राहुल सरकार में शामिल होते ज़िम्मेदारी लेने में नाकाबिलियत उनकी पहली बड़ी ग़लती है.

सरकार में शामिल होते
राहुल की सरकार में शामिल होने और ज़िम्मेदारी लेने
में नाकाबिलियत उनकी पहली बड़ी ग़लती है
. राजनीति में एक सांसद से कानून निर्माता की भूमिका निभाने और लोगों की
भलाई के लिए काम करने की उम्मीद की जाती है
.
कांग्रेस और यूपीए नेता के रूप में, ख़ासतौर पर 2009-14 के दूसरे दौर में, उन्होंने
यह स्वर्णिम मौका खो दिया हालांकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें कम से कम
आधा दर्जन बार मंत्रिमंडल में शामिल होने का न्यौता दिया
.
राहुल प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री बन
सकते थे और भारत सरकार के काम करने की दुर्लभ
(और बेहद काम की) अंदरूनी
जानकारी हासिल कर सकते थे
. वह यह
समझ सकते थे
(और कहीं बेहतर ढंग से) कि सिस्टमकी दिक्कत
क्या है और महिला सशक्तिकरण
, युवा
अभिलाषाएं
, दलितों, अल्पसंख्यकों के लिए बेहतर मौके क्यों अब भी एक
सपना ही हैं
.

4 comments on राहुल सरकार में शामिल होते ज़िम्मेदारी लेने में नाकाबिलियत उनकी पहली बड़ी ग़लती है.

  1. राहुल प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री बन सकते थे और भारत सरकार के काम करने की दुर्लभ (और बेहद काम की) अंदरूनी जानकारी हासिल कर सकते थे. वह यह समझ सकते थे (और कहीं बेहतर ढंग से) कि "सिस्टम" की दिक्कत क्या है और महिला सशक्तिकरण, युवा अभिलाषाएं, दलितों, अल्पसंख्यकों के लिए बेहतर मौके क्यों अब भी एक सपना ही हैं.At least he had to understand the problems of common people by participating in the government. Arvind kejrival is only individual sole capable and honest individual to be P.M. of this country. Now countrymen should focus this man. This man is favourite of secular people. Poor and downtrodden think it as its messiah.

  2. Indeed Rahul Gandhi didn't make constructive approach in order to provide good governance to people of country. No schemes of central government could reach to needy so all welfare schemes of government gone in vain.

  3. राहुल प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री बन सकते थे और भारत सरकार के काम करने की दुर्लभ (और बेहद काम की) अंदरूनी जानकारी हासिल कर सकते थे. वह यह समझ सकते थे (और कहीं बेहतर ढंग से) कि “सिस्टम” की दिक्कत क्या है और महिला सशक्तिकरण, युवा अभिलाषाएं, दलितों, अल्पसंख्यकों के लिए बेहतर मौके क्यों अब भी एक सपना ही हैं.At least he had to understand the problems of common people by participating in the government. Arvind kejrival is only individual sole capable and honest individual to be P.M. of this country. Now countrymen should focus this man. This man is favourite of secular people. Poor and downtrodden think it as its messiah.

Leave a Reply

%d bloggers like this: