क्या शुल्क नियमन के नाम पर गरीबो के मुह से निवाला छिनना अच्छी बात है |

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
क्या शुल्क नियमन के नाम पर गरीबो के मुह से निवाला छिनना अच्छी बात है |
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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 8 April 2018 at 13:25
To: pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, supremecourt <supremecourt@nic.in>, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, cmup <cmup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, csup@up.nic.in, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>

विषय –निजी प्रबंध तंत्रों को जो की अंग्रेजी माध्यम से हमारे बच्चो को शिक्षा उपलब्ध करा रहे है और सरकार उसमे पढने वाले बच्चो को न तो छात्रवृत्ति देती है और न ही प्रबंध तंत्र को ही किसी प्रकार की सहायता दे रही है तथा इस तरह के विद्यालयों ने बहुत से बेरोजगार लोगो के जीविकोपार्जन के साधन दिए अनावश्यक परेशान न करे अन्यथा समाज में भूखमरी और बढ़ जायेगी|
With due respect, your applicant wants to draw the kind attention of the Hon’ble Sir to the following submissions as follows.
1-It is submitted before the Hon’ble Sir that जहा आप शुल्क नियमन की बात कर रहे है वहा तो खुद इतनी प्रतिश्पर्धा है की बेचारे खुद ही फीस नही बढ़ाते है | मै खुद एक गार्जियन हु मुझे उनमे कोई कमी नही दिखाई पड़ती है कमी तो सिर्फ यही है की हर वर्ष प्रत्येक कक्षा की पुस्तके बदल दी जाती है इसलिए विद्यार्थी अगली कक्षा के बच्चो की मदद नही ले पाते है और अगली कक्षा के बच्चे मदद देने से वंचित रह जाते है |
२ -It is submitted before the Hon’ble Sir that श्री मान जी आप की सरकार द्वारा बी. एड. पढाई के नाम पर प्रति वर्ष ५१ हजार से ज्यादा सिर्फ फीस ली जाती है उसी तरह से डी. एल. एड. में भी बयालीस हजार से ज्यादा प्रति वर्ष फीस वसूली जाती है | क्या आप बता सकते है की इसके पीछे क्या राज है |श्री मान जी जिस समय हम लोग पढ़ते थे बी. एड. की फीस ८०० रुपये थी और विज्ञानं स्नातकोत्तर की फीस तिलकधारी महाविद्यालय जौनपुर में ६०० रुपये थी | इस समय विज्ञानं स्नातक की फीस ३५००रुपये से ४००० रुपये है | इतने बड़े अंतर कारण तो आप जानते ही है |
३ -It is submitted before the Hon’ble Sir that श्री मान जी गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक मिर्जापुर में बच्चो की फीस पंद्रह हजार से ज्यादा है और भूसा की तरह बच्चे कक्षाओं में भरे रहते है फिर आप किस नैतिकता के आधार पर १००००  रुपये वार्षिक लेने वाले आंग्ल भाषा में शिक्षा दान करने वाले हमारे गरीब भाईओं पर शिकंजा कसने की बात करते है जिनकी कक्षाओं में बच्चो की संख्या मुश्किल से पंद्रह सोलह होती है | ४ -It is submitted before the Hon’ble Sir that श्री मान जी जहा आप के सरकार के लोग बिधायक सांसद कितने स्कूल चला रहे है मानको की धता बता के और इन विद्यालयों के बच्चो को सब से ज्यादा छात्रवृत्ति प्राप्त होती है या दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है की छात्रवृत्ति के पैसे से ही चलते है और इस सम्बन्ध में न्यायालय द्वारा निर्देश भी जारी किया गया की ऐसे विद्यालयों की सूची जारी की जाय किन्तु आज तक आप लोगो ने कभी भी गंभीरता से नही लिया | यदि आप लोग वास्तव में हम गरीब माता पिता और बच्चो के प्रति सहानुभूति रखते तो जिस प्रकार हिंदी भाषा में खुले प्राइवेट विद्यालयों को बिना बच्चे बिना स्कूल का छात्रवृत्ति प्रदान करते है उसी प्रकार हमारे बच्चो पर भी दया दिखाते हुए कम से कम समता के आधार पर छात्र वृत्ति उपलब्ध कराते किन्तु यहा न्याय तो है नही सिर्फ मनमानापन है जिसके शिकार हम लोग है |
५  -It is submitted before the Hon’ble Sir that पिछले चार वर्षो से छात्र वृत्ति की माग कर रहा हु समानता के आधार पर आंग्ल भाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे विद्यालयों में बच्चो को छात्रवृत्ति प्रदान की जाय किन्तु किसी का ध्यान इस ओर नही गया क्योकि इस ओर सरकारी उच्च पदासीन लोग नही है |यहा हर बात में राजनीतिक मुद्दा तलाशा जाता है न की संबैधानिक प्रावधान | क्या गरीब अंग्रेजी की पढाई नही कर सकता क्या अंग्रेजी पढने वाले सभी अमीर है | यहां तो सिर्फ अपनों को फायदा पहुचाना है चाहे जैसे और किसी को शांति से नही रहने देना है चाहे वह मंदिर का सन्यासी ही क्यों न हो |
                          This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that It can never be justified to overlook the rights of the citizenry by delivering services in an arbitrary manner by floating all set up norms. This is sheer mismanagement which is encouraging wrongdoers to reap the benefit of loopholes in the system and depriving poor citizens of the right to justice. Therefore it is need of the hour to take concrete steps in order to curb grown anarchy in the system. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.
                                             Yours sincerely
                                    Yogi M. P. Singh Mobile number-7379105911
Mohalla-Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, India.


