh through her mother Beena Singh wife of Brijraj Singh also Beena Singh wife of Netrpal Singh. Whether in the same matter, to get remedy from various redressal bodies
विभाग –
उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद
शिकायत श्रेणी –
नियोजित तारीख-
07-10-2020
शिकायत की स्थिति-
स्तर –
निदेशालय / विभागाध्यक्ष स्तर/न
पद –
आयुक्त
प्राप्त रिमाइंडर-
प्राप्त फीडबैक –
दिनांक को फीडबैक:-
फीडबैक की स्थिति –
संलग्नक देखें –
नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :

क्र.

स.

सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी आदेश/आपत्ति दिनांक  

 

आख्या देने वाले अधिकारी आख्या दिनांक आख्या स्थिति
1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 22-09-2020 आयुक्त -उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद 22-09-2020 प्रकरण आवास विकास परिषद् से सम्बंधित नहीं है| निस्तारित
संदर्भ संख्या : 40015719059911 , दिनांक – 05 Oct 2020 तक की स्थिति
आवेदनकर्ता का विवरण :
शिकायत संख्या:-
40015719059911
आवेदक का नाम-
Yogi M P Singh
विषय-
महोदय पुलिस से ज्यादा यह मामला लखनऊ विकास प्राधिकरण के भ्रस्टाचार से सम्बंधित है किस तरह से एक एक लोगो ने पांच पांच छह छह प्लाट लेकर सरकारी खजाने को लखनऊ विकास प्राधिकरण के कर्मचारिओं से साठ  गाठ करके चूना  लगाया है वह चौकाने वाला है और महत्वपूर्ण है की इतना बड़ा घोटाला सरकार  की एजेंसिआ पूर्ण रूप से असफल रही पकड़ने में | श्री मान जी मामले की जांच कराके  दोषिओं को दण्डित किया जाए और सरकारी धन की रिकवरी कराई जाय | सोचिये एक गरीब आदमी पांच प्लाट खरीद कर एक मकान बनाएगा जो की पूर्ण रूप से अबैध और अप्राकृतिक है किन्तु लखनऊ विकास प्राधिकरण में व्याप्त भ्रस्टाचार से ऐसा संभव हो रहा है | नई सरकार  की कथनी और करनी में  यदि थोड़ा भी सामंजस्य है तो प्राथी कार्यवाही की अपेक्षा करता है | महोदय प्रार्धना पत्र के साथ लखनऊ विकास प्राधिकरण के तीन इकरार नामा लगे है जो बाबू सिंह उसकी पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी और कनिष्क कुमार सिंह के है जिसको उपरोक्त प्राधिकरण के कर्मचारी शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी द्वारा सम्पादित किया गया है | जिसके अनुसार बाबू सिंह की उम्र ३० वर्ष पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी सिंह की उम्र २५ वर्ष तथा पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र १८ वर्ष है अर्थात गर्भ स्थापना के समय पिता की उम्र ११ वर्ष और माता की उम्र ६ वर्ष अर्थात शास्त्र और विज्ञानं दोनों के लिए असंभव है किन्तु लखनऊ पुलिस और विकास प्राधिकरण के लिए बाबू सिंह और  उनकी पत्नी आदर्श है और व्यक्ति आदर्श पुरुष में दोष नहीं देखता तभी तो पति , पत्नी , पुत्र, पत्नी की माँ और पत्नी के भाई के नाम एक झटके में पांच प्लाट लखनऊ विकास प्राधिकरण के कानपुर योजना के सेक्टर एच मुख्य मार्ग पर एस  एस  प्रकार के योजना के हथियाये | गरीब लोगो का हक़ एक ही परिवार को आबंटित किया गया जिसका मुखिया बाबू सिंह पुलिस के अनुसार सीधा साधा अंगूठा टीप लेकिन हस्ताक्षर हिंदी और आंग्ल भाषा में कर लेते थे | सोचिये जो व्यक्ति इतना शातिर है की सरकारी कर्मचारियों से हर गलत काम करवा सकता था उसको लखनऊ पुलिस जिसके कारनामो से हमेशा योगी सरकार की किरकिरी हुई सीधा साधा मानता है | श्री मान किसी भी आपराधिक कृत्य के लिए आपराधिक मन जिम्मेदार होता है इरादा महत्वपूर्ण होता है | किन्तु पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र बढ़ा कर बाबू सिंह,  और आराधना उर्फ गुड्डी सिंह तथा शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी ने कोई अपराध कारित नहीं किया क्योकि सरकारी महकमा ऊपर से नीचे तक भ्रस्ट है | श्री मान जी आप ही अपने पुलिस विभाग को देखे जितने आख्या बाबू सिंह की मृत्यु से सम्बंधित है वे खुद में असंगत है जो इन आख्याओं को संदेहास्पद बना देते है |
विभाग –
उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद
शिकायत श्रेणी –
नियोजित तारीख-
26-09-2019
शिकायत की स्थिति-
स्तर –
मण्डल स्तर
पद –
अधीक्षण अभियंता
प्राप्त रिमाइंडर-
प्राप्त फीडबैक –
दिनांक28-09-2019 को फीडबैक:- श्री मान जी आप द्वारा आख्या संख्या  २०६ /२०१९ जनसुनवाई पोर्टल उत्तर प्रदेश पर लगाया गया है जिसके अनुसार आपने सिर्फ भूखंड संख्या -एस एस- १९१४,  १९१५  और १९१६ सेक्टर एच , कानपुर रोड योजना के सम्बन्ध में मूल दस्तावेज तलब किये है किन्तु प्राथी द्वारा पांच प्लाट अपने नजदीकी रिश्तेदारो के नाम खरीद कर एक मकान बनाने की शिकायत की गयी है जैसा की पुलिस की रिपोर्ट से स्पस्ट है | अब प्रार्थी आराधना सिंह उर्फ गुड्डी की माँ श्री मती बीना  पत्नी श्री नेत्र पाल सिंह भूखंड संख्या -एस एस १९१७ और उनका भाई अजय कुमार पुत्र ब्रिज राज सिंह भूखण्ड संख्या – एस  एस  १९१८ सेक्टर एच का भी संज्ञान लीजिए इन दोनों लोगो से भी मूल दस्तावेज तलब  किये जाय क्यों की इन पांच प्लाटों  की एक मालकिन है जैसा की पुलिस की रिपोर्ट से स्पस्ट है | इस घोटाले को हम आगे और बेपर्दा करेंगे | सम्बंधित दस्तावेज संलग्न है | महोदय ब्यथा निवारण का सम्बन्ध जिस तरह से ब्यथा से मुक्ति होता है उसी तरह हर शिकायत का उद्देश्य होता है लक्ष्य हासिल करना और यदि लक्ष्य नहीं हासिल नहीं हुआ तो शिकायत का कोई मतलब नहीं रहा और पत्र लिखना और मूल प्रति मांगना उस दिशा में पहल मात्र है | अभी तो वे लोग मूल प्रति देने में ही आना कानी करेंगे |
फीडबैक की स्थिति –
सन्दर्भ पुनर्जीवित
संलग्नक देखें –
नोट- अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

