बाराबंकी में जहरीली शराब से मरने वाले परिवार को पांच लाख छति पुर्ति और एक सदस्य को नौकरी प्रदेश सरकार दे |

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com>
बाराबंकी में जहरीली शराब से मरने वाले परिवार को पांच लाख छति पुर्ति और एक सदस्य को नौकरी प्रदेश सरकार दे | यह हादसा प्रदेश सरकार की असफलता है |
Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh <yogimpsingh@gmail.com> 29 May 2019 at 14:37

To: supremecourt <supremecourt@nic.in>, pmosb <pmosb@pmo.nic.in>, presidentofindia@rb.nic.in, urgent-action <urgent-action@ohchr.org>, cmup <cmup@up.nic.in>, hgovup@up.nic.in, csup@up.nic.in, uphrclko <uphrclko@yahoo.co.in>, lokayukta@hotmail.com




Hon’ble apex court of India may consider the sheer violation of fundamental /human rights of thousands of poor villagers died because poisonous liquor sold on government authorised liquor shop which took place because of the corruption in the function of concerned departments.

An application under Article 32 of Constitution of India, in order to be instrumental in providing the social justice to poor villagers died of poisonous liquor and those taking medical remedy because they consumed callous liquor sold on Monday on Government allotted liquor shop under police station- Ramnagar Place-Raniganj District-Barabanki  of the Government of the Uttar Pradesh because of mismanagement in the system.

To

                           The Hon’ble chief justice of India /companion judges

                                 Supreme court of India, New Delhi, India

Subject-Article 32, the constitution of India, right to Justice but this right of a large number of poor villagers was wholly eroded by concerned arbitrarily as consequent of mismanagement, 16 poor illiterate villagers died by consuming callous liquor and 32 villagers are getting medical treatment in K.G.M.U. Hospital Lucknow. 

Petitioner-Yogi M. P. Singh Mobile number-7379105911

Mohalla-Surekapuram, Jabalpur Road 
District-Mirzapur, Uttar Pradesh Pincode-231001 
                                        Versus 
Respondent-1-Chief Secretary 
Government of Uttar Pradesh, Lucknow
2- Principle Secretary 

Government of Uttar Pradesh, Lucknow

Subject cum Prayer-Since tragic incidence took place because of failure of state government so government must compensate the victims in accordance with the law. Hon’ble apex court of India may direct aforementioned respondents to provide compensation instead ex-gratia as being done by the chief minister of state Mr Yogi Aditya Nath.
1-Each bereaved family may be provided Rs.5 Lakhs as compensation with one member appointment in public sector on the compassionate ground.
2-Those getting medical treatment at K.G.M.U. Hospital in Lucknow must be provided entire expenses occurred during the ailments with two lakhs as compensation.


Most revered Sir –Your applicant invites the kind attention of Hon’ble Sir with due respect to the following submissions as follows.

1-It is submitted before the Hon’ble Sir that  51A. Fundamental duties It shall be the duty of every citizen of India (a) to abide by the Constitution and respect its ideals and institutions, the National Flag and the National Anthem;(h) to develop the scientific temper, humanism and the spirit of inquiry and reform;

(i) to safeguard public property and to abjure violence;
(j) to strive towards excellence in all spheres of individual and collective activity so that the nation constantly rises to higher levels of endeavour and achievement.

2-It is submitted before the Hon’ble Sir that excise is major source of income of the Government of Uttar Pradesh and such carelessness on the part of staff of excise department and key government accountable functionaries can never be overlooked. Aggrieved families have not only moral rights but also have constitutional rights to reap remedy against loss incurred due to mal-administration of the government.

3-It is submitted before the Hon’ble Sir that The right to life is a moral principle based on the belief that a human being has the right to live and, in particular, should not be killed by another human being. Whether state has right to kill a citizen through its mismanagement. It is obligatory duty of the state government to maintain the set up norms in regard to the services provided by its subordinates but how the norms were followed if the caps bottles were not locked/sealed during the purchase of  liquor from the shop authorised by the government of Uttar Pradesh.

4-It is submitted before the Hon’ble Sir that to maintain the law order in the state is the state subject and such a large scale deaths and large scale sick people after consuming callous liquor purchased from the government authorised shop, getting remedy in the aforementioned hospital is the reflection of the failure of the law order in the state. The constitution of India imparts constitutional supremacy (not parliamentary supremacy, since it was created by a constituent assembly rather than Parliament) and was adopted by its people with a declaration in its preamble.[7][full citation needed] Parliament cannot override the constitution
5-It is submitted before the Hon’ble Sir that undoubtedly there is supremacy of the constitution of India and Hon’ble apex court of India is its guardian Article 21, which prevents the encroachment of life or personal liberty by the State which means Right to life must be preserved but how if the government of Uttar Pradesh is snatching the right to life from its citizenry arbitrarily through its cryptic mismanagement which is not being overcome deliberately as may cause heavy loss to backdoor income of the corrupt staffs of the government.
6-It is submitted before the Hon’ble Sir that please take a glance of detail of tragic incidence and chronology of the events as follows-

