पुलिस में लेशमात्र भी ईमानदारी हो तो जिस मुख्तारेआम की बात कर रही है प्रार्थी को उसकी कॉपी उपलब्ध करा कर दिखा दे

 

 

जनसुनवाई
समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली, उत्तर प्रदेश
सन्दर्भ संख्या:-40015719065868

 

आवेदनकर्ता का विवरण :

 

नाम : Dinesh Pratap Singh
पिता/पति का नाम : Angad Prasad Singh 
लिंग : पुरुष
मोबाइल नंबर-1 : 9838919619
मोबाइल नंबर-2 : 9838919619
ईमेल : arunpratapsingh904@gmail.com
Address
:
Mohalla Surekapuram Lakshmi
Narayan Baikunth Mahadev Mandir District Mirzapur 231001

 

शिकायत/सुझाव क्षेत्र की जानकारी :

 

Area : नगरीय
शिकायत/सुझाव क्षेत्र का पता —-

 

आवेदन का विवरण :

 

आवेदन पत्र का विवरण : ​​श्री मान जी पुलिस तथ्यों के आधार पर विवेचना करती है किन्तु यहा तो क्षेत्राधिकारी महोदय की रिपोर्ट मनमाना है जिसकी वजह से प्रार्थी को बार बार आवेदन करना पड़  रहा है | क्षेत्राधिकारी कैंट संतोष कुमार सिंह का रिपोर्ट दिनांक २५ सितम्बर  २०१९  जो की जनसुनवाई पोर्टल पर प्रस्तुत है शिकायत के साथ संलग्न है के अनुसार  पैरा इस प्रकार है | वर्ष  १९९९ में एक प्रोजेक्ट लगाने के सिलसिले में बाबू सिंह  देहरादून शिफ्ट हो गए थे तथा उसी दौरान इनके द्वारा अपने मकान के भूतल भाग को दिनेश प्रताप सिंह को किराया पर दिया गया था और मकान के प्रथम तल पर स्थित दो कमरों में अपने गृहस्थी का सामान ताला बंद कर अपने कब्जे में रखा था इस दौरान कभी वह स्वयं और कभी उनकी पत्नी किराया लेने मकान का देखभाल करने आते  रहते थे इस दौरान कई बार उन्होंने दिनेश प्रताप सिंह से किराया दारी  अनुबंध बनाने को कहा परन्तु किराया दारी अनुबंध नहीं हो सका इस तहत दिनेश प्रताप सिंह ने साजिशन एक मुख्तारेआम  बना कर बाबू सिंह के समक्ष किरायेदारी अनुबंध पात्र  बता कर हस्ताक्षर करा  दिए चुकी बाबू सिंह ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे वह सिर्फ हस्ताक्षर बनाते थे इसी का फायदा उठा कर दिनेश प्रताप सिंह ने एक मुख्तारेआम बना कर मकान पर कब्ज़ा कर लिया | क्षेत्राधिकारी कैंट संतोष कुमार सिंह को ज्ञात हो की प्रार्थी को जो मुख्तारनामा लखनऊ निबंधक के समक्ष बाबू सिंह ने दिया उस पर दिनांक १२ जून  १९९८ लिखा है जिसकी कॉपी आज भी निबंधक कार्यालय में सुरक्षित है श्री मान जी निबंधक कार्यालय से प्रार्थी के कथन का सत्यापन करा ले | क्षेत्राधिकारी कैंट को ज्ञात हो की प्राथी और बाबू सिंह के बीच इकरारनामा की तिथि १२ जून १९९८ अर्थात यह भी १९९९ से पूर्व का है | और उपरोक्त दोनों दस्तावेज आप को दर्जनों बार मौखिक ब्यक्तिगत मिलकर और पंजीकृत डाक द्वारा और पूर्व में थानाध्यक्ष द्वारा आयोजित पंचायतों में | फिर भी लखनऊ पुलिस झूठे मुकदमे करके प्रार्थी के जमीन मकान को कब्ज़ा करवा दिया पल भर में प्रार्थी के जीवन भर की कमाई को हड़प लिया | श्री मान जी लखनऊ पुलिस जिस मुख्तारेआम की बात कर रही है वह क्या है और भारतीय विधि व्यवस्था में किस तरह से परिभाषित है जब प्रार्थी यह जानता ही नही तो कूट रचना का प्रश्न ही नहीं उठता | जब प्रार्थी के पास उपरोक्त दोनों दस्तावेज है तो पुलिस का उपरोक्त रिपोर्ट महज कल्पना पर आधारित है जिसका कोई साक्ष्य पुलिस के पास नहीं है | श्री  मान जी सम्बंधित पुलिस में लेशमात्र भी ईमानदारी हो तो जिस मुख्तारेआम  की बात कर रही है और प्रार्थी पर उसके कूट रचना का आरोप है उसकी कॉपी उपलब्ध करा कर दिखा दे तो प्रार्थी स्वतः ही जमीन और मकान से दावा छोड़ देगा |  श्री मान जी मामले में पुलिस का किरदार विपक्ष का है तो निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कैसे की जा सकती है
सन्दर्भ का प्रकार : शिकायत
अधिकारी : क्षेत्राधिकारी
विभाग : गृह एवं गोपन
सन्दर्भ श्रेणी : पुलिस के विरूद्ध शिकायती प्रार्थना पत्र
संलग्नक : है

