प्रार्थी के अनुसार २९ महीने की तनख्वाह बकाया और १९ महीने का प्रभागीय बनाधिकारी गोरखपुर के अनुसार

क्या सरकार का चेहरा क्रूर आततायी जैसा नही है जब की पीड़ित ब्यक्ति खुद मुख्यमत्री महोदय के संसदीय क्षेत्र का है | जहा पर इनके अधिकारी लाखो रुपये महीने सिर्फ तनख्वाह ले रहे है उपरी आय को नजरअंदाज कर दीजिये फिर एक दिहाड़ी मजदूर की २९ महीने की तनख्वाह क्यों नही देना चाहते हो जिस पार्टी ने सत्ता हासिल करने के राम रोटी और इन्साफ के नारे का सहारा लिया है उसकी वास्तविक सूरत यही है 
आवेदन
का विवरण
शिकायत संख्या
60000190009082
आवेदक कर्ता का नाम:
Yogi M P Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
7379105911,231001
विषय:
Undoubtedly our member of parliament is the chief minister
of state but we are facing more tyranny in comparison to the period when he
was only M. P. because he used to pay heed to our grievances and now has no
time for us. Think about the gravity of situation that 29 months salary but
according to the divisional forest officer only 19 months salary is not being
provided arbitrarily on flimsy ground. Whether work without salary is not the
encroachment of the fundamental and human rights of aggrieved staff. On one
side of the screen, accountable public functionaries talk of the poor and
weaker section but actually works for the rich otherwise why overlooking the
genuine application of the applicant.
आवेदन का विवरण शिकायत संख्या-40018818056270
An application under article 51 A of the constitution of India to enquire in
regards to serious Human Rights Violation by the staffs of the department of
the forest of the government of Uttar Pradesh Prayer- Aggrieved Satyendra
Singh S/O Late Mahendra Singh Dainik Dakiya Baki Range Paniyara Forest
Section Gorakhpur District Gorakhpur Mobile Number 9918646162 is deprived of
the salary for 29 months ie since November 2015 and up till now months
arbitrarily Honble Sir may be pleased to direct aforementioned respondents to
pay the wage/ remuneration of the aforementioned aggrieved staffs as soon as
possible as such incidence is the violation of both fundamental rights and
human rights of the aggrieved Those accountable for non payment of the meagre
wages provided as maintenance to aforementioned aggrieved daily wage staff
may be subjected to proper scrutiny under appropriate law of land.
भारतीय संबिधान के
अनुच्छेद ५१ अ के तहत कृपया परिशीलनोपरांत नियमानुसार कार्यवाही वास्ते और यदि
नही तो क्यों
? क्या सरकार बेगारी करायेगी फीडबैक की स्थिति: मुख्यमंत्री कार्यालय
द्वारा दिनाक
01/08/2018 को फीडबैक पर कार्यवाही अनुमोदित कर दी गयी है जब प्रार्थी
ने बन विभाग की सेवा की है और कर रहा है तो उसका जीवन निर्वाह हेतु मिलने वाला
छुद्र पारिश्रमिक उसे क्यों नही दिया जा रहा है हमें न्याय चाहिए और अपने मुख्य
मंत्री सर से और वह हमारा अधिकार है वे हमारी रक्षा नही करेंगे तो कौन करेगा
श्री मान जी यह सच है की प्रार्थी का उन्नीस महीने का भुगतान लंबित है और
प्रार्थी के अनुसार २९ महीने का उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष खुद बन विभाग के उस
जिम्मेदार कार्मिक के द्वारा स्वीकार किया गया है जो प्रार्थी एवं प्रार्थी के
परिवार को भूखो मार डालना चाहता है यदि भुगतान नही होता है तो क्या प्रार्थी के
मानवाधिकारों का उल्लंघन नही है निसंदेह विभागी कर्मचारी नियमो से बधे है जो
सरकार द्वारा बनाए जाते है किन्तु मुख्यमंत्री सर द्वारा तो जनहित में दिशा
निदेश जारी किये जा सकते है श्री मान मुख्यमंत्री महोदय ने जिस संसदीय सीट से
रिकॉर्ड जीत हासिल की है उसी के बदौलत आज मुख्य मंत्री पद पर आसीन है क्या उनका
दायित्व यह नही है की प्रार्थी के संबैधानिक व मानवाधिकारों की रक्षा करे श्री
मान मुख्य मंत्री सर हम लोगो ने समर्थन ही नही महा समर्थन दिया है इसलिए आप को
हम लोगो को इस तरह से नही भूलना चाहिए न्याय की बात करना और न्याय करना दोनों
में जमीन आसमान का फासला है कोई विरला ही इस दूरी को तय कर पाता है
नियत तिथि:
प्रक्रिया में है
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:
आवेदन का संलग्नक

From
<http://jansunwai.up.nic.in/TrackGraviancePopup.aspx?complainno=60000190009082&MOBNO=7379105911&IsOldNew=N&Type=2

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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

क्या सरकार का चेहरा क्रूर आततायी जैसा नही है जब की पीड़ित ब्यक्ति खुद मुख्यमत्री महोदय के संसदीय क्षेत्र का है | जहा पर इनके अधिकारी लाखो रुपये महीने सिर्फ तनख्वाह ले रहे है उपरी आय को नजरअंदाज कर दीजिये फिर एक दिहाड़ी मजदूर की २९ महीने की तनख्वाह क्यों नही देना चाहते हो जिस पार्टी ने सत्ता हासिल करने के राम रोटी और इन्साफ के नारे का सहारा लिया है उसकी वास्तविक सूरत यही है

Arun Pratap Singh
1 year ago

Undoubtedly true that government is behaving like cruel oppressor ipso facto obvious from its working style.Even common man can think what would happen if some one may not be provided his monthly remuneration and here for such a large span of time he is deprived of his salary.
क्या सरकार का चेहरा क्रूर आततायी जैसा नही है जब की पीड़ित ब्यक्ति खुद मुख्यमत्री महोदय के संसदीय क्षेत्र का है | जहा पर इनके अधिकारी लाखो रुपये महीने सिर्फ तनख्वाह ले रहे है उपरी आय को नजरअंदाज कर दीजिये फिर एक दिहाड़ी मजदूर की २९ महीने की तनख्वाह क्यों नही देना चाहते हो जिस पार्टी ने सत्ता हासिल करने के राम रोटी और इन्साफ के नारे का सहारा लिया है उसकी वास्तविक सूरत यही है

Mahesh Pratap Singh Yogi M. P. Singh

Whether it is not a case of Human Rights violation but concerned accountable public functionaries are not taking action in the matter shows that they are not interested to curb the human rights violation which is being perpetrated by the earring government staff and in the interest of justice it must be curbed but who thinks about justice in this anarchy when there is rampant corruption in our government machinery.
आदेश देने वाले अधिकारी आदेश दिनांक अधिकारी को प्रेषित आदेश आख्या दिनांक आख्या स्थिति आख्या रिपोर्ट
1 अंतरित लोक शिकायत अनुभाग – 1(मुख्यमंत्री कार्यालय ) 01 – Feb – 2019 अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव -वन विभाग कृपया शीघ्र नियमानुसार कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा की गई है। अनमार्क

Beerbhadra Singh
Beerbhadra Singh
5 months ago

It is quite obvious that matter is too much old but not appropriate action was taken by the government of Uttar Pradesh in the matter and aggrieved staff of the Department of Forest which is posted on daily wages was not given any reprieve by the government. Here government is working like cruel contractor who exploits its own vulnerable worker staffs.