अखिलेश यादव आखिरकार सिद्ध कर दिए उनके लिए प्रदेश और कानून उनके मंत्रियों से बड़ा हैं |

Undoubtedly Chief minister Mr. Akhilesh Yadav gave
a new ray of hope to citizens of state by adopting the path of large scale
reshuffle in the ministry of state. It seems that youth chief minister of state
wants to win the confidence of people of state by providing the good governance
to them.
उत्तर
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी काबीना में बड़ा फेरबदल करते हुए गुरुवार को आठ मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया और कई के विभाग छीन लिए हैं। This is signal  to
entire ministry that if their function will not conform to the standard set up
norm ,then chief minister of state will not tolerate the dereliction of duty
and stern action would be taken against the wrongdoers .
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रस्ताव पर राजा महेन्द्र अरिदमन सिंह, मंत्री स्टाम्प तथा न्याय शुल्क पंजीयन नागरिक सुरक्षा, अम्बिका चौधरी, मंत्री पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकलांग कल्याण, शिव कुमार बेरिया मंत्री वस्त्र उद्योग एवं रेशम उद्योग, नारद राय, मंत्री खादी एवं ग्रामोद्योग, शिवाकान्त ओझा, मंत्री प्राविधिक शिक्षा,आलोक कुमार शाक्य राज्यमंत्री प्राविधिक शिक्षा, योगेश प्रताप सिंह योगेश भइया’, राज्यमंत्री बेसिक शिक्षा, भगवत शरण गंगवार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग को मंत्री पद से पदमुक्त कर दिया है। 
This is signal that there may be delay in taking
action against wrongdoers but youth chief minister of state Mr. Akhilesh Yadav
will not spare the wrongdoers irrespective their status rank and
influential  position. Whether it can be
justified to overlook the people of state who provided the overwhelming
majority to Samajwadi Party contested last election under the active and
efficient leadership of Mr. Akhilesh Yadav.This is an efforts to provide
justice to people of state who had expressed 
confidence in the Samajwadi party in the last election.
राज्यपाल ने पदमुक्त किये गये मंत्रियों के विभागों का कार्य अतिरिक्त कार्य प्रभार के रूप में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आवंटित कर दिया है। 
इसके अतिरिक्त नाईक ने मुख्यमंत्री के दूसरे प्रस्ताव पर अहमद हसन, मंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण मातृ एवं शिशु कल्याण, अवधेश प्रसाद, मंत्री समाज कल्याण अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण सैनिक कल्याण, पारस नाथ यादव, मंत्री उद्यान खाद्य प्रसंस्करण, राम गोविन्द चौधरी, मंत्री बेसिक शिक्षा, दुर्गा प्रसाद यादव, मंत्री परिवहन, ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी, मंत्री होमगार्डस् प्रांतीय रक्षक दल, रघुराज प्रताप सिंह राजा भइया, मंत्री, खाद्य एवं रसद, इकलाब महमूद, मंत्री मत्स्य सार्वजनिक उद्यम, महबूब अली मंत्री माध्यमिक शिक्षा को आवंटित विभाग हटाकर उनके विभागों का कार्य मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अतिरिक्त प्रभाग के रूप में आवंटित कर दिया है। जबकि उक्त मंत्री बिना विभाग के अपने पद पर बने रहेंगे। This is lesson to those who thinks
themselves above the citizenry of state. Democracy is the government of people
by the people for the people. One of the excellent characteristics of good
governance is that its accountable staff may 
pursue the rule of law. Rule of law requires the government should be
subject to law, rather than the law subject to the government. Here these
ministers think itself above the law.
राज्यपाल राम नाईक नए मंत्रियों को 31 अक्टूबर, 2015 शनिवार सुबह 10.30 पर राजभवन में आयोजित एक समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायेंगे।

2 comments on अखिलेश यादव आखिरकार सिद्ध कर दिए उनके लिए प्रदेश और कानून उनके मंत्रियों से बड़ा हैं |

  1. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रस्ताव पर राजा महेन्द्र अरिदमन सिंह, मंत्री स्टाम्प तथा न्याय शुल्क पंजीयन व नागरिक सुरक्षा, अम्बिका चौधरी, मंत्री पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकलांग कल्याण, शिव कुमार बेरिया मंत्री वस्त्र उद्योग एवं रेशम उद्योग, नारद राय, मंत्री खादी एवं ग्रामोद्योग, शिवाकान्त ओझा, मंत्री प्राविधिक शिक्षा,आलोक कुमार शाक्य राज्यमंत्री प्राविधिक शिक्षा, योगेश प्रताप सिंह 'योगेश भइया’, राज्यमंत्री बेसिक शिक्षा, भगवत शरण गंगवार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग को मंत्री पद से पदमुक्त कर दिया है।

  2. Transparency and accountability is the integral part of good governance but who think about it in this anarchy. After all what ever steps taken by chief minister of state in order to curb anarchy which is rampant in the state is praiseworthy must be welcomed from all quarters which is the need of hour. This is universal truth that no action is taken against the wrongdoers in this state. Most of wrongdoers are promoted and are made from Principal of college to chairman of uttar pradesh public Service Commission.

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