जहरीली देसी शराब ने बाराबंकी में 16 लोगों की जान ले ली। मरने वालों में पितापुत्रों समेत एक ही परिवार के चार लोग भी शामिल हैं। वहीं, 32 लोग अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन सबका केजीएमयू, लखनऊ में इलाज चल रहा है। चपेट में आए 17 गांवों के सभी लोगों ने रामनगर थाना क्षेत्र के रानीगंज में स्थित सरकारी ठेके से सोमवार को शराब खरीदकर पी थी। आशंका है कि शराब की शीशियों की सील टेम्पर कर उसमें मिलावट की गई। 

इस मामले में आबकारी अधिकारी, आबकारी निरीक्षक समेत 15 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है। शराब पीने के बाद सोमवार रात से ही एक के बाद एक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टीदस्त के साथ ही आंखों की रोशनी जाने लगी। साथ ही एक के बाद एक की सांस उखड़ने लगी। 40 से ज्यादा को सूरतगंज, रामनगर और फतेहपुर सीएचसी के बाद जिला अस्पताल भेजा गया। यहां भी हालत में सुधार होने पर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जाने लगा। इस मामले में लखनऊ जोन के एडीजी राजीव कृष्णा ने बड़ा खुलासा किया है। 
लखनऊ जोन के एडीजी राजीव कृष्णा ने बताया कि जिस सरकारी दुकान से विंडीज और पावर हाउस ब्रांड की शराब खरीदी गई, अन्य जिलों में भी सरकारी ठेकों से भी उसी ब्रांड की शराब बेची जा रही है। जिस बैच की शराब पीने से लोगों की मौत हुई है, उसकी जांच करने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि जहरीली शराब से पीड़ित लोगों में से कुछ का कहना है कि सरकारी ठेके से बेची गई बोतल सील नहीं थी। इसकी भी जांच की जा रही है।
सरकार ने बाराबंकी के जिला आबकारी अधिकारी एसएन दुबे, आबकारी निरीक्षक रामतीरथ मौर्या, हेड कांस्टेबल राममोहन, संतोष यादव, सलीम कांस्टेबल अब्दुल कलाम, दीपक शुक्ला, विनय सिंह, रामशबद चौधरी सीता देवी को निलंबित कर दिया गया है। डीजीपी के निर्देश पर रामनगर के एसपी पवन गौतम, प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार, चौकी इंचार्ज महेंद्र सिंह सिपाहियों परमात्मा जंग बहादुर गुप्ता को भी निलंबित किया गया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने आबकारी आयुक्त पी. गुरुप्रसाद की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी को 48 घंटे के भीतर शासन को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। कमेटी के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर जांच की है।
रानीगंज के छोटेलाल (60) और उसके तीन बेटे रमेश (35), मुकेश(28) और सोनू (25) के साथ ही रानीगंज मजरे रहटा के मुन्ना उर्फ शिवकुमार यादव(50), उमरी के राजेंद्र वर्र्मा (42), भुंड अमराई के शिवकुमार(50), अकोहरा के राजेश कुमार (35), तेलवारी मजरे सेमराय के निवासी महेश सिंह (38), कटाहरी के विनय सिंह उर्फ राजू(33), कजियापुर के रामस्वरूप (40), ततेहरा के महेन्द्र सिंह(40), महार के सूर्य बक्श (42), लोहरनपुरवा के राम सहारे और रानीगंज के रविशंकर (30) की मौत हो गई।
मौतों की सूचना मिलते ही जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया। डीएम उदयभानु त्रिपाठी, एसपी अजय साहनी समेत विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंच गए। आननफानन में ठेके को सील कराया गया। वहां से बरामद शराब को सील कराकर जांच के लिए भेजा गया है। आसपास में तलाशी ली गई तो ठेके के पास स्थित मार्केट से भी बोरे के नीचे छिपाकर रखी गई शराब भी बरामद हुई।
देसी शराब की दुकान के ठेकेदार बहराइच निवासी दानवीर सिंह और उसके सेल्समैन सुनील उर्फ पप्पू जायसवाल मनीष सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। सुनील को गिरफ्तार किया गया है। अन्य दो सेल्समैन पीतांबर और शिवम को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने इस घटना में मरने वालों के परिवारीजनों को दोदो लाख रुपये की आर्थिक मदद का एलान किया है। साथ ही बीमार लोगों के समुचित इलाज की व्यवस्था के  निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में जब भी अवैध शराब का कोई कांड होता है, उन सब में एक ही तरह की ढर्रा देख गया है। घटना के बाद जांच होती है, बड़ेबड़े दावे किए जाते हैं, अभियान चलाए जाते हैं, दिखावटी कार्रवाइयां भी होती हैं, लेकिन हालात जस के तस बने रहते हैं। इसी के चलते प्रदेश में जहरीली और अवैध शराब से हो रही मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
पिछले डेढ़दो साल से नियमित अंतराल पर जहरीली शराब से मौत की घटनाएं हो रही हैं। गत फरवरी में ही सहारनपुर और कुशीनगर में जहरीली शराब पीने से 88 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच के लिए एडीजी रेलवे संजय सिंघल की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई। 
एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट भी सौंपी और कई अहम सुझाव सरकार को दिए लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। इससे पहले पिछले वर्ष बाराबंकी, कानपुर नगर, कानपुर देहात और फर्रुखाबाद में जहरीली शराब से मौतों के बाद भी जांच कमेटी बनाई गई, लेकिन उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई।
गत फरवरी में सहारनपुर और कुशीनगर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद अभियान चलाकर लाखों लीटर अवैध शराब पकड़ी गई और भट्ठियां नष्ट की गईं। अभियान चल ही रहा था कि 10 मार्च को कानपुर के घाटमपुर में अवैध शराब से 6 लोगों की मौत हो गई। लोकसभा चुनाव के दौरान पुलिस, निर्वाचन आयोग और आबकारी विभाग ने मिलकर अभियान जारी रखा। बड़ी मात्रा में अवैध शराब की भट्ठियों को नष्ट किया और लाखों लीटर अवैध शराब बरामद की।  

