कोरोना वायरस का प्रकोप आराजकता से नही मिटेगा इसके लिए पुरानी जीर्ण शीर्ण ब्यवस्था का कोई स्थान नही है

श्री मान जी आप पहले स्क्रीन शॉट को देखे जो की दिनांक ०३ मई २०२० का है जिसके अनुसार देश में कोरोना मरीजो की संख्या ४०२६३ है |

श्री मान जी अब आप दूसरा  स्क्रीन शॉट को देखे जो की दिनांक ०५  मई २०२० का है अर्थात अभी का जिसके अनुसार देश में कोरोना मरीजो की संख्या ४६४३३ है |

श्री मान जी सिर्फ दो दिन ६००० कोरोना मरीज बढे है इसका मतलब तो आसानी से समझा जा सकता है की हमारी सरकार कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने में पूर्ण असफल है |

यदि मोदी सरकार इस ढंग से असम्बेदनशील रवैया अपनायेगा तो यह देश कोरोना मरीजो का जमघट बन जाएगा |

मोदी सरकार झूठे ही कोरोना रोकने के लिए लोगो का सलाह मागती है तीन मई को यह इ-मेल भेजा गया किन्तु चंद पूजी पतियों के दबाव में आकर शराब की दुकाने खोल दी गयी जिसका दुर्व्यवस्था आपके सामने है |

Subject

Wine shops may not be allowed to open even in the green zone because it will only create mismanagement.

From

Mahesh Pratap Singh Yogi M. P. Singh

To

presidentofindia@rb.nic.in; pmosb; supremecourt; urgent-action; cmup; hgovup@up.nic.in; csup@up.nic.in

Sent

Sunday, May 3, 2020 11:06 PM

जब देश के पास अनाज का भण्डारण इतना है की पूरा देश चार वर्षो तक भोजन कर सकता है तो परेशानी किस बात की है | शराब से किसी का हित नही होता ऐसे में कोरोना वायरस के नियंत्रण तक इस बुरे लत पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए जिससे ईश्वर, अल्लाह और ईशा मसीह हम पर खुश रहे और इस प्राकृतिक आपदा से हमारी रक्षा करे |जब इसका कोई इलाज नही है तो हमे ईश्वर की शरण में जाना चाहिए क्या शराब की दुकाने खुलने से ईश्वर हमसे खुश हो जायेगे |

Right to life may be ensured guaranteed by protecting our lives from Novel Corona Virus which is a global epidemic.

Whether the following information could be provided by the government of India?