अग्रसारित विवरण :

क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी प्राप्त/आपत्ति दिनांक नियत दिनांक अधिकारी को प्रेषित आदेश स्थिति
1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 11-09-2019 26-09-2019 अधीक्षण अभियंतामण्डल -लखनऊ,उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद श्रेणीकरण

पूर्व

निक्षेपित

2 अंतरित अधीक्षण अभियंता (उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद ) 17-09-2019 26-09-2019 उपाध्यक्ष-लखनऊ,विकास प्राधिकरण कृपया प्रकरण में नियमानुसार कार्यवाही करने का कष्ट करें C-श्रेणी

करण

3 आख्या मंडलायुक्त( ) 29-09-2020 31-08-2020 उपाध्यक्ष-लखनऊ,विकास प्राधिकरण कृपया प्रकरण का गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 07 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है आख्या प्रेषित,

अनुमोदन लंबित

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God Man
1 month ago

It is quite obvious that matter is concerned with the Lucknow Development Authority which comes under the Ambit of Commissioner housing and Development Council but it is unfortunate that his department is denying to accept the application of the aggrieved applicant. It is the mockery of the law of land and government of Uttar Pradesh must take action in the matter but because of corruption no action is being taken against such wrongdoer staff of the Government of Uttar Pradesh.

Bhoomika Singh
Bhoomika Singh
1 month ago

Think about the gravity of situation that Yogi government is procrastinating on this matter concerned with the deep rooted corruption since one year which is the mockery of the law of land and the reflection of rampant corruption in the public offices and also showing the lackadaisical approach of the Yogi government to curb the corruption in the government machinery.

Vandana Singh
Vandana Singh
1 month ago
Reply to  Bhoomika Singh

सोचिये जो व्यक्ति इतना शातिर है की सरकारी कर्मचारियों से हर गलत काम करवा सकता था उसको लखनऊ पुलिस जिसके कारनामो से हमेशा योगी सरकार की किरकिरी हुई सीधा साधा मानता है | श्री मान किसी भी आपराधिक कृत्य के लिए आपराधिक मन जिम्मेदार होता है इरादा महत्वपूर्ण होता है | किन्तु पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र बढ़ा कर बाबू सिंह, और आराधना उर्फ गुड्डी सिंह तथा शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी ने कोई अपराध नहीं किया क्योकि सरकारी महकमा ऊपर से नीचे तक भ्रस्ट है | श्री मान जी आप ही अपने पुलिस विभाग को देखे जितने आख्या बाबू सिंह की मृत्यु से सम्बंधित है वे खुद में असंगत है जो इन आख्याओं को संदेहास्पद बना देते है |

Arun Pratap Singh
1 month ago

बर्बाद गुलिस्ता करने को जब एक ही उल्लू काफी था | हर डाल पे उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्ता क्या होगा | |
महोदय पुलिस से ज्यादा यह मामला लखनऊ विकास प्राधिकरण के भ्रस्टाचार से सम्बंधित है किस तरह से एक एक लोगो ने पांच पांच छह छह प्लाट लेकर सरकारी खजाने को लखनऊ विकास प्राधिकरण के कर्मचारिओं से साठ गाठ करके चूना लगाया है वह चौकाने वाला है और महत्वपूर्ण है की इतना बड़ा घोटाला सरकार की एजेंसिआ पूर्ण रूप से असफल रही पकड़ने में | श्री मान जी मामले की जांच कराके दोषिओं को दण्डित किया जाए और सरकारी धन की रिकवरी कराई जाय |

Preeti Singh
1 month ago

Government houses allocated to the rich people while it was meant to weaker and downtrodden section. कृपया प्रकरण का गंभीरता से पुनः परीक्षण कर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए 07 दिवस में आख्या उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा की गई है | Whether report was made available?

बर्बाद गुलिस्ता करने को जब एक ही उल्लू काफी था | हर डाल पे उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्ता क्या होगा | |

Pratima Parihar
Pratima Parihar
1 month ago
Reply to  Preeti Singh

सोचिये एक गरीब आदमी पांच प्लाट खरीद कर एक मकान बनाएगा जो की पूर्ण रूप से अबैध और अप्राकृतिक है किन्तु लखनऊ विकास प्राधिकरण में व्याप्त भ्रस्टाचार से ऐसा संभव हो रहा है |