 

 

 

 

 

आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
40015719065868
आवेदक कर्ता का नाम:
Dinesh Pratap
Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9838919619,9838919619
विषय:
​​श्री मान जी पुलिस तथ्यों के आधार पर विवेचना करती है किन्तु यहा तो क्षेत्राधिकारी महोदय की रिपोर्ट मनमाना है जिसकी वजह से प्रार्थी को बार बार आवेदन करना पड़  रहा है | क्षेत्राधिकारी कैंट संतोष कुमार सिंह का रिपोर्ट दिनांक २५ सितम्बर  २०१९  जो की जनसुनवाई पोर्टल पर प्रस्तुत है शिकायत के साथ संलग्न है के अनुसार  पैरा इस प्रकार है | वर्ष  १९९९ में एक प्रोजेक्ट लगाने के सिलसिले में बाबू सिंह  देहरादून शिफ्ट हो गए थे तथा उसी दौरान इनके द्वारा अपने मकान के भूतल भाग को दिनेश प्रताप सिंह को किराया पर दिया गया था और मकान के प्रथम तल पर स्थित दो कमरों में अपने गृहस्थी का सामान ताला बंद कर अपने कब्जे में रखा था इस दौरान कभी वह स्वयं और कभी उनकी पत्नी किराया लेने मकान का देखभाल करने आते  रहते थे इस दौरान कई बार उन्होंने दिनेश प्रताप सिंह से किराया दारी  अनुबंध बनाने को कहा परन्तु किराया दारी अनुबंध नहीं हो सका इस तहत दिनेश प्रताप सिंह ने साजिशन एक मुख्तारेआम  बना कर बाबू सिंह के समक्ष किरायेदारी अनुबंध पात्र  बता कर हस्ताक्षर करा  दिए चुकी बाबू सिंह ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे वह सिर्फ हस्ताक्षर बनाते थे इसी का फायदा उठा कर दिनेश प्रताप सिंह ने एक मुख्तारेआम बना कर मकान पर कब्ज़ा कर लिया | क्षेत्राधिकारी कैंट संतोष कुमार सिंह को ज्ञात हो की प्रार्थी को जो मुख्तारनामा लखनऊ निबंधक के समक्ष बाबू सिंह ने दिया उस पर दिनांक १२ जून  १९९८ लिखा है जिसकी कॉपी आज भी निबंधक कार्यालय में सुरक्षित है श्री मान जी निबंधक कार्यालय से प्रार्थी के कथन का सत्यापन करा ले | क्षेत्राधिकारी कैंट को ज्ञात हो की प्राथी और बाबू सिंह के बीच इकरारनामा की तिथि १२ जून १९९८ अर्थात यह भी १९९९ से पूर्व का है | और उपरोक्त दोनों दस्तावेज आप को दर्जनों बार मौखिक ब्यक्तिगत मिलकर और पंजीकृत डाक द्वारा और पूर्व में थानाध्यक्ष द्वारा आयोजित पंचायतों में | फिर भी लखनऊ पुलिस झूठे मुकदमे करके प्रार्थी के जमीन मकान को कब्ज़ा करवा दिया पल भर में प्रार्थी के जीवन भर की कमाई को हड़प लिया | श्री मान जी लखनऊ पुलिस जिस मुख्तारेआम की बात कर रही है वह क्या है और भारतीय विधि व्यवस्था में किस तरह से परिभाषित है जब प्रार्थी यह जानता ही नही तो कूट रचना का प्रश्न ही नहीं उठता | जब प्रार्थी के पास उपरोक्त दोनों दस्तावेज है तो पुलिस का उपरोक्त रिपोर्ट महज कल्पना पर आधारित है जिसका कोई साक्ष्य पुलिस के पास नहीं है | श्री  मान जी सम्बंधित पुलिस में लेशमात्र भी ईमानदारी हो तो जिस मुख्तारेआम  की बात कर रही है और प्रार्थी पर उसके कूट रचना का आरोप है उसकी कॉपी उपलब्ध करा दिखा दे तो प्रार्थी स्वतः ही जमीन और मकान से दावा छोड़ देगा |  श्री मान जी मामले में पुलिस का किरदार विपक्ष का है तो निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कैसे की जा सकती है
नियत तिथि:
27 – Oct – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:

