दोनों अधिकारिओं ने मिल कर पुनः अनुसूचित जनजाति को अनुसूचित जाति बना दिया जो की जालसाजी की कोटि में आता है

Grievance
Status for registration number : PMOPG/E/2019/0151935

Grievance Concerns To

Name Of Complainant Yogi M P Singh, Date of Receipt 19/03/2019

Received By Ministry/Department Prime Ministers Office

Grievance Description

An application under article 51 A of the constitution of
India.If director social welfare Lucknow and social welfare officer at district
level are whole sole authority, then there is open gate of tyranny,
arbitrariness and corruption.
मोदी सर के यहा से भेजे गये पत्रों को मुख्य मंत्री कार्यालय या तो फाइल कर देता है या ऐसे विभाग को भेजा जाता है जिससे सम्बंधित मामला हो ही और इस तरह से टाल मटोल किया जाता और अधीनस्थ अधिकारी गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त है शिकायत करने पर असंगत जवाब दो पंक्तियों का लगा कर शिकायत को बंद कर दिया
जाता है क्या यही त्तारीका है सामाजिक न्याय प्रदान करने का इस बार अनुसूचित जाति
व जनजाति के छात्र छात्राओं को जिनको पिछले दो वर्षो से मिल रही थी उनकी भी
छात्रवृत्ति रोक दी गई और वह पैसा निजी प्रबंध तंत्रों के छात्रो को भेज दी गयी
क्यों की इन स्थानों से सीधे कमीशन का हिसाब हो जाता है ये नेता लोग लडकियों की
शिक्षा की वकालत करते है गरीबो की शिक्षा का वकालत करते है किन्तु वास्तविक शैली
तो समाज कल्याण निदेशक और समाज कल्याण अधिकारी की कार्यशैली में झलक रहा है
लडकियों को यह सोच कर की क्या कर सकती है सब से ज्यादा उन्ही को युक्ति खोज करके
वंचित किया गया है दिनांक
08/03/2019को फीडबैक:- यदि
राज्य सरकार की कार्यशैली में थोड़ी भी इमानदारी होगी तो जरुर मामले में प्रथम
सूचना रिपोर्ट दर्ज करा के भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुचने का प्रयास किया जाएगा विधि
के समक्ष सभी सामान होते है यह समझ कर मामले को नजर अंदाज न किया जाय की मामले में
राज्य सरकार का निदेशक स्तर का अधिकारी फस सकता है श्री मान जी समाज कल्याण
अधिकारी की तरह योगी एम्
. पी. सिंह तथ्यों को
घुमा फिरा कर नही पेश करते क्यों की वे एक घुसखोर अधिकारी नही है जहा उनका जीवन
घुसखोरी में बीता है वही प्रार्थी द्वारा पूर्ण जीवन भ्रस्टाचार के खिलाफ संघर्ष
में लगाया गया है श्री मान अब तो समाज कल्याण अधिकारी के रिपोर्ट से पुष्ट हो चुका
है की प्रार्थी द्वारा लगाए गये दो आवेदन पत्रों में एक में अनुसूचित जाति भरा है
और एक में अनुसूचित जाति भरा है दोनों प्रिंट भारत सरकार के राज्य सरकार उत्तर
प्रदेश की वेबसाइट से लिए गए है इसलिए यदि प्रिंट के साथ छेड़ खानी करके गलत तथ्य
प्रस्तुत किया गया है प्रार्थी दोषी है और समस्त धाराए प्रार्थी ऊपर लगाईं जाय और
यदि समाज कल्याण अधिकारी और निदेशक समाज कल्याण लखनऊ ने वेबसाइट के साथ छेड़खानी की
है उन लोगो के ऊपर भारतीय दंड विधान की समुचित धाराओं के अंतर्गत कार्यवाही की जाय
और इसमें किसी तरह की कोताही न बरती जाय श्री मान जिस आवेदन की बात समाज कल्याण
अधिकारी कर रहे है वह प्रार्थी द्वारा शुरू में भरा गया है किन्तु अनुसूचित जनजाति
संशोधित किया गया है प्रार्थी द्वारा खुद जब प्रार्थी के संशोधन वास्ते वेबसाइट
खोली गयी उपरोक्त दोनों अधिकारिओं ने मिल कर पुनः अनुसूचित जनजाति को अनुसूचित
जाति बना दिया गया जो की जालसाजी की कोटि में आता है प्रार्थी द्वारा अनुसूचित
जनजाति बनाने और लॉक करने के उपरांत खुद प्रार्थी कोई संशोधन नही कर सकता था
बहरहाल मामला जांच से सम्बंधित है इसलिए सरकार द्वारा किसी इमानदार छवि वाले पुलिस
अधिकारी से मामले की जांच कराई जानी चाहिए साथ ही पूरे छात्रवृत्ति वितरण में जो
घोटाला हुआ है और हो रहा है उसकी जांच होनी चाहिए

Grievance Document

Current Status Grievance Received, Date of Action 19/03/2019

Officer Concerns To

Forwarded to Prime Ministers Office, Officer Name Shri Ambuj Sharma

Officer Designation Under Secretary (Public)

Contact Address Public Wing 5th Floor, Rail Bhawan New
Delhi

Email Address ambuj.sharma38@nic.in, Contact Number 011-23386447

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Yogi
1 year ago

यदि राज्य सरकार की कार्यशैली में थोड़ी भी इमानदारी होगी तो जरुर मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करा के भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुचने का प्रयास किया जाएगा विधि के समक्ष सभी सामान होते है यह समझ कर मामले को नजर अंदाज न किया जाय की मामले में राज्य सरकार का निदेशक स्तर का अधिकारी फस सकता है श्री मान जी समाज कल्याण अधिकारी की तरह योगी एम्. पी. सिंह तथ्यों को घुमा फिरा कर नही पेश करते क्यों की वे एक घुसखोर अधिकारी नही है जहा उनका जीवन घुसखोरी में बीता है वही प्रार्थी द्वारा पूर्ण जीवन भ्रस्टाचार के खिलाफ संघर्ष में लगाया गया है

Preeti Singh
1 year ago

Undoubtedly I am agreed with this quotation and most may be agreed if Modi did well, then he will be rewarded otherwise everyone knows the outcome.
श्री मान जी गरीब छात्रो व छात्राओं को वजीफा से वंचित करना अर्थात उनको शिक्षा से वंचित करना है प्रधान मंत्री कार्यालय सन्दर्भ के पत्रों को जब खुद मुख्यमंत्री कार्यालय गंभीरता से नही ले रहा है तो देश की जनता श्री मान प्रधान मंत्री सर को कितनी गंभीरता से लेगा यह तो २०१९ का चुनाव स्पस्ट कर देगा

Beerbhadra Singh
1 year ago

Undoubtedly the matter is concerned with the deep rooted corruption and both officers must be punished in accordance with the law as they are offenders who committed the act of forgery but who will punish them if the Chief Minister Office itself indulge in the unlawful activities by colluding with them. Undoubtedly there is rampant corruption in the Government of Uttar Pradesh and the people of state expected from the new regime that its Chief Minister will control the growing corruption in the state but it is unfortunate there is sheer disappointment towards it as the new Chief Minister is totally failed in order to control corruption from the government machinery, everything is going under the cloud of deep rooted corruption. The dealings of the Chief Minister office is worst than the dealings of the members of the post office because at least they deliver the communication at the exact address but the members of the chief Minister office don't forward the letter to the appropriate position and the most surprising is that it is done deliberately by them consequently rule of law can't be expected from them.