हर घटना के बाद चलता है अभियान
पिछले मार्च में कानपुर के घाटमपुर में जहरीली शराब से 6 लोगों की मौत हो गई थी। फरवरी में सहारनपुर और कुशीनगर में 88 लोगों की मौत अवैध शराब पीने से हो गई थी। पिछले वर्ष मई में कानपुर के सचेंडी और कानपुर देहात में जहरीली शराब पीने से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। 
जुलाई 2017 में आजमगढ़ में अवैध शराब पीने से 25 लोगों की मौत हो गई थी। 12 जनवरी 2018 को बाराबंकी में अवैध शराब पीने से 9 लोगों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बाद सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी और आधा दर्जन से अधिक लोगों को निलंबित किया गया था। पिछली हर घटना के बाद सात से 15 दिन तक का विशेष अभियान चलाकर पूरे प्रदेश में लाखों लीटर अवैध शराब पकड़ी गई। 

चुनाव के दौरान बरामद की गई 11 लाख लीटर अवैध शराब
डीजीपी मुख्यालय के आंकड़ों की मानें तो बीते चुनाव के दौरान पुलिस की मुस्तैदी की वजह से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। चुनाव के दौरान पुलिस और आबकारी विभाग ने अवैध शराब की 1909 भट्ठियां नष्ट की थीं। इसके अतिरिक्त 7,78,798 लीटर अवैध देसी शराब और 3,49,403 लीटर अंग्रेजी शराब बरामद की थी। 
19 मई को अंतिम चरण के चुनाव के साथ ही यह अभियान समाप्त हो गया। उसके बाद 10 दिन भी नहीं बीते थे कि फिर हादसा हो गया। इस बार मौतें अवैध तरीके से बनने वाली शराब से होकर सरकारी ठेके से खरीदी जा रही शराब से हुई है जो और भी गंभीर है।

This is a humble request of the applicant to you Hon’ble Sir that how can it be justified to withhold public services arbitrarily and promote anarchy, lawlessness, and chaos in an arbitrary manner by making the mockery of law of land? This is need of the hour to take harsh steps against the wrongdoer in order to win the confidence of citizenry and strengthen the democratic values for healthy and prosperous democracy. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.                                                         

                                                                                                                             Yours sincerely

Date-29-05-2019              Yogi M. P. Singh, Mobile number-7379105911, Mohalla- Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, Pin code-231001.

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Yogi
1 year ago

Since tragic incidence took place because of failure of state government so government must compensate the victims in accordance with the law. Hon'ble apex court of India may direct aforementioned respondents to provide compensation instead ex-gratia as being done by the chief minister of state Mr Yogi Aditya Nath.

Preeti Singh
1 year ago

It is obligatory duty of the government to help a bereaved family if master of the family is departed from this Earth untimely and in this case, there is failure of the state government machinery consequently victims must be compensated.
जहरीली देसी शराब ने बाराबंकी में 16 लोगों की जान ले ली। मरने वालों में पिता-पुत्रों समेत एक ही परिवार के चार लोग भी शामिल हैं। वहीं, 32 लोग अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन सबका केजीएमयू, लखनऊ में इलाज चल रहा है। चपेट में आए 17 गांवों के सभी लोगों ने रामनगर थाना क्षेत्र के रानीगंज में स्थित सरकारी ठेके से सोमवार को शराब खरीदकर पी थी। आशंका है कि शराब की शीशियों की सील टेम्पर कर उसमें मिलावट की गई

Beerbhadra Singh
1 year ago

Everyone knows that in the Barabanki callous liquor tragedy more than 26 people died and government onely provided 2 lakh rupees per bereaved family and now they have to think that what is the value of 200000 rupees higher family when the inflation is rising steeply. Undoubtedly we welcome the step of the chief minister of this state who had provided 2 lakh Rupees as an Ex gratia but he must think that death could take place because of the dereliction of Duty by the concerned staff of the government.Undoubtedly 500000 rupees as compensation to the bereaved family is justified demand of the public spirited individual>