 

आवेदन का संलग्नक

 

अग्रसारित विवरण

 

क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
27 – Sep – 2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट
अनमार्क

 

 

 

आवेदन का विवरण
शिकायत संख्या
60000190146564
आवेदक कर्ता का नाम:
Dinesh Pratap
Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
9838919619,
विषय:
श्री मान जी क्या इकरारनामा और मुख्तारनामा का उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोई महत्व नहीं है क्योकि पुलिस अधिकारी ने उपरोक्त दस्तावेज को देखते ही  उन्हें हीं  सिर्फ जाली कहा बल्कि ब्यथित को जालसाज कहते हुए कई गंभीर धाराओं में  झूठा मुकदमा भी कायम कर दिया और इतने से जब संतुष्टि नहीं हुई  तो प्रार्थी की विमार चल रही पत्नी बेटी को भी उन्ही गंभीर भारतीय दंड संहिता  की मनगढ़ंत धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर ली और क्षेत्राधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार आरोप पत्र  भी न्यायालय को भेजा जा चुका है यह और बात है की पिछले १० वर्षो से मेरा वकील रोज एक घंटे समय देते है की कहा है आरोप पत्र किन्तु उन्हें आज तक नहीं प्राप्त हुआ माननीय जज महोदय भी सम्मन  नहीं भेज पा रहे है क्योकि आरोप पत्र  केसर और आभा के नाम का अभी तक उन्हें भी प्राप्त नहीं हुआ श्री मान जी मुख्तारनामा  और इकरारनामा तो प्रार्थी लखनऊ पुलिस को दिखा रहा था की बेटी और पत्नी किन्तु उपरोक्त दोनों शब्दों से लखनऊ पुलिस इतनी आग बबूला हो गई की जालसाजी का केस मेरी बेटी   पत्नी के ऊपर भी कर डाला और मै  परिवार सहित मकान  छोड़ कर कमरों में ताला लगा कर पुलिस के आतंक से  परिवार सहित भागा और इसी लिए तो ऍफ़.आई.आर. का खड्यंत्र किया गया था और आसानी से ताला खोल कर समस्त सामान कब्जे में ले कर मकान और जमीन पर कब्जा कर लिया गया श्री मान जी क्या भ्रस्टाचार इतना बढ़ गया है की क़ानूनी दस्तावेजों को
भी अब जाली दस्तावेज कहा
   जाएगा पुलिस के द्वारा और इतना ही नहीं सीधे साधे   लोगो की जीवन भर की कमाई हड़प कर लेंगे  मुख्तारनामा या अधिकार पत्र (power of
attorney (POA)
या letter of attorney) एक लिखित दस्तावेज है जिसमें कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को यह अधिकार देता है कि वह उसके किसी निजी कार्य, व्यापार या किसी कानूनी कार्य के लिये उसका प्रतिनिधित्व करे (अर्थात उसकी ओर से कार्य करे) जिसको यह अधिकार दिया जाता है उसे मुख्तार या एटार्नी (attorney)
कहते हैं।अधिकार पत्र के सम्बन्ध में कानून, एजेन्सी कानून के अन्तर्गत बनाया गया है। अधिकार पत्र एक लिखित साधन है जो कि किसी व्यक्ति को उसके लिखने वाले व्यक्ति की जगह कार्य कर सकने का अधिकार देता है। विशेष अधिकार पत्र (Specific Power of Attorney) – विशेष अधिकार पत्र कोई विशेष कार्य के लिए किसी को दिया जाता है। उदाहरण के लिये, कर अधिकारी के समक्ष कम्पनी के रजिस्ट्रार के समक्ष कागजात लेकर प्रस्तुत होने के लिए या दस्तावेजों के पंजीकरण करने हेतु उपरजिस्ट्रार के सम्मुख प्रस्तुत करने हेतु।An agreement for sale, is an agreement
to sell a property in future. This agreement specifies the terms and
conditions, under which the property in question will be transferred. The
Transfer of Property Act, 1882, which regulates the matters dealing with the
sale and transfer of house property, defines the contract for sale or an
agreement for sale as under:
नियत तिथि:
09 – Oct – 2019
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:

