मोदी सरकार जहा लोकसेवको का तनख्वाह तीन गुना कर वाह वाही लूट रही वही वृद्ध महिलाओं को पेंशन तक नही दे रही

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समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली, उत्तर प्रदेश
सन्दर्भ संख्या:-40019918001993
आवेदनकर्ता का विवरण :
नाम : निशा पिता/पति का नाम : होरी लाल   लिंग : स्त्री
मोबाइल नंबर-1 : 8687094297 मोबाइल नंबर-2 : 8687094297 ईमेल : yogimpsingh@gmail.com
क्षेत्र : नगरीय प्रदेश : उत्तर प्रदेश जनपद : मिर्ज़ापुर
तहसील : सदर ब्लाक : —- ग्राम पंचायत : —-
थाना : कोतवाली सिटी Address : तहसील-सदर, जिला-मिर्ज़ापुर
शिकायत/सुझाव क्षेत्र की जानकारी :
क्षेत्र : नगरीय प्रदेश : उत्तर प्रदेश जनपद : मिर्ज़ापुर
तहसील : सदर ब्लाक : ग्राम पंचायत : —-
ग्राम : 0 थाना : कोतवाली सिटी
आवेदन का विवरण :
आवेदन पत्र का विवरण :
सन्दर्भ का प्रकार : शिकायत अधिकारी : जिलाधिकारी विभाग : राजस्व एवं आपदा विभाग
सन्दर्भ श्रेणी : भ्रष्टाचार / वित्तीय अनियमितता/कार्यों-विभागीय योजनाओं में लापरवाही/जांच Application Old Reference No : 40019918000316
संलग्नक : है

आवेदन
का विवरण
शिकायत संख्या
40019918001993
आवेदक कर्ता का नाम:
निशा
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०:
8687094297,8687094297
विषय:
तहसीलदार सदर की आख्‍यानुसार प्रश्‍नगत प्रकरण में आवेदिका के दो
पुत्र हैं तथा प्राइवेट नौकरी करके जीविकोपार्जन करते हैं। प्रार्थीनी दोनों के
साथ रहती है। उपराेक्‍त के आधार पर प्राथी्नी के परिवार की वार्षिक आय उनसठ हजार
रूपये जारी किया गया है। जो सत्‍य है प्रार्थीनी के दोनों पुत्र कमाउ हैं। आय के
आकलन में अनियमितता नहीं है। प्रार्थना पत्र निक्षेपित किये जाने योग्‍य है।
प्रश्‍नगत प्रकरण में आवेदिका के दो पुत्र हैं तथा प्राइवेट नौकरी करके
जीविकोपार्जन करते हैं। प्रार्थीनी दोनों के साथ रहती है। उपराेक्‍त के आधार पर
प्राथी्नी के परिवार की वार्षिक आय उनसठ हजार रूपये जारी किया गया है। जो सत्‍य
है प्रार्थीनी के दोनों पुत्र कमाउ हैं। आय के आकलन में अनियमितता नहीं है।
प्रार्थना पत्र निक्षेपित किये जाने योग्‍य है। श्री मान जी उपजिलाधिकारी महोदय
सदर किस आधार पर प्रार्थी की आय दिनांक १८
नवम्बर
२०१७ को रूपया ५९ हजार वार्षिक
थी और दिनांक १५
दिसम्बर२०१७ को रुपया ६० हजार वार्षिक थी | श्री
मान जी उपजिलाधिकारी महोदय क्या उन मानको की ब्याख्या जनहित में जनता के समक्ष
लायेंगे
|श्री मान जी प्रमाण के तौर पर दोनों आय प्रमाण
पत्र की स्कैन कापी संलग्न है

| श्री मान जी 14 – Jan – 2018 तहसीलदार सदर की आख्‍यानुसार प्रश्‍नगत प्रकरण
में आवेदिका के दो पुत्र हैं तथा प्राइवेट नौकरी करके जीविकोपार्जन करते हैं
|प्रार्थीनी
दोनों के साथ रहती है। उपराेक्‍त के आधार पर प्राथी्नी के परिवार की वार्षिक आय
उनसठ हजार रूपये जारी किया गया है। जो सत्‍य है
| क्या
उपजिलाधिकारी महोदय प्रार्थिनी के दोनों पुत्रो के यहां प्रार्थिनी को देखा है
और जिस समय सरकार का नौकर मेरे घर आया था उस समय मै किस पुत्र के घर थी सच तो ये
है मेरे पुत्र अपना ही खर्च नही चला पा रहे है तो मेरा क्या खर्च चलाएंगे
| जिस
आख्या के आधार पर मेरी पात्रता संदिग्ध है वह आख्या ही मनगढ़ंत है यदि नही है तो
लेखपाल नियोक्ता का नाम बताये और मासिक वेतन भुगतान की राशि बताये
|सच
यह है जिस पुत्र के घर पर मै रहती हु वह दिहाड़ी मजदूर है
| चुकि
लेखपाल को घर बैठे ४० से पचास हजार मिल जाता है इसलिए उन्हें सच नही दिखाई पड़ता
है
| पात्र को अपात्र बनाना और अपात्र को पात्र
बनाने में महारथी है
| लेखपाल खुद बताये नवम्बर में ५९ हजार वार्षिक
दिसम्बर में ६० हजार वार्षिक और फिर जनवरी में ५९ हजार वार्षिक आय का आधार क्या
है
| क्या यह मनमाना नही है | क्या
शिकायत कर्ता की शिकायत को बिना देखे ही जवाब देना उपजिलाधिकारी सदर मिर्ज़ापुर
की बहादुरी है
| क्या उनकी रिपोर्ट शिकायत के अनुसार है यदि
नही तो उनके द्वारा शासन को गुमराह करने पर उनके खिलाफ कार्यवाही क्यों नही की
जाती है
|प्रार्थी निशा चलभाष८१७६९१९९९४
नियत तिथि:
19
– Feb – 2018
शिकायत की स्थिति:
लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:

