C.O. Cantt must put light on High court order in which Home secretary is first respondent

श्री मान जी क्या न्याय पालिका की गरिमा नहीं गिर रही है जिस तरह से विद्वान न्यायाधीश ने आदेश दिया   कुंडी खोल कर दरवाजे  को खोल दिया  जाय जिससे की अनुराधा सिंह सक्षम न्यायालय से सिविल उपचार हासिल करे किन्तु यह क्या लखनऊ पुलिस खुद ही सिविल कोर्ट का पॉवर रखती है | किन्तु प्रार्थी को यह नही मालूम की यह पॉवर लखनऊ पुलिस को किसने डेलिगेट किया है या देश के किस कानून के अनुसार लखनऊ पुलिस को सिविल कोर्ट का दर्जा प्राप्त है | श्री मान जी भ्रष्टाचार का इतना बड़ा साम्राज्य है की लखनऊ पुलिस ने प्रार्थी दिनेश प्रताप सिंह के इतनी संगीन धाराए लगाया की और इतना ही नही पत्नी और बेटी को भी नही छोड़ा की वे लोग रातो रात मकान छोड़ दिए इतना अच्छा आदेश तो कोई कोर्ट भी न पास करता फिर क्या था कमरे का ताला तोड़ कर मकान कब्ज़ा हो गया समस्त सामान को लूट लिया गया प्रार्थी तो जेल में बंद था वकील खड़ा ही नही हुआ जमानत कैंसिल हो गयी पूरा परिवार आतंक के साये  में जीने लगा | यहा पर लोकतंत्र है की आराजकता है जहा पुलिस सिर्फ मनमाना करती है और न्यायालय सिर्फ खेद व्यक्त करके प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मसाला परोस देता है | कार्यवाही तो किसी के विरुद्ध होती नही |

Grievance Status for registration number : GOVUP/E/2019/35924

Grievance Concerns To
Name Of Complainant
Yogi M. P. Singh
Date of Receipt
03/11/2019
Received By Ministry/Department
Uttar Pradesh
Grievance Description
Matter is concerned with the home secretary government of Uttar Pradesh and others. Herewith detail representation is attached in the PDF form. On behalf of Dinesh Pratap Singh S/O Angad Prasad Singh Mohalla-Surekapuram Jabalpur Road Lakshmi Narayan Baikunh Mahadev Mandir District Mirzapur PIN Code 231001
Grievance Document
Current Status
Case closed
Date of Action
17/03/2020
Remarks
अधीनस्थ अधिकारी के स्तर पर निस्तारित अधीनस्थ अधिकारी के स्तर पर निस्तारित अधीनस्थ अधिकारी के स्तर पर निस्तारित श्रीमान आख्या अवलोकनार्थ सादर सेवा में प्रेषित है अनुमोदित प्रस्तुत प्रकरण की जांच की गयी जांच आख्या संलग्न है
Reply Document
Rating
Poor
Rating Remarks
It is simply ordered that the respondent number 4 to7 shall open the lock of the stair case so that Smt Anuradha Singh the petitioner may come out of the house and take the proper and appropriate remedy in the competent court and after that, she may have the liberty to go anywhere. Since it is not a case in the strict sense of illegal detention, therefore, no direction can be issued to the respondent to produce the detenue in the court and allow her to live free at her home but since she can not take necessary steps for taking the remedy in the competent court, therefore it is simply ordered that the alleged detenue Smt Anuradha Singh shall be allowed to go out of the house and respondent number 4 to 7 shall open the lock of the door and open the door so that Smt Anuradha Singh may come out and take appropriate remedy. Dated-07/03/2006 Signed by the concerned Honourable Justice of High court of Judicature of Allahabad, bench of Lucknow.
Officer Concerns To
Officer Name
Shri Arun Kumar Dube
Officer Designation
Joint Secretary
Contact Address
Chief Minister Secretariat U.P. Secretariat, Lucknow
Email Address
sushil7769@gmail.com
Contact Number
0522 2226349
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Preeti Singh
6 months ago

