Aggrieved Dinesh Pratap Singh is planning to file contempt petition against Home secretary

 

 

 

 

जनसुनवाई
समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली, उत्तर प्रदेश

 

सन्दर्भ संख्या:-  40015719070117

 

लाभार्थी
का
विवरण

 

नाम
Dinesh Pratap Singh
पिता/पति का
नाम
Angad Prasad Singh
मोबइल नंबर()
9838919619
मोबइल नंबर()
आधार कार्ड .
मेल
arunpratapsingh904@gmail.com
पता
Surekapuram Jabalpur Road Lakshmi Narayan
Baikunth Mahadev Mandir Mirzapur 231001

 

आवेदन
पत्र का ब्यौरा

 

आवेदन
पत्र का संक्षिप्त ब्यौरा
प्रस्तुत प्रकरण  क्षेत्राधिकारी कैंट लखनऊ के
पत्र दिनांक २३  अक्टूबर  २०१९ के सन्दर्भ में है जो
उनके द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के
जनसुनवाई पोर्टल पर प्रस्तुत की गयी |
उपरोक्त आख्या से    क्षेत्राधिकारी कैंट  तीन शिकायतों का एक
साथ निस्तारण किया है
जब की
प्रश्नगत प्रकरण भिन्न भिन्न थे | जिनका पंजीकरण नंबर कुछ  इस प्रकार है संदर्भ संख्या : 40015719066369 , दिनांक – 25 Oct 2019 तक की स्थिति आवेदनकर्ता का
विवरण :शिकायत संख्या:-40015719066369 आवेदक का नाम-Dinesh Pratap Singh संदर्भ संख्या : 40015719065868 , दिनांक – 25 Oct 2019 तक की स्थिति आवेदनकर्ता का
विवरण :शिकायत संख्या:–40015719065868 आवेदक का नाम–Dinesh Pratap Singh संदर्भ संख्या : 40015719065537 , दिनांक – 25 Oct 2019 तक की स्थितिआवेदनकर्ता का विवरण : शिकायत संख्या:-40015719065537 आवेदक का नाम-Dinesh Pratap Singh. महोदय आपने अपने आख्या में अनुराधा सिंह या
आराधना सिंह उर्फ गुड्डी सिंह के
प्रथम सूचना रिपोर्ट का
और संगीन धाराओं का
जिक्र किया है वह
११जुलाई २००९ को पंजीकृत हो कर
विवेचना पुलिस उपनिरीक्षक ओ।  पी. सिंह को सुपुर्द हुई जैसा की संलग्नक पेज से
स्पस्ट है
किन्तु श्री मान जी
यह बताए की प्रथम सूचना रिपोर्ट की कॉपी में जोकि संलग्नक का  पेज तीन है
उसमे तो
जांच अधिकारी का नाम / अनुसंधान अधिकारी का
नाम कल्याण सिंह सागर है
| जो की हाई कोर्ट अवमानना के दोषियों की सूची में शीर्ष स्थान पर
होंगे जो
की प्रार्थी द्वारा कालांतर में प्रार्थी द्वारा योजित अवमानना याचिका में ग्रहण करेंगे ऐसे में आप
द्वारा कल्याण सिंह सागर  स्थान पर उपनिरीक्षक ओ।  पी. सिंह का नाम लिए जाने पर प्राथी को आपत्ति है जिसका परिशोधन होना चाहिए यदि आपके पास अन्यथा प्रमाण है तो
उनको प्रस्तुत करे अन्यथा यह समझा जाएगा की
आपने जनसुनवाई पोर्टल की
गरिमा को कलंकित किया है श्री मान आप
ने अर्थात गृह सचिव वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और
थाना अध्यक्ष आशियाना ने क्या माननीय उच्च न्यायालय  के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है यदि आप लोग अपनी भूल सुधारते  हुए हाई कोर्ट के आदेश का स्टेटस को मेन्टेन नहीं करते तो प्राथी अवमानना याचिका दाखिल करने के लिए बाध्य होगा
संदर्भ
दिनांक
25-10-2019
पूर्व सन्दर्भ(यदि कोई है
तो)
0,0
विभाग
गृह एवं गोपन
शिकायत
श्रेणी
पुलिस के विरूद्ध शिकायती प्रार्थना पत्र

 

लाभार्थी का विवरण/शिकायत क्षेत्र का

 