 

आवेदन का संलग्नक

 

अग्रसारित विवरण

 

क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
लोक शिकायत अनुभाग – 1(मुख्यमंत्री कार्यालय )
24 – Sep – 2019
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव गृह एवं गोपन
कृपया शीघ्र नियमानुसार कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा की गई है।
अधीनस्थ को प्रेषित
2
अंतरित
अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव (गृह एवं गोपन )
26 – Sep – 2019
जिलाधिकारीलखनऊ,
कृपया प्रकरण में शीध्र यथोचित कार्यवाही करने का कष्ट करें
अधीनस्थ को प्रेषित
3
अंतरित
जिलाधिकारी ( )
26 – Sep – 2019
वरिष्ठ /पुलिस अधीक्षकलखनऊ,पुलिस
जांच कर आख्या प्रेषित करें
अधीनस्थ को प्रेषित
4
अंतरित
वरिष्ठ /पुलिस अधीक्षक (पुलिस )
26 – Sep – 2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट
नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें
कार्यालय स्तर पर लंबित

 

 

 

3 comments on पुलिस में लेशमात्र भी ईमानदारी हो तो जिस मुख्तारेआम की बात कर रही है प्रार्थी को उसकी कॉपी उपलब्ध करा कर दिखा दे

  1. क्षेत्राधिकारी कैंट संतोष कुमार सिंह को ज्ञात हो की प्रार्थी को जो मुख्तारनामा लखनऊ निबंधक के समक्ष बाबू सिंह ने दिया उस पर दिनांक १२ जून १९९८ लिखा है जिसकी कॉपी आज भी निबंधक कार्यालय में सुरक्षित है श्री मान जी निबंधक कार्यालय से प्रार्थी के कथन का सत्यापन करा ले | क्षेत्राधिकारी कैंट को ज्ञात हो की प्राथी और बाबू सिंह के बीच इकरारनामा की तिथि १२ जून १९९८ अर्थात यह भी १९९९ से पूर्व का है |

  2. Why PIO is running away from providing sought information?
    Please provide the documents proving/supporting confliction/contrary claims in the dates of death of Babu Singh. Communication of former circle officer Tanu Upadhyay is also supporting the claim of Manoj Kumar Sub-inspector, Police station, Ashiyana. Whether Babu Singh’s mysterious death really took place on the aforementioned dates?

    5-Please provide the detail of witness testimony of Babu Singh ever given by him before the Lucknow police in the matter concerned as his witness if ever examined by the police is the core of the entire controversy.

  3. About the power of attorney about which aggrieved applicant is talking about is safe in the records of office of Registrar of Lucknow still not canceled. Undoubtedly here police is playing the partial role in the matter and its partial approach can never be justified. Aggrieved applicant has sought information under Right to Information act 2005 and if the concerned public functionaries are honest why are they not providing sought information to the information seeker that is aggrieved applicant by pursuing the subsection 1 of section 7 of Right to Information act 2005 according to which an Information seeker must be provided access to information within 30 days from the date of receipt of the application under RTI act. Undoubtedly the sought information is concerned with the serious irregularities had been committed by the staffs of the police so they must provide information in the interest of Justice but it seems that they are procrastinating in the matter which is showing that they are protecting the subordinate staff.

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