आवेदन का संलग्नक
अग्रसारित
विवरण
क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश दिनांक
अधिकारी को प्रेषित
आदेश
आख्या दिनांक
आख्या
नियत दिनांक
स्थिति
आख्या रिपोर्ट
1
अंतरित
ऑनलाइन सन्दर्भ
04 – Feb – 2018
जिलाधिकारीमिर्ज़ापुर,
अनमार्क

From
<http://jansunwai.up.nic.in/TrackGraviancePopup.aspx?complainno=40019918001993&Emaild=yogimpsingh@gmail.com&IsOldNew=N&Type=2

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Mahesh Pratap Singh Yogi M P Singh

क्या उपजिलाधिकारी महोदय प्रार्थिनी के दोनों पुत्रो के यहां प्रार्थिनी को देखा है और जिस समय सरकार का नौकर मेरे घर आया था उस समय मै किस पुत्र के घर थी सच तो ये है मेरे पुत्र अपना ही खर्च नही चला पा रहे है तो मेरा क्या खर्च चलाएंगे | जिस आख्या के आधार पर मेरी पात्रता संदिग्ध है वह आख्या ही मनगढ़ंत है यदि नही है तो लेखपाल नियोक्ता का नाम बताये और मासिक वेतन भुगतान की राशि बताये |सच यह है जिस पुत्र के घर पर मै रहती हु वह दिहाड़ी मजदूर है | चुकि लेखपाल को घर बैठे ४० से पचास हजार मिल जाता है इसलिए उन्हें सच नही दिखाई पड़ता है | पात्र को अपात्र बनाना और अपात्र को पात्र बनाने में महारथी है |

Arun Pratap Singh
2 years ago

नियत तिथि: 19 – Feb – 2018
शिकायत की स्थिति: लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:
आवेदन का संलग्नक
संलग्नक देखें
अग्रसारित विवरण-
क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी आदेश दिनांक अधिकारी को प्रेषित आदेश आख्या दिनांक आख्या नियत दिनांक स्थिति आख्या रिपोर्ट
1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 04 – Feb – 2018 जिलाधिकारी-मिर्ज़ापुर, — अधीनस्थ को प्रेषित
2 आख्या जिलाधिकारी ( ) 04 – Feb – 2018 उप जिलाधि‍कारी -सदर,जनपद-मिर्ज़ापुर,राजस्व एवं आपदा विभाग नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें अनमार्क

Preeti Singh
2 years ago

नियत तिथि: 19 – Feb – 2018
शिकायत की स्थिति: लम्बित
रिमाइंडर :
फीडबैक :
फीडबैक की स्थिति:
आवेदन का संलग्नक
संलग्नक देखें
अग्रसारित विवरण-
क्र.स. सन्दर्भ का प्रकार आदेश देने वाले अधिकारी आदेश दिनांक अधिकारी को प्रेषित आदेश आख्या दिनांक आख्या नियत दिनांक स्थिति आख्या रिपोर्ट
1 अंतरित ऑनलाइन सन्दर्भ 04 – Feb – 2018 जिलाधिकारी-मिर्ज़ापुर, — अधीनस्थ को प्रेषित
2 आख्या जिलाधिकारी ( ) 04 – Feb – 2018 उप जिलाधि‍कारी -सदर,जनपद-मिर्ज़ापुर,राजस्व एवं आपदा विभाग नियमनुसार आवश्यक कार्यवाही करें अधीनस्थ को प्रेषित
3 आख्या उप जिलाधि‍कारी (राजस्व एवं आपदा विभाग ) 05 – Feb – 2018 तहसीलदार -सदर,जनपद-मिर्ज़ापुर,राजस्व एवं आपदा विभाग आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें एवं आख्या प्रेषित करें कार्यालय स्तर पर लंबित

Bhoomika Singh
Bhoomika Singh
10 months ago

Undoubtedly Modi government is too much insensitive to the rights of weaker and oppressed section which is quite obvious from this post why government is not providing pensions to the old age people which is their rights?

beautiful images
10 months ago

Public fund must be utilised by applying due care and attention concerned public functionaries are the safeguard of the public exchequer. They must think that they are not the master of the public exchequer because public belongs to the public they are only protector.