शिकायत
क्षेत्र का पता
जिलालखनऊ

 

नोटअंoतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है

 

 

 

 

 

संदर्भ संख्या : 40015719065537
,
दिनांक – 25 Oct 2019 तक की स्थिति

 

आवेदनकर्ता का विवरण : शिकायत संख्या:-40015719065537

 

आवेदक का नामDinesh
Pratap Singh

 

विषय

 

श्री मान जी समस्त दस्तावेज पंजीकृत डाक से प्रार्थी द्वारा दिनांक ०७ सितम्बर २०१९ को क्षेत्राधिकारी कैंट की सेवा में प्रेषित है और इंडिया पोस्ट की वेबसाइट यह बता रही है की वे सभी दस्तावेज दिनांक ०९ सितम्बर २०१९ को दिलकुशा उपडाक घर द्वारा क्षेत्राधिकारी कैंट कार्यालय द्वारा प्राप्त किया गया किन्तु अभाग्य यह है की क्षेत्राधिकारी कैंट इस बात में ज्यादा आनंद है की आवेदक द्वारा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया इस बात का जिक्र उन्होंने अपने रिपोर्ट दिनांक २५ सितम्बर २०१९ में भी किया है जिसका मतलब होता है की प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज जो की दिनांक ०९ सितम्बर २०१९ को दिलकुशा उपडाक घर द्वारा क्षेत्राधिकारी कैंट कार्यालय द्वारा प्राप्त किया गया उपनिरीक्षक मनोज कुमार को भेजने के बजाय कार्यालय में ही अभी तक धूल खा रहा है | श्री मान जी पुलिस तथ्यों के आधार पर विवेचना करती है किन्तु यहा तो क्षेत्राधिकारी महोदय की रिपोर्ट मनमाना है जिसकी वजह से प्रार्थी को बार बार आवेदन करना पड़ रहा है | शिकायत संख्या 40015719059615
आवेदक कर्ता का नाम Dinesh Pratap
Singh
आवेदक कर्ता का मोबाइल न०9838919619 उपरोक्त प्रकरण में क्षेत्राधिकारी कैंट कहते है की बाबू सिंह की मौत १२०४२०१९ को हुई किन्तु उपनिरीक्षक मनोज कुमार और पूर्व क्षेत्राधिकारी कैंट के अनुसार मौत मई माह में हुई है शिकायत संख्या40015719058762
आवेदक कर्ता का नाम Dinesh Pratap
Singh
श्री मान जी उपरोक्त प्रकरण में प्रार्थी ने पी डी ऍफ़ डाक्यूमेंट्स के रूप में चार पत्र प्रस्तुत किया जिसमे दो पत्रों द्वारा उपनिरीक्षक मनोज कुमार ने स्वीकार किया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई फिर तत्कालीन क्षेत्राधिकारी तनू उपाध्याय द्वारा भी गोपनीय जाँच करा के अपनी आख्या में यह तथ्य उजागर किया गया की बाबू सिंह की मौत मई माह में हुई किन्तु क्षेत्राधिकारी कैंट दुर्गेश कुमार सिंह उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारिओं की आख्या को झुठलाते हुए मौत की नयी थ्योरी दिया और मौत की तारीख को एक महींने पीछे खींच दिया अर्थात बाबू सिंह की मौत अप्रैल माह में हुई और हास्यास्पद यह है की हर किसी का रिपोर्ट मनोज कुमार की आख्या पर आधारित है | According to
report of Manoj Kumar Sub inspector Police station Asiyana District Lucknow
dated 07 June 2019, Babu Singh Son of R. P. Singh died on 11 May 2019 at
Dehradun in Uttarakhand but circle officer Cant Mr. Durgesh Kumar Singh making
claims differently. According to the report submitted by the aforementioned
circle officer dated 04 Sept 2019, Babu Singh Son Of R. P. Singh died on 12 April
2019 at Dehradun in Uttarakhand moreover according to circle officer
aforementioned Registrar, death and birth, Municipal corporation, Dehradun
issued death certificate on 24062019. Whose claim is authenticated, can only be
explained senior rank officers of the department by throwing more light on the
issue. Whether it is not cryptic style of the dealing and contrary view points
are not making the matter more mysterious and reports incredible as well
Carelessness in the investigation of the police sub inspector Manoj Kumar
submitted to the concerned circle officer.