Government raising unnecessary issues to harass private english medium schools.pdf
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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

श्री मान जी जहा आप के सरकार के लोग बिधायक सांसद कितने स्कूल चला रहे है मानको की धता बता के और इन विद्यालयों के बच्चो को सब से ज्यादा छात्रवृत्ति प्राप्त होती है या दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है की छात्रवृत्ति के पैसे से ही चलते है और इस सम्बन्ध में न्यायालय द्वारा निर्देश भी जारी किया गया की ऐसे विद्यालयों की सूची जारी की जाय किन्तु आज तक आप लोगो ने कभी भी गंभीरता से नही लिया | यदि आप लोग वास्तव में हम गरीब माता पिता और बच्चो के प्रति सहानुभूति रखते तो जिस प्रकार हिंदी भाषा में खुले प्राइवेट विद्यालयों को बिना बच्चे बिना स्कूल का छात्रवृत्ति प्रदान करते है उसी प्रकार हमारे बच्चो पर भी दया दिखाते हुए कम से कम समता के आधार पर छात्र वृत्ति उपलब्ध कराते किन्तु यहा न्याय तो है नही सिर्फ मनमानापन है जिसके शिकार हम लोग है |

Arun Pratap Singh
2 years ago

श्री मान जी आप की सरकार द्वारा बी. एड. पढाई के नाम पर प्रति वर्ष ५१ हजार से ज्यादा सिर्फ फीस ली जाती है उसी तरह से डी. एल. एड. में भी बयालीस हजार से ज्यादा प्रति वर्ष फीस वसूली जाती है | क्या आप बता सकते है की इसके पीछे क्या राज है |श्री मान जी जिस समय हम लोग पढ़ते थे बी. एड. की फीस ८०० रुपये थी और विज्ञानं स्नातकोत्तर की फीस तिलकधारी महाविद्यालय जौनपुर में ६०० रुपये थी | इस समय विज्ञानं स्नातक की फीस ३५००रुपये से ४००० रुपये है | इतने बड़े अंतर कारण तो आप जानते ही है |

Vandana Singh
Vandana Singh
4 months ago

यदि आप लोग वास्तव में हम गरीब माता पिता और बच्चो के प्रति सहानुभूति रखते तो जिस प्रकार हिंदी भाषा में खुले प्राइवेट विद्यालयों को बिना बच्चे बिना स्कूल के छात्रवृत्ति प्रदान करते है उसी प्रकार हमारे बच्चो पर भी दया दिखाते हुए कम से कम समता के आधार पर छात्र वृत्ति उपलब्ध कराते किन्तु यहा न्याय तो है नही सिर्फ मनमानापन है जिसके शिकार हम गरीब लोग हैं |
श्री मान जी आप की सरकार द्वारा बी. एड. पढाई के नाम पर प्रति वर्ष ५१ हजार से ज्यादा सिर्फ फीस ली जाती है उसी तरह से डी. एल. एड. में भी बयालीस हजार से ज्यादा प्रति वर्ष फीस वसूली जाती है | यही है आप की मुफ्त शिक्षा |

Beerbhadra Singh
3 months ago

Because of corruption, there is no reform in the positive direction. Think about ongoing scenario, these schools are teaching nothing as teachers are not coming to school. Only clerical staffs are attending the colleges to extort admission fee from 20 to 30 thousand. Government functionaries are only thinking about their shares nothing else.