हर वर्ष पाठ्य पुस्तकों का बदलना कहा तक जायज है क्या अभिभावकों पर अनावश्यक बोझ नही है |योगी

Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh yogimpsingh@gmail.com

10:51 (2 minutes ago)

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lokayukta
विषय–श्री मान जी बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा मीडिया को बुला कर एन. सी. ई. आर. टी. की पुस्तकों की कमी का रोना क्यों रोया जा रहा है क्योकि सभी जानते है की वह एक जटिल प्रक्रम है वह हमेशा लगभग जुलाई तक होता है| सरकार का ध्यान सही मुद्दों से भटकाने का अच्छा तरीका है|
श्री मान जी प्रार्थी आप का ध्यान निम्न विन्दुओं पर आकृष्ट करता है |
१-श्री मान जी सरकार एन. सी. ई. आर. टी. की पुस्तकों को चला सकती है किन्तु प्राइवेट अंग्रेजी माध्यम के स्कूल नही चला सकते है | क्यों की ये विद्यालय गुड़वत्ता से समझौता नही करते| मै अपनी बच्ची को एक प्रश्न का आंसर बता दिया था मेरी बच्ची दूसरे दिन कहती है आपने जो आंसर बताया उसे क्लास टीचर ने गलत कर दिया यह सुन कर मै आश्चर्यचकित रह गया | किसी ढंग से रात बीती दूसरे दिन ही पहुचे स्कूल और मैडम से पूछा कैसे आंसर गलत है तो प्रधानाध्यापिका महोदया जवाब देती है की आंसर गलत नही है इसलिए काटा गया है की बच्ची ने वह नही लिखा है जो टीचर ने बताया| हमने कहा मैडम जिस शिक्षक / शिक्षिका को यह नही मालूम की विद्यार्थी सही आंसर लिखा है की गलत वह पढाता कैसे होगा|
२-श्री मान जी नये शुल्क नियमन में राज्य सरकार ने कहा है की हर वर्ष प्रवेश शुल्क नही लिया जाएगा किन्तु मैडम ने इस वर्ष भी प्रवेश शुल्क लिया है किन्तु मैंने इस बात का विरोध नही किया और इस वजह से हमारे ऊपर १००० रुपये अतिरिक्त बोझ पड़ा | इस समय मेरा परिवार भुखमरी के कगार पर है किन्तु मै चुप रहा क्यों की बच्चो को वही पढना है क्यों की आवास से नजदीक है दूर जायेगे तो सुरक्षा की भी चिंता होगी और पैदल चले जाते है तो रिक्शे का भाडा बच जाता है|
३-श्री मान जी मै तीन वर्षो से मांग कर रहा हु की हर वर्ष किताबे न बदली जाय क्यों अनावश्यक रूप से मुझे अपने लड़के की किताब खरीदनी पड़ती है किन्तु कौन सुने | बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आराजकता का राज है कुछ भी लिख कर शिकायत का निस्तारण करा लेते है | इस बार तो हद ही हो गयी विद्यालय में भी किताब का सेट न लेने पर सम्बंधित बुक सेलर का नाम बताया गया और वह भी सेट न लेने पर किताब बेचने से मना कर दिया एक बहाना बना कर | क्या यह मोनोपोली नही है | यह भ्रष्टाचार नही बल्कि भ्रस्टाचार का राज है और निरीह जनता इसमें पिस रही है | इसका असर २०१९ के चुनाव में दिखाई देगा जब एक तरफ से पार्टी का सफाया हो जाएगा | खुले आम भ्रस्टाचार को प्रश्रय दिया जा रहा है और भ्रष्टाचारियो के खिलाफ कार्यवाही नही हो रही है |
                        कार्यवाही करने का आप के पास समय ही नही है |
This is a humble request of your applicant to you Hon’ble Sir that It can never be justified to overlook the rights of the citizenry by delivering services in an arbitrary manner by floating all set up norms. This is sheer mismanagement which is encouraging wrongdoers to reap the benefit of loopholes in the system and depriving poor citizens of the right to justice. Therefore it is need of the hour to take concrete steps in order to curb grown anarchy in the system. For this, your applicant shall ever pray you, Hon’ble Sir.
                                             Yours sincerely
                                    Yogi M. P. Singh Mobile number-7379105911
Mohalla-Surekapuram, Jabalpur Road, District-Mirzapur, Uttar Pradesh, India.
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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