 

विभाग पुलिस

 

शिकायत श्रेणी नियोजित तारीख26-10-2019

 

शिकायत की स्थितिस्तर क्षेत्राधिकारी स्तर पद क्षेत्राधिकारी

 

Reminder- Feedback – फीडबैक की स्थिति

 

संलग्नक देखें

 

 

नोट अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

 

अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :

 

क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश/आपत्ति दिनांक
आदेश/आपत्ति
आख्या देने वाले अधिकारी
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
संल
गनक
1
अंतरित
ऑनलाइन
सन्दर्भ
26-09-2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट ,जनपदलखनऊ
22-10-2019
प्रस्तुत प्रकरण की
जांच की
गयी |जांच आख्या संलग्न है
|
निस्तारित

 

 

 

 

संदर्भ संख्या : 40015719065868
,
दिनांक – 25 Oct 2019 तक की स्थिति

 

आवेदनकर्ता का विवरण :शिकायत संख्या:–40015719065868

 

आवेदक का नामDinesh
Pratap Singh

 

विषयश्री
मान जी पुलिस तथ्यों के आधार पर विवेचना करती है किन्तु यहा तो क्षेत्राधिकारी महोदय की रिपोर्ट मनमाना है जिसकी वजह से प्रार्थी को बार बार आवेदन करना
पड़  रहा है | क्षेत्राधिकारी कैंट संतोष कुमार सिंह
का रिपोर्ट दिनांक २५ सितम्बर  २०१९  जो की जनसुनवाई पोर्टल पर प्रस्तुत है शिकायत के साथ संलग्न है के अनुसार  पैरा इस प्रकार है | वर्ष  १९९९ में एक प्रोजेक्ट लगाने के सिलसिले में बाबू
सिंह  देहरादून शिफ्ट हो गए थे तथा उसी दौरान इनके द्वारा अपने मकान
के भूतल
भाग को दिनेश प्रताप सिंह
को किराया पर दिया
गया था और मकान के प्रथम तल पर स्थित दो कमरों में अपने
गृहस्थी का सामान ताला बंद कर अपने कब्जे में रखा था इस दौरान कभी वह स्वयं और कभी उनकी पत्नी किराया लेने मकान का देखभाल करने आते  रहते थे इस दौरान कई बार उन्होंने दिनेश प्रताप सिंह से किराया दारी  अनुबंध बनाने को कहा परन्तु किराया दारी
अनुबंध नहीं
हो सका इस तहत दिनेश प्रताप सिंह
ने साजिशन एक मुख्तारेआम  बना कर बाबू
सिंह के समक्ष किरायेदारी अनुबंध पात्र  बता कर हस्ताक्षर करा  दिए चुकी
बाबू सिंह
ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे वह सिर्फ हस्ताक्षर बनाते थे इसी का फायदा उठा कर दिनेश प्रताप सिंह
ने एक मुख्तारेआम बना कर मकान पर कब्ज़ा कर लिया
| क्षेत्राधिकारी कैंट संतोष कुमार सिंह
को ज्ञात हो की प्रार्थी को जो मुख्तारनामा लखनऊ निबंधक के समक्ष बाबू सिंह
ने दिया
उस पर दिनांक १२ जून  १९९८ लिखा है जिसकी कॉपी आज भी निबंधक कार्यालय में सुरक्षित है श्री
मान जी निबंधक कार्यालय से प्रार्थी के कथन का सत्यापन करा ले | क्षेत्राधिकारी कैंट को ज्ञात हो की प्राथी और बाबू
सिंह के बीच इकरारनामा की तिथि १२ जून १९९८ अर्थात यह भी १९९९ से पूर्व का है | और उपरोक्त दोनों दस्तावेज आप को दर्जनों बार मौखिक ब्यक्तिगत मिलकर और पंजीकृत डाक द्वारा और पूर्व में थानाध्यक्ष द्वारा आयोजित पंचायतों में | फिर भी लखनऊ
पुलिस झूठे
मुकदमे करके
प्रार्थी के जमीन मकान
को कब्ज़ा करवा दिया
पल भर में प्रार्थी के जीवन भर की कमाई को हड़प लिया | श्री मान जी लखनऊ पुलिस जिस मुख्तारेआम की बात कर रही है वह क्या है और भारतीय विधि
व्यवस्था में किस तरह से परिभाषित है जब प्रार्थी यह जानता ही नही तो कूट रचना
का प्रश्न ही नहीं
उठता | जब प्रार्थी के पास उपरोक्त दोनों दस्तावेज है तो पुलिस का उपरोक्त रिपोर्ट महज कल्पना पर आधारित है जिसका कोई साक्ष्य पुलिस के पास नहीं है | श्री  मान जी सम्बंधित पुलिस में लेशमात्र भी ईमानदारी हो तो जिस मुख्तारेआम  की बात कर रही है और प्रार्थी पर उसके
कूट रचना
का आरोप
है उसकी
कॉपी उपलब्ध करा दिखा
दे तो प्रार्थी स्वतः ही जमीन और मकान
से दावा
छोड़ देगा
|  श्री मान जी मामले में पुलिस का किरदार विपक्ष का है तो निष्पक्ष जांच की अपेक्षा कैसे की जा सकती है