देश के करोड़ों नागरिकों,जनप्रतिनिधियो,सामाजिक कार्यकर्ताओं,अधिकारियो के नाम खुला पत्र-16
*********कोरोना कह रहा है…………..
बहती गंगा में प्रदूषण बोर्ड भी चेहरे के धब्बों को धूलने आ गया
********* बीते कल उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कि एक प्रकाशित विज्ञप्ति पढ़ने को मिली , जिसमें बोर्ड ने लॉक डाउन के दौरान सूबे के उद्योगों को राहत प्रदान करते हुए यह बताया है कि यदि लॉक डाउन के दौरान उनकी एनओसी की वैधता खत्म हो जाती है तो उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। उनके विरुद्ध प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी । पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि प्रदूषण रोकने का विधि मान्य ठेका लेकर प्रदूषण रोकने में नाकाम बोर्ड भी कोरोना काल की आड़ में अपने बीच चल रहे गोरखधंधे से जनित तमाम नाकामियों और लगे धब्बों को साफ करने की कोशिश कर रहा है । ऐसे में बोर्ड के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जानबूझकर निजी स्वार्थ के लिए बरती जा रही अनियमितताओं से पर्दा उठाना ही चाहिए।
बोर्ड की पोल खोलु इसके पहले बोर्ड की विज्ञप्ति के आधार पर छपी खबर पर कुछ सवाल करते हैं। क्या आप सभी को ऐसा लगता है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदूषण को रोकने की दिशा में पूरी ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ काम करता है? यदि करता है तो लाक डाउन के दौरान बोर्ड के संज्ञान में चल रहे प्रदेश के हजारों अनियमित उद्योगों के विरुद्ध अब तक बोर्ड ने कोई कार्यवाही की है क्या ? ऐसा सीधा सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं की आज की खबर के पीछे बोर्ड की यही मंशा लगती है कि हम अनियमित उद्योग संचालन से कोई समझौता नहीं करते हैं। बोर्ड वर्तमान में 70 चूहे खा कर बिल्ली चली गंगा स्नान वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है।
लगभग 15 -20 वर्षों का हमारा निजी अनुभव तो यही कहता है कि बोर्ड प्रदूषण नियंत्रण के जिन कानूनों एवं नियमों का पालन कराने के लिए काम कर रहा है। वह स्वयं ऐसे तमाम नियमों एवं प्रावधानों के साथ अपने दायित्व एवं कर्तव्य का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है । आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि 40 दिन पूर्व जब कोरोना की दहशत के बीच जब देश में लाक डाउन करने की घोषणा की गई थी । उस समय देश में जो जहां जिस हाल में था , वहीं पर रुक गया था ।चाहे वह रेल का पहिया रहा हो या हवाई जहाज की उड़ान या फिर देश के तमाम बड़े छोटे उद्योग सब के सब ठहर गए थे इस बीच आप सभी ने प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में फैले ईट भट्ठो के कुतुबमीनार जैसी चिमनियो से निकलता जहरीला धुआं एवं अन्य सभी कार्य अबाध गति से निरंतर चलता देखे होंगे । इनके संचालन को देखने के बाद तो यही लगेगा कि यहां सब कुछ ठीक-ठाक है, जबकि आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि बोर्ड के बड़े गोरखधंधे का जमीन यही ईट भट्ठे ही हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्तमान सत्र के शुरुआती दिनों में जो आंकड़े प्रस्तुत किए थे। उसके मुताबिक प्रदेश में 19003 ईंट भट्ठे स्थापित हैं। इनमें मात्र 8851को चलाने की बैध अनुमति है, जिसमें 10065 को पूरी तरह डिफाल्टर बताया गया है। 3266 ईंट भट्ठा के संचालन को रोकने के लिए बंदी आदेश जारी है। इतना ही नहीं बंदी आदेश के बीच आदेश का उल्लंघन पाए जाने पर 203 भट्ठों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की संतुष्टि शासन को भेजी जा चुकी है। इतना ही नहीं पर्यावरण संरक्षण नियमों का अनुपालन नहीं करने की दशा में लगभग 8000 इंच भट्ठों को नोटिस जारी की गई है। अब आप सभी सहज इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि प्रदेश में कितने ईंट भट्ठे अवैध है और कितने प्रचालन की योग्यता रखते हैं। इसके बावजूद वैध अवैध सभी ईट भट्ठा की चिमनिया से निकलते हुए जहरीले धूवे को बराबर पूरे प्रदेश में देख जा रहा है ,जो इस को कोरोना काल में भी निर्बाध जारी है। हालांकि सत्र के प्रारंभ से लेकर अब तक बोर्ड अपनी गुड़ा गणित करके आंकड़ों को कुछ बदलने की कोशिश जरूर की है।
अब सवाल उठता है कि नियम कायदों के उल्लंघन का संज्ञान एवं कार्यवाही करने की कागजी रिपोर्ट के बाद भी इनका संचालन किसके इशारे पर और किसके संरक्षण में हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग का आखिर नियंता कौन है, जो सारे नियम कायदों को अपने पैर के नीचे दबा कर रखा है। हालांकि लॉक डाउन की घोषणा के एक सप्ताह बाद ही मुख्य सचिव के द्वारा एक शासनादेश जारी करके सोशल डिस्टेंसिंग सहित कुछ सावधानियों के साथ प्रतिबंधों से बाहर कर दिया गया था। यहां यह सवाल स्वयं सामने आ रहा है कि इसके पूर्व एक सप्ताह तक सभी ईट भट्ठे किस आदेश के तहत चल रहे थे। इस शासनादेश के जारी होने के बाद बोर्ड ने कितने अनियमित भट्ठा को बंद कराया एवं उनके विरुद्ध वायु प्रदूषण अधिनियम के तहत समुचित कार्रवाई की गई। इसका जवाब तो प्रदूषण बोर्ड को देना ही चाहिए। इतना ही नहीं मुख्य सचिव के इस आदेश के साथ ही एक और गंभीर सवाल यह खड़ा हुआ आखिर उनका आदेश प्रदेश के बैध भट्ठों के लिए रहा या अवैध के लिए । ऐसा इसलिए कि पत्र में इसका कहीं उल्लेख नहीं है । शासन के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में बोर्ड के द्वारा जिस प्रकार से अपने कार्यों एवं दायित्वों के निर्वहन में जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है। उसका खामियाजा तो प्रदेश के ऐसे सभी शहरी एवं ग्रामीण इलाकों के आम आदमी भुगत रहे हैं, जो क्षेत्र वायु प्रदूषण की दृष्टि से प्रदूषित एवं अति प्रदूषित क्षेत्र में आते हैं । आप सभी को यह जानकर हैरानी होगी कि जब लाक डाउन के बीच जब दिल्ली मुंबई जैसे कई नगरों महानगरों की दम घुटने वाली हवा अचानक गायब हो गई थी । गंगा-यमुना जैसी तमाम नदियों में जल की गुणवत्ता में सुधार देखा जा रहा था । पटियाला से हिमाचल की पहाड़ी तक देखने दिखाने की खबरें आ रही थी। पर्यावरण की दृष्टि से इस आश्चर्यचकित कर देने वाले कोरोना काल के दौरान भी उत्तर प्रदेश के कई ऐसे ग्रामीण इलाके ऐसे थे,जहां इन्हीं ईट भट्ठा के जहरीले धूवे एवं धूल के कणों के पर्दे की बीच एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित गांव भी स्पष्ट नहीं दिखाई पड़ रहे थे । इन ग्रामीण इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स सदैव मानक से ऊपर लगभग दोगुना पाया जा रहा है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए घातक बताया जाता है
कोरोना महामारी के संकट में पड़े देश में इससे लड़ने के लिए शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाना ही श्रेयकर उपाय बताया जा रहा है। बाबा जी ने योगा करने की सलाह दी ताकि शरीर में ऑक्सीजन का संचार ज्यादा होने से इम्यूनिटी बढ़ेगी किंतु यह बताने के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है कि मानक के अनुरूप ऑक्सीजन मिलेगी कैसे जब प्रदूषण बोर्ड ही प्रदूषण नियंत्रित करने की बजाय फैलाने का ठेका ले लिया हो । हां इतना जरूर देश के कुछ विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों ने बताया है कि प्रदूषित हवा में रहने से स्वास संबंधी तमाम रोग होने की प्रबल संभावना है। इससे इम्यूनिटी बढ़ने को कौन कहे बिगड़ती है।*********
दिनांक 04मई 2020