श्री मान जी सरकार एन. सी. ई. आर. टी. की पुस्तकों को चला सकती है किन्तु प्राइवेट अंग्रेजी माध्यम के स्कूल नही चला सकते है | क्यों की ये विद्यालय गुड़वत्ता से समझौता नही करते| मै अपनी बच्ची को एक प्रश्न का आंसर बता दिया था मेरी बच्ची दूसरे दिन कहती है आपने जो आंसर बताया उसे क्लास टीचर ने गलत कर दिया यह सुन कर मै आश्चर्यचकित रह गया | किसी ढंग से रात बीती दूसरे दिन ही पहुचे स्कूल और मैडम से पूछा कैसे आंसर गलत है तो प्रधानाध्यापिका महोदया जवाब देती है की आंसर गलत नही है इसलिए काटा गया है की बच्ची ने वह नही लिखा है जो टीचर ने बताया| हमने कहा मैडम जिस शिक्षक / शिक्षिका को यह नही मालूम की विद्यार्थी सही आंसर लिखा है की गलत वह पढाता कैसे होगा|

Arun Pratap Singh
2 years ago

श्री मान जी मै तीन वर्षो से मांग कर रहा हु की हर वर्ष किताबे न बदली जाय क्यों अनावश्यक रूप से मुझे अपने लड़के की किताब खरीदनी पड़ती है किन्तु कौन सुने | बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आराजकता का राज है कुछ भी लिख कर शिकायत का निस्तारण करा लेते है | इस बार तो हद ही हो गयी विद्यालय में भी किताब का सेट न लेने पर सम्बंधित बुक सेलर का नाम बताया गया और वह भी सेट न लेने पर किताब बेचने से मना कर दिया एक बहाना बना कर | क्या यह मोनोपोली नही है | यह भ्रष्टाचार नही बल्कि भ्रस्टाचार का राज है और निरीह जनता इसमें पिस रही है | इसका असर २०१९ के चुनाव में दिखाई देगा जब एक तरफ से पार्टी का सफाया हो जाएगा | खुले आम भ्रस्टाचार को प्रश्रय दिया जा रहा है और भ्रष्टाचारियो के खिलाफ कार्यवाही नही हो रही है |
कार्यवाही करने का आप के पास समय ही नही है |

Mahesh Pratap Singh Yogi M. P. Singh

Think about the gravity of situation that the teacher who can not decide whether answer is right or wrong? Principal of such institution is talking of quality of education. In the name of quality of education, cheating gullible people.

Arun Pratap Singh
2 years ago

Such unethical practice is because of the sheer corruption in the system and principal of the institution is cheating innocent and gullible people of the district. Here surprising is that concerned staffs of the education department are acting in caucus with such cheaters.

Vandana Singh
Vandana Singh
4 months ago

बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आराजकता का राज है कुछ भी लिख कर शिकायत का निस्तारण करा लेते है | इस बार तो हद ही हो गयी विद्यालय में भी किताब का सेट न लेने पर सम्बंधित बुक सेलर का नाम बताया गया और वह भी सेट न लेने पर किताब बेचने से मना कर दिया एक बहाना बना कर | क्या यह मोनोपोली नही है | यह भ्रष्टाचार नही बल्कि भ्रस्टाचार का राज है और निरीह जनता इसमें पिस रही है | इस समय अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में लूट मची हुई है