 

विभाग पुलिस शिकायत श्रेणी नियोजित तारीख27-10-2019

 

शिकायत की स्थितिस्तर क्षेत्राधिकारी स्तर पद क्षेत्राधिकारी

 

Reminder- Feedback – फीडबैक की स्थिति

 

संलग्नक देखें Click here

 

नोट अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

 

अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :

 

क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश/आपत्ति दिनांक
आदेश/आपत्ति
आख्या देने वाले अधिकारी
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
संलगनक
1
अंतरित
ऑनलाइन
सन्दर्भ
27-09-2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट ,जनपदलखनऊ
22-10-2019
प्रस्तुत प्रकरण की
जांच की
गयी |जांच आख्या संलग्न है
|
निस्तारित

 

 

 

 

संदर्भ संख्या : 40015719066369
,
दिनांक – 25 Oct 2019 तक की स्थिति

 

आवेदनकर्ता का विवरण :

 

शिकायत संख्या:-40015719066369 आवेदक का नामDinesh
Pratap Singh

 

विषय

 

प्रस्तुत प्रकरण  क्षेत्राधिकारी कैंट लखनऊ
के पत्र
दिनांक ३१ जुलाई  २०१९ के सन्दर्भ में है जो उनके द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के जनसुनवाई पोर्टल पर प्रस्तुत की गयी |   उपरोक्त आख्या में पुर्व  क्षेत्राधिकारी कैंट
श्री दुर्गेश कुमार सिंह
जी कहते
है कि मामले की जाँच
प्रभारी निरीक्षक आशियाना द्वारा उपनिरीक्षक अतृष्णा यादव से प्रकरण की जाँच
कराई और उनके अनुसार आवेदक द्वारा बाबू
सिंह पुत्र आर. पी. सिंह  को पैसा दिए जाने  और भूखंड संख्या एस एस १९१४, १९१५, १९१६, १९१७ , १९१८ सेक्टर एच  कानपूर रोड क्रय
किये जाने
का वाक्यात लगभग १५ वर्ष पुराना है | तथा आवेदन के साथ उनके द्वारा दिए गए धनराशि के एग्रीमेंट का कोई विवरण प्राप्त नहीं
हुआ | बाबू सिंह की मृत्यु की सूचना पूर्व में आवेदक को अवगत
कराई जा चुकी है महोदय दर्जनों बार आप को इकरारनामा और मुख्तारनामा से अवगत
कराया गया और पंजीकृत डाक से भी भेजा
गया जिसे
आप के कार्यालय दिनांक ०९ सितम्बर २०१९ को प्राप्त किया है डिटेल पूर्व के आवेदनों में दिया
जा चुका
है रही बात पैसा के लेन  देन  की तो प्रार्थी द्वारा प्रमाण के तौर पर तीन चेक प्रस्तुत किया जा रहा है  जिनका स्कैन पीडीऍफ़ आवेदन के साथ संलग्न है | संक्षिप्त विवरण निम्न है चेक संख्या  ३४९७१९  दिनांक ३० अप्रैल  १९९८  चेक संख्या  ३४९७१८   दिनांक ०६  मई  १९९८  चेक संख्या  ३४९७२०   दिनांक २४  अप्रैल  १९९८  जिनकी राशि क्रमसः रूपये ५१००० रूपये ५००००, रूपये ३०००० कुल धन राशि रुपये १३१०००  केसर सिंह पत्नी दिनेश प्रताप सिंह को भुगतान किया किन्तु उपरोक्त सभी चेक भारतीय स्टेट बैंक आलमबाग ने खाते
में अपर्याप्त बैलेंस होने
के कारण
बाऊंस करार
दिया | संलग्नक में हर बाउंस चेक के साथ भारतीय स्टेट बैंक आलमबाग का स्टेटमेंट कनेक्टेड है जिससे आप को अवलोकन करने में असुविधा हो | Section 138 in The
Negotiable Instruments Act, 188118 138 Dishonour of cheque for insufficiency,
etc., of funds in the account. —Where any cheque drawn by a person on an
account maintained by him with a banker for payment of any amount of money to
another person from out of that account for the discharge, in whole or in part,
of any debt or other liability, is returned by the bank unpaid, either because
of the amount of money standing to the credit of that account is insufficient
to honour the cheque or that it exceeds the amount arranged to be paid from
that account by an agreement made with that bank, such person shall be deemed
to have committed an offence and shall, without prejudice to any other
provisions of this Act, be punished with imprisonment for 19 a term which may
be extended to two years, or with fine which may extend to twice the amount of
the cheque, or with both