महोदय प्रार्धना पत्र के साथ लखनऊ विकास प्राधिकरण के तीन इकरार नामा लगे है जो बाबू सिंह उसकी पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी और कनिष्क कुमार सिंह के है जिसको उपरोक्त प्राधिकरण के कर्मचारी शीतला पाल सिंह सहायक नगर अधिकारी द्वारा सम्पादित किया गया है जिसके अनुसार बाबू सिंह की उम्र ३० वर्ष पत्नी आराधना उर्फ गुड्डी सिंह की उम्र २५ वर्ष तथा पुत्र कनिष्क कुमार सिंह की उम्र १८ वर्ष है अर्थात गर्भ स्थापना के समय पिता की उम्र ११ वर्ष और माता की उम्र ६ वर्ष अर्थात शास्त्र और विज्ञानं दोनों के लिए असंभव है किन्तु लखनऊ पुलिस और विकास प्राधिकरण के लिए बाबू सिंह और उनकी पत्नी आदर्श है और व्यक्ति आदर्श पुरुष में दोष नहीं देखता तभी तो पति , पत्नी , पुत्र, पत्नी की माँ और पत्नी के भाई के नाम एक झटके में पांच प्लाट लखनऊ विकास प्राधिकरण के कानपुर योजना के सेक्टर एच मुख्य मार्ग पर एस एस प्रकार के योजना के हथियाये गरीब लोगो का हक़ एक ही परिवार को आबंटित किया गया जिसका मुखिया बाबू सिंह पुलिस के अनुसार सीधा साधा अंगूठा टीप लेकिन हस्ताक्षर हिंदी और आंग्ल भाषा में कर लेते थे सोचिये जो व्यक्ति इतना शातिर है की सरकारी कर्मचारियों से हर गलत काम करवा सकता था उसको लखनऊ पुलिस जिसके कारनामो से हमेशा योगी सरकार की किरकिरी हुई सीधा साधा मानता है

Arun Pratap Singh
6 months ago

Writ Petition Number 135 HC Year 2006 श्री मान गृह सचिव महोदय प्रतिवादी संख्या -१ है इसलिए माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी सर्वोपरि थी | किन्तु जिस तरह से लखनऊ आशियाना थाने का थानाध्यक्ष कल्याण सिंह सागर ने उच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार करके मानवता को शर्मशार करने वाली घटना को अंजाम दिया है और खुद को सक्षम न्यायालय बना कर न्याय किया है उससे न्यायालय, शासन और पुलिस सभी को शर्मसार होना चाहिए और स्थिति स्पष्ट करना चाहिए किन्तु आप की चुप्पी महोदय खुद रहस्यमयी है | इससे बड़ा भ्रष्टाचार का उदाहरण कहा मिलेगा की माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्रदेश सचिवालय के नाक के नीचे लखनऊ पुलिस मकान कब्जा करवा दी जो की श्री मान जी की ओर से उच्च न्यायालय में प्रस्तुत हलफनामा जो की उपनिरीक्षक द्वारा प्रस्तुत किया गया था उसको झूठा साबित कर दिए अर्थात आप द्वारा माननीय उच्च न्यायालय को गुमराह किया गया | जनसूचना अधिकार २००५ के तहत मागी गयी सूचनाओं को न दे कर सिर्फ यही सिद्ध किया जा रहा है की आज भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मामले पर पर्दा दाल रहे है और
भ्रष्टाचार को छुपा रहे है जो किसी ढंग से उचित नही है | कृपया मामले की गंभीरता को समझते हुए नियमानुसार कार्यवाही करे और प्रार्थी को सूचना उपलब्ध कराये जो की लोक हित में होगा |

Bhoomika Singh
6 months ago

From the perusal of the text of this post it is quite obvious that there is rampant corruption in the government machinery and more surprising is that public spirited persons and aggrieved itself are submitting representations before the competent authority of the Government of Uttar Pradesh as well as Government of India, they are not taking any action in the matter except nonsense bogus misleading and arbitrary reports are submitted on the portal of government of Uttar Pradesh and government of India.

Beerbhadra Singh
6 months ago

Think about the honesty of the Lucknow police and lawlessness in the state of government of Uttar Pradesh you will be surprised that despite the repeated request of the aggrieved applicant concerned police sunk from top to bottom in the ocean of corruption is not putting light on the direction of the High Court of judicature at Allahabad Lucknow bench. Where is the Civil remedy passed by the competent Civil Court as directed by the Lucknow bench of the high court of judicature at Allahabad? Whether station officer of the Aashiyana police station has the power of competent civil court as directed by the High Court why this mockery of the law of land?