प्रदीप कुमार शुक्ला
आरटीआई / पर्यावरण कार्यर्ता मिर्जापुर,उत्तर प्रदेश


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Preeti Singh
6 months ago

Our public system is dilapidated which is the cause of failure in tackling the issue of Corona Virus pandemic as entire mismanagement is because of cancer of corruption which have hollowed the government machinery.
In two days,6000 new Corona Virus patients but according to our accountable public functionaries, circumstances created because of pandemic is under control. Whether such things are not ridiculous and not reflecting incompetency of the government functionaries? Statics available is being overlooked which is frightening and failure of government in tackling the issue of Corona Virus pandemic. On the one side of screen, government invites suggestion but after getting put such suggestion into the dustbin. Why wine shops were opened despite the objection of public spirited individuals.

Arun Pratap Singh
6 months ago

There is only boasting and showoff in order to curb Corona Virus pandemic and entire claims made by the concerned accountable public functionaries are false and baseless.
Modi Government remained failed everywhere whether it may be airport or sea ports or dealings with the facing of the challenges of the Corona Virus pandemic. Think about the gravity of situation that श्री मान जी १०० मरीजो पर पूर्ण लॉक डाउन ४६४३३ मरीजो पर लॉक डाउन छूट की वात कर रहे है | क्या हमारे गोदामों में अनाज की कमी हो गयी है जो की कोरोना वायरस की समस्या में शून्य प्रतिशत सफलता के बावजूद लॉक डाउन में रियायत करके कोरोना के प्रकोप को और बढ़ाना चाहते है |
Whether government functionaries will tell the justified reason of opening the wine shops through out the India when entire country is under the grip of the Corona Virus pandemic.

Beerbhadra Singh
Beerbhadra Singh
6 months ago

How the corona virus pandemic will be curbed by this rotten system where corruption is rampant quite obvious from the working style of these public functionaries? Our public functionaries are drawing huge salary from the public exchequer but not satisfied with salary and want to amass huge wealth through corrupt practices therefore they search source of back door income everywhere which is quite obvious from their working style.

Bhoomika Singh
Bhoomika Singh
6 months ago

If our public functionaries will not leave politics in this hour of crisis then how will we come out from this crisis? In 2 days 6000 new Corona patients where found whether it is good signal in this country if not why our accountable public functionaries glorifying their acts which is reflection of failure of the system? Challenges of the coronavirus Pandemic cannot be faced like campaign of the parliamentary and Assembly Elections. Bundles of Lies can not provide any constructive results in this coronavirus case. Why have THEY opened the wine shops throughout the India when there is complete lockdown is a matter of concern? Whether Lord Rama advised Saffron Brigade in dream to open the wine shops throughout the country in this hour of crisis?