 

विभाग पुलिस शिकायत श्रेणी नियोजित तारीख29-10-2019

 

शिकायत की स्थितिस्तर क्षेत्राधिकारी स्तर पद क्षेत्राधिकारी Reminder- Feedback –

 

फीडबैक की स्थिति संलग्नक देखें

 

 

नोट अंतिम कॉलम में वर्णित सन्दर्भ की स्थिति कॉलम-5 में अंकित अधिकारी के स्तर पर हुयी कार्यवाही दर्शाता है!

 

अधीनस्थ द्वारा प्राप्त आख्या :

 

क्र..
सन्दर्भ का प्रकार
आदेश देने वाले अधिकारी
आदेश/आपत्ति दिनांक
आदेश/आपत्ति
आख्या देने वाले अधिकारी
आख्या दिनांक
आख्या
स्थिति
संलगनक
1
अंतरित
ऑनलाइन
सन्दर्भ
29-09-2019
क्षेत्राधिकारीक्षेत्राधिकारी कैंट ,जनपदलखनऊ
22-10-2019
प्रस्तुत प्रकरण की
जांच की
गयी |जांच आख्या संलग्न है
|
निस्तारित

 

 

3 comments on Aggrieved Dinesh Pratap Singh is planning to file contempt petition against Home secretary

  1. श्री मान आप ने अर्थात गृह सचिव वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और थाना अध्यक्ष आशियाना ने क्या माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन नहीं किया है यदि आप लोग अपनी भूल सुधारते हुए हाई कोर्ट के आदेश का स्टेटस को मेन्टेन नहीं करते तो प्राथी अवमानना याचिका दाखिल करने के लिए बाध्य होगा |

  2. Think about the gravity of situation that in the affidavit submitted on behalf home secretary Government of Uttar Pradesh itself accepted that Rs. 2.51 lakh has been paid as advance amount now when they had to support the grabbing of house automatically changed the stand and overlooked the direction of the High court.
    पेज तीन है उसमे तो जांच अधिकारी का नाम / अनुसंधान अधिकारी का नाम – कल्याण सिंह सागर है | जो की हाई कोर्ट अवमानना के दोषियों की सूची में शीर्ष स्थान पर होंगे जो की प्रार्थी द्वारा कालांतर में प्रार्थी द्वारा योजित अवमानना याचिका में ग्रहण करेंगे ऐसे में आप द्वारा कल्याण सिंह सागर स्थान पर उपनिरीक्षक ओ। पी. सिंह का नाम लिए जाने पर प्राथी को आपत्ति है जिसका परिशोधन होना चाहिए

  3. Undoubtedly matter is concerned with the deep rooted corruption in which Lucknow police is indulged, Lucknow police undoubtedly lodged FIR against the aggrieved Dinesh Pratap Singh and his wife and his daughter which is the mockery of the law of land and it is obligatory duty of the concerned public authority to curb such activities in the government machinery and government machinery should not indulge in committing the Contempt of court. Think about the gravity of situation that Lucknow bench of the high court of judicature at Allahabad is asking for seeking civil remedy from the competent court but it is too much ridiculous that Lucknow police is itself acting like competent court and provided the criminal remedy and even misled the Lower court and lodged FIR against the aggrieved Dinesh Pratap Singh which is the mockery of the law of land and such practices must be stopped in the interest of Justice and to save the country from the clutches of corrupt people not loyal to mother lan

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